{"_id":"69f57fee3585155e7e0b91e3","slug":"commercial-cylinder-rates-soar-street-vendors-to-hotels-and-restaurants-food-and-dining-costs-skyrocket-2026-05-02","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"फूटा गैस बम: कॉमर्शियल सिलिंडर के दाम बढ़े, रेहड़ी से लेकर होटल-रेस्टोरेंट तक हाहाकार; खाना-पीना सब महंगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फूटा गैस बम: कॉमर्शियल सिलिंडर के दाम बढ़े, रेहड़ी से लेकर होटल-रेस्टोरेंट तक हाहाकार; खाना-पीना सब महंगा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़/पंचकूला/मोहाली
Published by: Nivedita
Updated Sat, 02 May 2026 10:10 AM IST
विज्ञापन
सार
मध्यम से बड़े कारोबारियों का कहना है कि महीने में 20-25 सिलिंडर की खपत पर 25-30 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है जिसे बिना दाम बढ़ाए संभालना संभव नहीं है।
कॉमर्शियल गैस सिलिंडर के दाम बढ़े
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
कॉमर्शियल गैस सिलिंडर के दाम में 993 रुपये की भारी-भरकम बढ़ोतरी के बाद चंडीगढ़ में इसकी कीमत 3092 रुपये हो गई है। इसका सीधा असर शहर के फूड कारोबार पर पड़ा है।
सुबह से ही सेक्टर-17, सेक्टर-9, इंडस्ट्रियल एरिया, मोहाली के फेज-2 और पंचकूला के बाजारों में दुकानदारों ने नए रेट लागू करने शुरू कर दिए। 50 रुपये का हाफ प्लेट कढ़ी-चावल 60 रुपये, 80 रुपये की थाली 100-120 रुपये तक पहुंच गई। चाय 10-15 रुपये से बढ़कर 20 रुपये और पनीर जैसी डिशेज 20-25 रुपये महंगी हो गई हैं।
वहीं, मध्यम से बड़े कारोबारियों का कहना है कि महीने में 20-25 सिलिंडर की खपत पर 25-30 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है जिसे बिना दाम बढ़ाए संभालना संभव नहीं है।
सेक्टर-9 में रेहड़ी लगाने वाले राहुल ने बताया कि महीने में करीब 25 सिलिंडर की खपत होने से उन पर सीधे 30 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ गया है। उनका कहना है कि अगर थाली के दाम बढ़ाते हैं तो ग्राहक कम हो जाते हैं और नहीं बढ़ाते तो घाटा उठाना पड़ता है।
चाय विक्रेता कुलदीप ने कहा कि दूध और चीनी पहले ही महंगे हो चुके थे, अब गैस के दाम बढ़ने से 10 रुपये की चाय को 20 रुपये करना मजबूरी बन गई है। वहीं फास्ट फूड विक्रेता अजय पासवान ने बताया कि दाम बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें खाने की मात्रा भी कम करनी पड़ रही है। शंभू यादव का कहना है कि मौजूदा हालात में कारोबार चलाना चुनौती बन गया है और ग्राहक कम होने से आमदनी भी प्रभावित हो रही है।
Trending Videos
सुबह से ही सेक्टर-17, सेक्टर-9, इंडस्ट्रियल एरिया, मोहाली के फेज-2 और पंचकूला के बाजारों में दुकानदारों ने नए रेट लागू करने शुरू कर दिए। 50 रुपये का हाफ प्लेट कढ़ी-चावल 60 रुपये, 80 रुपये की थाली 100-120 रुपये तक पहुंच गई। चाय 10-15 रुपये से बढ़कर 20 रुपये और पनीर जैसी डिशेज 20-25 रुपये महंगी हो गई हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
वहीं, मध्यम से बड़े कारोबारियों का कहना है कि महीने में 20-25 सिलिंडर की खपत पर 25-30 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है जिसे बिना दाम बढ़ाए संभालना संभव नहीं है।
सेक्टर-9 में रेहड़ी लगाने वाले राहुल ने बताया कि महीने में करीब 25 सिलिंडर की खपत होने से उन पर सीधे 30 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ गया है। उनका कहना है कि अगर थाली के दाम बढ़ाते हैं तो ग्राहक कम हो जाते हैं और नहीं बढ़ाते तो घाटा उठाना पड़ता है।
चाय विक्रेता कुलदीप ने कहा कि दूध और चीनी पहले ही महंगे हो चुके थे, अब गैस के दाम बढ़ने से 10 रुपये की चाय को 20 रुपये करना मजबूरी बन गई है। वहीं फास्ट फूड विक्रेता अजय पासवान ने बताया कि दाम बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें खाने की मात्रा भी कम करनी पड़ रही है। शंभू यादव का कहना है कि मौजूदा हालात में कारोबार चलाना चुनौती बन गया है और ग्राहक कम होने से आमदनी भी प्रभावित हो रही है।
महंगाई के साथ सप्लाई संकट
पंचकूला और मोहाली में स्थिति और गंभीर है, जहां महंगे सिलिंडर के साथ-साथ सप्लाई की समस्या भी सामने आ रही है। दुकानदारों का कहना है कि ऑर्डर देने के बावजूद समय पर सिलिंडर नहीं मिल रहा। कई जगह ब्लैक में सिलिंडर खरीदने की नौबत आ गई है। मोहाली में कुछ ढाबों ने काम का समय घटा दिया है जबकि कुछ दुकानों पर ताले तक लटकते नजर आए। उधर गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि सप्लाई चेन में अस्थायी दिक्कत है और अगले कुछ दिनों में स्थिति सामान्य हो सकती है लेकिन फिलहाल इसका सबसे बड़ा खामियाजा छोटे कारोबारियों को उठाना पड़ रहा है।फूड इंडस्ट्री से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक असर
कॉमर्शियल गैस के दाम बढ़ने का असर सिर्फ रेहड़ी और रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं है। इंडस्ट्रियल एरिया में बेस किचन, स्वीट शॉप्स, कैटरिंग यूनिट्स और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री भी इससे प्रभावित हो रही हैं। चंडीगढ़ में करीब ढाई हजार छोटी इंडस्ट्री हैं जिनकी उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका है।उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि साल की शुरुआत में तय किए गए ऑर्डर के बीच अचानक लागत बढ़ने से मुनाफा कम करना ही एकमात्र विकल्प बचा है। स्टील, ऑटोमोबाइल, प्रोफाइल कटिंग और पेंट इंडस्ट्री में भी लागत बढ़ने का असर आने वाले समय में उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा।
होटेलियर इंडस्ट्री एसोसिएशन का कहना है कि अगर गैस की कीमतों में राहत नहीं मिली या सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं। इसका असर सीधे महंगाई दर और लोगों की जेब पर पड़ेगा।
टिफिन कल्चर लौटेगा
महंगाई का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। मध्यमवर्गीय परिवार अब बाहर खाने से दूरी बनाने लगे हैं। ऑफिस जाने वाले लोग टिफिन लेकर निकलने लगे हैं। छात्रों और कामकाजी लोगों के लिए बाहर खाना अब धीरे-धीरे लग्जरी बनता जा रहा है। वहीं, शहर में घरेलू गैस कनेक्शन की मांग भी बढ़ी है लेकिन एजेंसियों के पास नए कनेक्शन सीमित होने के कारण लोगों को निराश लौटना पड़ रहा है।लोगों के साथ अन्याय
यह सिर्फ महंगाई नहीं, आम लोगों के साथ सीधा अन्याय है। जब कीमतें कम थीं तब एजेंसियों ने भारी मुनाफा कमाया, लेकिन राहत नहीं दी। अब पूरा बोझ जनता पर डालना गलत है, सरकार को हस्तक्षेप कर संतुलन बनाना चाहिए। -पवन कुमार बंसल, पूर्व केंद्रीय मंत्रीचुनाव खत्म होते ही कॉमर्शियल सिलिंडर के दाम बढ़ाना सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है। इससे उद्यमियों, मध्यम वर्ग और गरीबों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। सरकार को तुरंत राहत उपाय लागू कर आम लोगों को महंगाई से बचाना चाहिए। -सतीश कैथ, पूर्व उप महापौर
पूरा बजट हिला
आज अचानक इतने बड़े स्तर पर गैस सिलिंडर के दाम बढ़ने से हमारा पूरा बजट बिगड़ गया है। अगर हम दाम नहीं बढ़ाते तो घाटा होगा और बढ़ाते हैं तो ग्राहक कम हो जाते हैं, ऐसे में कारोबार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। -मोहित कुमार, रेस्टोरेंट संचालकघर का खर्च पहले ही बहुत बढ़ चुका है लेकिन अब बाहर खाना लगभग बंद करना पड़ेगा। जब एक साधारण थाली ही 100 रुपये से ऊपर जाएगी तो आम परिवार के लिए यह रोजमर्रा की चीज नहीं रह जाएगी और टिफिन ही विकल्प बचेगा। - कंचन, कामकाजी महिला
पहले दूध, तेल और राशन महंगा हुआ था, अब गैस ने पूरी तरह से कमर तोड़ दी है। छोटे दुकानदार के लिए रोज का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है, ऐसे में अगर हालात ऐसे ही रहे तो दुकान बंद करनी पड़ सकती है। -कुलदीप, स्ट्रीट वेंडर
हम बढ़ी हुई कीमतों को किसी तरह सहन भी कर लें लेकिन अगर समय पर गैस सिलिंडर ही नहीं मिलेगा तो दुकान चलाना नामुमकिन हो जाएगा। सप्लाई की दिक्कत ने कारोबार को पूरी तरह से अस्थिर कर दिया है। - रमेश कुमार नेगी, ढाबा संचालक
मुनाफा घटेगा
कॉमर्शियल गैस सिलिंडर के दाम बढ़ने से इंडस्ट्री चलाना बेहद कठिन हो जाएगा। सालाना ऑर्डर तय होते हैं, ऐसे में अचानक लागत बढ़ने का बोझ खुद उठाना पड़ेगा, जिससे मुनाफा घटेगा और संचालन मुश्किल होगा। -अवि भसीन, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारतीगैस कीमतों में बढ़ोतरी उद्योग के लिए गंभीर चिंता है। कई सेक्टर पूरी तरह गैस पर निर्भर हैं, खासकर प्रोफाइल कटिंग और स्टील इंडस्ट्री। इससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और इसका असर बाजार कीमतों पर साफ दिखेगा। -अरुण गोयल, महासचिव, चैंबर ऑफ इंडस्ट्री
यह समय होटल और रेस्टोरेंट कारोबार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। लागत बढ़ने के बावजूद ग्राहकों को किफायती भोजन देना मुश्किल होगा। ऐसे हालात में मेन्यू महंगा करना मजबूरी बन जाएगा और कारोबार प्रभावित होगा। -अरविंदर सिंह, अध्यक्ष, चंडीगढ़ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन
कॉमर्शियल गैस के दाम बढ़ने का सीधा असर पूरे उद्योग पर पड़ेगा। प्रोड्यूसर अतिरिक्त लागत खुद नहीं उठाएगा, अंततः उपभोक्ता ही प्रभावित होगा। फूड और अन्य गैस आधारित इंडस्ट्री पर इसका दबाव तेजी से बढ़ेगा। -मनोज नांगिया, महासचिव, ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर फेडरेशन (उत्तर-पश्चिम क्षेत्र)
