Chandigarh: जीएमसीएच-32 में वेबिनार, OPD-Emergency छोड़ पहुंचे डाॅक्टर; दर्द में कराहते रहे मरीज
सुबह करीब 11 बजे से डॉक्टर विभागों से निकलकर वेबिनार में शामिल होने चले गए। इसका सीधा असर ओपीडी, इमरजेंसी और अन्य सेवाओं पर दिखाई दिया। मरीज रजिस्ट्रेशन कराने के बाद डॉक्टरों के कमरों के बाहर घंटों बैठे रहे।
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चंडीगढ़ जीएमसीएच-32 में बुधवार को इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भारी अव्यवस्था और इंतजार का सामना करना पड़ा। नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) की ओर से मानसिक स्वास्थ्य पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में शामिल होने के लिए डॉक्टर ओपीडी और इमरजेंसी छोड़कर चले गए।
मरीज करीब 1 घंटा 45 मिनट तक डाक्टरों का इंतजार करते रहे। हालात ऐसे रहे कि दर्द से कराहते मरीज कुर्सियों और स्ट्रेचर पर पड़े रहे जबकि कई लोग इलाज न मिलने पर लौट गए या निजी अस्पतालों की ओर चले गए।
जानकारी के अनुसार काउंसिल की ओर से मेंटल हेल्थ संबंधित विषय पर सुबह 11 बजे से वेबिनार आयोजित किया गया था। कॉलेज प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों में सभी विभागाध्यक्षों, फैकल्टी सदस्यों, सीनियर-जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की भागीदारी अनिवार्य की गई थी। इतना ही नहीं, उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए काउंसिल की तरफ से स्क्रीनशॉट साझा करने के निर्देश भी दिए गए थे।
वैकल्पिक व्यवस्था के बिना वेबिनार, अस्पताल सेवाओं पर पड़ा असर
इस कारण सुबह करीब 11 बजे से डॉक्टर विभागों से निकलकर वेबिनार में शामिल होने चले गए। इसका सीधा असर ओपीडी, इमरजेंसी और अन्य सेवाओं पर दिखाई दिया। मरीज रजिस्ट्रेशन कराने के बाद डॉक्टरों के कमरों के बाहर घंटों बैठे रहे लेकिन उन्हें समय पर परामर्श नहीं मिल सका।
इमरजेंसी में पहुंचे मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाया कि इस दौरान कई जगह केवल नर्सिंग स्टाफ या जूनियर कर्मचारी ही मौजूद थे। एक परिजन ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए वेबिनार किया जा रहा था लेकिन यहां मरीजों और परिजनों का मानसिक तनाव कई गुना बढ़ गया। अस्पताल प्रशासन को पहले वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।
वेबिनार अनिवार्य था तो अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्था करनी चाहिए थी
ओपीडी में इलाज के लिए आए एक बुजुर्ग मरीज ने बताया कि वह सुबह से लाइन में लगा था लेकिन डॉक्टर के न आने से उसे बिना इलाज लौटना पड़ा। वहीं, एक महिला मरीज के परिजन ने कहा कि डॉक्टरों के इंतजार में हालत बिगड़ने लगी तो उन्हें मजबूरी में निजी अस्पताल जाना पड़ा। सूत्रों के अनुसार कुछ विभागों में ओटी और इमरजेंसी सेवा भी प्रभावित रही। मरीजों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों में इस प्रकार एक साथ डॉक्टरों का विभाग छोड़ देना गंभीर चिंता का विषय है। मरीजों और परिजनों का आरोप है कि यदि वेबिनार अनिवार्य था तो अस्पताल प्रशासन को चरणबद्ध व्यवस्था बनानी चाहिए थी ताकि मरीजों का इलाज प्रभावित न हो।