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Punjab: कैप्टन के सहारे भाजपा का बड़ा गेम प्लान, 2024 में दिखेगी तस्वीर, मिल सकती बड़ी जिम्मेदारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 19 Sep 2022 11:42 PM IST
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सार

पंजाब भाजपा के पुनर्गठन का फैसला पार्टी आलाकमान किया है। इसी माह प्रदेश इकाई में व्यापक स्तर पर बदलाव दिखाई देने वाला है। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा का कार्यकाल भी जनवरी 2023 में खत्म हो रहा है और आलाकमान प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी नया चेहरा लाने की तैयारी में है। कैप्टन को भाजपा में अब पंजाब की बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।

BJP hopes to connect with Sikh voters with help of Capt Amarinder Singh
अमित शाह से मिले अमरिंदर सिंह। - फोटो : ANI
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सिख मतदाताओं से हमेशा जुड़ने के प्रयास में रही भाजपा को कैप्टन के सहारे न सिर्फ सिख के जुड़ने की उम्मीद जगी है बल्कि नाराज किसान आंदोलनकारियों को मनाने का मौका मिलने की भी आस है। वहीं, इस बदलाव के कारण सबसे बड़ा नुकसान पंजाब कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है, क्योंकि कैप्टन के जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस 2022 के चुनाव में 82 सीटों से घटकर 18 पर आ गई है। पार्टी के पास इस समय कोई ऐसा कद्दावर नेता भी दिखाई नहीं दे रहा, जो अपने बूते पर कांग्रेस को फिर से प्रदेश की सत्ता में लौटा सके।

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2022 के चुनाव में कैप्टन की पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस (पीएलसी) भले ही पंजाब में कोई करिश्मा नहीं कर सकी लेकिन यह कैप्टन का ही कद था कि पंजाब कांग्रेस के अनेक नेता- सुनील जाखड़, बलबीर सिद्धू, राजकुमार वेरका, राणा गुरमीत सोढी, फतेह जंग सिंह बाजवा, गुरप्रीत सिंह कांगड़, सुंदर शाम अरोड़ा, केवल ढिल्लों उनके इशारे पर भाजपा में शामिल हो गए। सोमवार को भी कई पूर्व सांसद और पूर्व विधायकों ने कैप्टन के साथ भाजपा ज्वाइन की। इससे यह भी साफ हो गया है कि पंजाब कांग्रेस के नेता आज भी कैप्टन से जुड़े हैं और उनके प्रभाव में हैं। 
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पंजाब में कैप्टन को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
पंजाब भाजपा के पुनर्गठन का फैसला पार्टी आलाकमान द्वारा लिया जा चुका है और इसी महीने प्रदेश इकाई में व्यापक स्तर पर बदलाव दिखाई देने वाला है। मौजूदा प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा का कार्यकाल भी जनवरी 2023 में खत्म हो रहा है और आलाकमान प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी नया चेहरा लाने की तैयारी में है। इस दौरान कैप्टन को भाजपा में अब पंजाब की ही बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। 



दरअसल, खास बात यह भी है कि कैप्टन ने अब तक जिन कांग्रेस नेताओं को भाजपा में शामिल कराया है, उनमें से ज्यादातर मालवा बेल्ट से आते हैं, जहां भाजपा का कभी कोई जनाधार नहीं रहा। भाजपा का यह भी मानना है कि अगर कैप्टन सूबे में कमांडिंग पोजिशन में रहें तो वह पार्टी को अपने दम पर अगले लोकसभा और विधानसभा में चुनाव लड़ने योग्य बना सकते हैं। इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता जिस प्रकार कैप्टन के साथ जुड़ते जा रहे हैं, उससे आने वाले समय में भाजपा को ही लाभ होगा।

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