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Chandigarh News: इल्हाम ने आत्ममंथन और पहचान की तलाश की कहानी से दर्शकों को किया प्रभावित
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चंडीगढ़। सेक्टर-16 स्थित पंजाब कला भवन में आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव शगूफे-2026 के सातवें दिन शुक्रवार को नाटक ‘इल्हाम’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। मानव कौल द्वारा लिखित और सार्थक सिंह के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक का मंचन शून्य थिएटर ग्रुप, चंडीगढ़ के कलाकारों ने किया।
नाटक एक ऐसे आम व्यक्ति की कहानी है, जो समाज की अपेक्षाओं और अपनी अंतरात्मा की आवाज के बीच संघर्ष करता है। यादों, रिश्तों, डर और अनसुलझे सवालों के बीच उसकी सोच बदलती है और वह स्वयं की पहचान की तलाश में एक आंतरिक यात्रा पर निकल पड़ता है। मंचन के माध्यम से महत्वाकांक्षा, प्रेम, पश्चाताप, आशा और अस्तित्व जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक ने आसान उत्तर देने के बजाय दर्शकों को जीवन और आत्मबोध से जुड़े प्रश्नों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान इम्पैक्ट आर्ट्स की ओर से हरमनपाल सिंह और सर्वेश शर्मा को रंगमंच के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय और निर्देशन की सराहना की।
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बॉक्स : निर्देशक सार्थक सिंह की खास उपलब्धियां
रंगमंच के क्षेत्र में करीब 10 वर्ष का अनुभव।
25 से अधिक थिएटर प्रस्तुतियों का निर्देशन।
100 से ज्यादा कलाकारों को अभिनय का प्रशिक्षण और मार्गदर्शन।
उभरते कलाकारों के साथ प्रक्रिया-आधारित रंगमंच को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका।
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नाटक एक ऐसे आम व्यक्ति की कहानी है, जो समाज की अपेक्षाओं और अपनी अंतरात्मा की आवाज के बीच संघर्ष करता है। यादों, रिश्तों, डर और अनसुलझे सवालों के बीच उसकी सोच बदलती है और वह स्वयं की पहचान की तलाश में एक आंतरिक यात्रा पर निकल पड़ता है। मंचन के माध्यम से महत्वाकांक्षा, प्रेम, पश्चाताप, आशा और अस्तित्व जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक ने आसान उत्तर देने के बजाय दर्शकों को जीवन और आत्मबोध से जुड़े प्रश्नों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।
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कार्यक्रम के दौरान इम्पैक्ट आर्ट्स की ओर से हरमनपाल सिंह और सर्वेश शर्मा को रंगमंच के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय और निर्देशन की सराहना की।
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रंगमंच के क्षेत्र में करीब 10 वर्ष का अनुभव।
25 से अधिक थिएटर प्रस्तुतियों का निर्देशन।
100 से ज्यादा कलाकारों को अभिनय का प्रशिक्षण और मार्गदर्शन।
उभरते कलाकारों के साथ प्रक्रिया-आधारित रंगमंच को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका।