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Chandigarh News: 1150 विद्यार्थियों पर जोखिम, जर्जर भवन में चल रही दो शिफ्टों की पढ़ाई

Sat, 11 Jul 2026 02:25 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jul 2026 02:25 AM IST
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Risk to 1,150 students: Classes held in two shifts in a dilapidated building.
चंडीगढ़। शिक्षा मंत्रालय की हाल ही में जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) 2.0 रिपोर्ट में चंडीगढ़ को स्कूलों की सुविधाओं और प्रशासन के मामले में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल किया गया है। वहीं, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, खुड्डा अलीशेर की स्थिति इस दावे पर सवाल खड़े करती है। करीब 1150 विद्यार्थी ऐसे भवन में पढ़ाई कर रहे हैं, जिसे लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं लगातार सामने आती रही हैं।
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स्कूल दो शिफ्टों में संचालित होता है। भवन पुराना होने के कारण कई दीवारों में दरारें हैं, जिन्हें लोहे की प्लेटों से ढका गया है। हालांकि इंजीनियरिंग विभाग ने भवन को फिट होने का प्रमाणपत्र दिया है। स्कूल में केवल 32 कमरे हैं और अधिकांश कक्षाएं इतनी छोटी हैं कि उनमें 16 बेंच ही लग पाती हैं। जगह कम होने से शिक्षक सभी विद्यार्थियों तक आसानी से नहीं पहुंच पाते। प्रयोगशालाएं भी सीमित स्थान में संचालित हो रही हैं।
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कई कमरों में वेंटिलेशन की कमी है। बिजली जाने पर अंधेरा छा जाता है और गर्मियों में उमस के कारण पढ़ाई प्रभावित होती है। सीढ़ियां संकरी होने से भूकंप या अन्य आपदा की स्थिति में एक साथ विद्यार्थियों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए रैंप भी उपलब्ध नहीं है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने और परिसर में जलभराव की समस्या भी बनी रहती है। केवल 1.23 एकड़ परिसर होने से खेल गतिविधियों के लिए पर्याप्त जगह नहीं है।
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स्कूल में अतिरिक्त चौकीदार और सफाई कर्मचारी की मांग भी लंबे समय से लंबित है। वर्ष 1964 में प्राथमिक विद्यालय के रूप में शुरू हुए इस स्कूल को 2011 में सीनियर सेकेंडरी बनाया गया, लेकिन भवन का विस्तार नहीं हुआ। विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के बावजूद सुविधाएं लगभग पहले जैसी ही हैं। सीबीएसई मानकों के अनुसार सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 400 मीटर रनिंग ट्रैक होना चाहिए, लेकिन यहां यह सुविधा नहीं है, जिससे फिजिकल एजुकेशन के विद्यार्थियों का प्रैक्टिकल प्रभावित होता है।

इसको लेकर जांच की जाएगी। बच्चों की सुरक्षा विभाग की प्राथमिकता है।-नितिश सिंगला, डीएसई
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