{"_id":"69f6699d1d5881425307cbbe","slug":"extortion-in-the-name-of-ayushman-when-the-money-was-returned-to-pgi-the-whole-game-was-exposed-chandigarh-news-c-16-pkl1049-1009909-2026-05-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: आयुष्मान के नाम पर उगाही... पीजीआई में पैसे लौटे तो खुला पूरा खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: आयुष्मान के नाम पर उगाही... पीजीआई में पैसे लौटे तो खुला पूरा खेल
विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज का दावा करने वाली व्यवस्था पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए जब पीजीआई में एक मरीज से इलाज के नाम पर हजारों रुपये वसूलने और बाद में पूरी रकम लौटाने का मामला सामने आया।
हरियाणा के यमुनानगर के रहने वाले कुलदीप कुमार ने अपनी बेटी को 12 अप्रैल को पीजीआई में भर्ती कराया था। आयुष्मान योजना के तहत इलाज होने के बावजूद उन्होंने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों और स्टाफ की ओर से उनसे करीब 44 से 45 हजार रुपये तक वसूले गए। परिजनों के अनुसार, भर्ती के दिन एडवांस ट्रामा सेंटर में 30 हजार रुपये लिए गए जबकि 13 अप्रैल को ऑपरेशन के दौरान 4 हजार रुपये और मांगे गए। इसके बाद ऑपरेशन के बाद भी 10 हजार रुपये की अतिरिक्त मांग की गई।
पीड़ित परिवार का कहना है कि विरोध करने पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और इलाज तक प्रभावित हुआ। आरोप है कि मरीज को बेड से हटाकर स्ट्रेचर पर डाल दिया गया और मिन्नतों के बाद ही इलाज पूरा किया गया। छुट्टी मिलने के बाद भी जब रकम वापस नहीं हुई तो परिजनों ने 13 अप्रैल को पहली शिकायत दर्ज कराई और 25 अप्रैल को दोबारा शिकायत की।
शिकायत के बाद मामला गरमा गया और संबंधित कर्मचारियों ने खुद पहल करते हुए परिजनों को पीजीआई बुलाया। पहले 10 हजार रुपये वापस किए गए थे जबकि शेष 34 हजार रुपये में से 33,500 रुपये 29 अप्रैल को लौटा दिए गए। उल्लेखनीय है कि जब पीड़ित के पास आने के लिए पैसे नहीं थे तो आयुष्मान योजना से जुड़ी एक महिला कर्मचारी ने अपने खाते से 500 रुपये गूगल पे कर मदद भी की।
मामले में एक और अहम पहलू सामने आया कि पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल को भी शुरुआत में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। उनका कहना था कि जिस प्रक्रिया के लिए पैसे लिए गए, वह आयुष्मान योजना के तहत कवर नहीं होती। हालांकि, पूरी रकम लौटाए जाने के बाद स्थिति साफ हो गई कि मरीज से वसूली की गई थी। यह मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को आईना दिखाता है। आयुष्मान जैसी योजनाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर निगरानी की जरूरत है। मरीज का कहना है कि अगर वह आवाज न उठाता तो यह रकम शायद कभी वापस नहीं मिलती।
Trending Videos
हरियाणा के यमुनानगर के रहने वाले कुलदीप कुमार ने अपनी बेटी को 12 अप्रैल को पीजीआई में भर्ती कराया था। आयुष्मान योजना के तहत इलाज होने के बावजूद उन्होंने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों और स्टाफ की ओर से उनसे करीब 44 से 45 हजार रुपये तक वसूले गए। परिजनों के अनुसार, भर्ती के दिन एडवांस ट्रामा सेंटर में 30 हजार रुपये लिए गए जबकि 13 अप्रैल को ऑपरेशन के दौरान 4 हजार रुपये और मांगे गए। इसके बाद ऑपरेशन के बाद भी 10 हजार रुपये की अतिरिक्त मांग की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
पीड़ित परिवार का कहना है कि विरोध करने पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और इलाज तक प्रभावित हुआ। आरोप है कि मरीज को बेड से हटाकर स्ट्रेचर पर डाल दिया गया और मिन्नतों के बाद ही इलाज पूरा किया गया। छुट्टी मिलने के बाद भी जब रकम वापस नहीं हुई तो परिजनों ने 13 अप्रैल को पहली शिकायत दर्ज कराई और 25 अप्रैल को दोबारा शिकायत की।
शिकायत के बाद मामला गरमा गया और संबंधित कर्मचारियों ने खुद पहल करते हुए परिजनों को पीजीआई बुलाया। पहले 10 हजार रुपये वापस किए गए थे जबकि शेष 34 हजार रुपये में से 33,500 रुपये 29 अप्रैल को लौटा दिए गए। उल्लेखनीय है कि जब पीड़ित के पास आने के लिए पैसे नहीं थे तो आयुष्मान योजना से जुड़ी एक महिला कर्मचारी ने अपने खाते से 500 रुपये गूगल पे कर मदद भी की।
मामले में एक और अहम पहलू सामने आया कि पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल को भी शुरुआत में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। उनका कहना था कि जिस प्रक्रिया के लिए पैसे लिए गए, वह आयुष्मान योजना के तहत कवर नहीं होती। हालांकि, पूरी रकम लौटाए जाने के बाद स्थिति साफ हो गई कि मरीज से वसूली की गई थी। यह मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को आईना दिखाता है। आयुष्मान जैसी योजनाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर निगरानी की जरूरत है। मरीज का कहना है कि अगर वह आवाज न उठाता तो यह रकम शायद कभी वापस नहीं मिलती।
