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गैस किल्लत: PGI में मरीजों-तीमारदारों के खाने पर संकट, दो घंटे ठप रही कैंटीन; हाई फ्लेम वाले व्यंजन बंद

अमर उजाला/संवाद, चंडीगढ़/पंचकूला/मोहाली Published by: Nivedita Updated Sat, 14 Mar 2026 09:40 AM IST
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सार

गैस की कमी का असर ढाबों और रेस्टोरेंट्स पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कई जगह लकड़ी और कोयले की भट्ठियों पर खाना बनाया जा रहा है। कई रेस्टोरेंट्स ने मेन्यू छोटा कर दिया है और बैठने की सीटें भी घटा दी हैं ताकि सीमित संसाधनों में काम चल सके।

Gas Shortage Food Crisis for Patients and Caregivers at chandigarh PGI Canteen Operations Halted
पीजीआई के बाहर नंगल से लकड़ियों पर बनाकर लाया गया लंगर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

ट्राइसिटी में एलपीजी गैस की किल्लत अब अस्पतालों तक पहुंच गई है। शहर के सबसे बड़े अस्पताल पीजीआई की ओपीडी कैंटीन में वीरवार को गैस खत्म होने से करीब दो घंटे तक खाना नहीं बन पाया। तेज आंच पर बनने वाले कई व्यंजन बंद करने पड़े जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को खाने के लिए जूझना पड़ा। 

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पीजीआई में शुक्रवार को दो सिलिंडर मिलने के बाद सीमित मेन्यू के साथ काम शुरू किया गया। कैंटीन संचालकों के अनुसार छोले-भटूरे, डोसा और तेज आंच पर बनने वाले कई स्नैक्स फिलहाल बंद कर दिए गए हैं। वहीं जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 की कैंटीनों में गैस की कमी के कारण मेन्यू सीमित करना पड़ा है। 
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शहर में गैस की कमी का असर ढाबों और रेस्टोरेंट्स पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कई जगह लकड़ी और कोयले की भट्ठियों पर खाना बनाया जा रहा है। कई रेस्टोरेंट्स ने मेन्यू छोटा कर दिया है और बैठने की सीटें भी घटा दी हैं ताकि सीमित संसाधनों में काम चल सके। कारोबारियों का कहना है कि गैस संकट के कारण उनका कारोबार करीब 50 प्रतिशत तक प्रभावित हो गया है।

पीजीआई की मुख्य आहार विशेषज्ञ डॉ. नैन्सी साहनी ने कहा कि संस्थान में भर्ती मरीजों के भोजन पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ा है। पीजीआई में रोजाना करीब 2000 मरीजों के लिए भोजन तैयार किया जाता है और दिन में तीन बार मिलाकर लगभग 6000 भोजन बनाए जाते हैं।

पीजीआई के डॉक्टरों की कैंटीन के ठेकेदार जीजी कुमार ने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों से परिसर में एलपीजी का स्टॉक खत्म है। रोजाना करीब 200 लोग कैंटीन में आते हैं, लेकिन गैस न होने के कारण फास्ट फूड जल्दी तैयार करना मुश्किल हो गया है। फिलहाल इंडक्शन चूल्हों के सहारे काम चलाया जा रहा है।

जीएमसीएच-32 की कैंटीन में तंंदूर लगाया

जीएमसीएच-32 की कैंटीन में रोजाना करीब पांच सिलिंडर की जरूरत होती है, लेकिन वीरवार को चार सिलिंडर ही मिले और शुक्रवार को एक भी नहीं पहुंचा। ऐसे में तंदूर, लकड़ी और इंडक्शन के सहारे सीमित भोजन तैयार किया जा रहा है। हालांकि अस्पताल के मेस में भर्ती करीब 800 मरीजों के भोजन पर अभी असर नहीं पड़ा है।

जीएमएसएच-16 में भी लगभग यही स्थिति है। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन ने बताया कि स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है ताकि मरीजों के भोजन की आपूर्ति प्रभावित न हो। गैस संकट का असर अस्पतालों के बाहर लगने वाले लंगरों पर भी पड़ा है। जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 के बाहर शुक्रवार को कोई लंगर नहीं लगा, जबकि पीजीआई में केवल लकड़ी पर बनने वाला एक लंगर ही लगाया गया। इस बीच रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने एलपीजी एजेंसी को पत्र लिखकर अस्पताल की कैंटीनों को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराने की मांग की है।

कॉमर्शियल सिलिंडर की सप्लाई लगभग ठप

डीसी कार्यालय और गैस एजेंसियों के अनुसार शहर में प्रतिदिन करीब 12,800 घरेलू सिलिंडर की खपत होती है लेकिन फिलहाल केवल 30 से 40 प्रतिशत ही सप्लाई मिल पा रही है। वहीं कॉमर्शियल सिलिंडर की सप्लाई लगभग ठप हो गई है।

मोहाली में ब्लैक में बिक रहा सिलिंडर

मोहाली में गैस किल्लत के कारण कालाबाजारी बढ़ गई है। रेस्टोरेंट संचालकों के अनुसार जो सिलिंडर पहले करीब 1100 रुपये में मिलता था, वह अब 2500 रुपये तक में खरीदना पड़ रहा है। कई दुकानों ने इंडक्शन चूल्हों का सहारा लिया है। कारोबारियों का कहना है कि गैस संकट जारी रहा तो खाने-पीने की चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं।

पंचकूला में कॉमर्शियल सिलिंडर की सप्लाई ठप

पंचकूला में कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की सप्लाई लगभग बंद हो गई है। कई रेस्टोरेंट और कैटरिंग संचालकों ने नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है। बाजार में सिलिंडर 3000 से 4000 रुपये तक ब्लैक में बिकने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कारोबारियों का कहना है कि अगर जल्द सप्लाई बहाल नहीं हुई तो कई आउटलेट बंद करने की नौबत आ सकती है।

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