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Chandigarh News: कनाडा में भारतीय छात्रों का वीजा संकट
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-अंतरराष्ट्रीय छात्र आगमन रिकॉर्ड निचले स्तर पर, अप्रूवल रेट में लगातार गिरावट
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सुरिंदर पाल
जालंधर। कनाडा में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नए आगमन की संख्या अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 में केवल 2,485 नए अंतरराष्ट्रीय छात्र कनाडा पहुंचे जबकि दिसंबर 2023 में यह संख्या 95,320 थी।
यह करीब 97 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट को दर्शाता है और कनाडा की शिक्षा व इमिग्रेशन नीति में बड़े बदलाव का संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट का मुख्य कारण भारतीय छात्रों का वीजा अप्रूवल रेट घटता जाना है। हर साल भारतीय छात्रों के लिए कनाडा में स्टडी वीज़ा हासिल करना पहले से अधिक कठिन होता जा रहा है।
न्यू इमेज की पूजा सिंह का कहना है कि यह गिरावट कनाडा सरकार की सख्त स्टडी परमिट नीति का परिणाम है। इसमें स्टडी परमिट पर वार्षिक कैप, एडमिशन लेटर की कड़ी वेरिफिकेशन, फाइनेंशियल प्रूफ की सख्त शर्तें, पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट और स्पाउस वीज़ा नियमों में बदलाव शामिल हैं। साथ ही, फर्जी कॉलेजों और एजेंट्स पर सख्त कार्रवाई के कारण बड़ी संख्या में वीज़ा आवेदन खारिज किए जा रहे हैं।
छात्र संख्या में भारी कमी
जनवरी से नवंबर 2025 के बीच पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत कम नए छात्र कनाडा पहुंचे। उदाहरण के लिए, अगस्त 2024 में 79,745 छात्र आए थे, वहीं अगस्त 2025 में यह संख्या घटकर 45,065 रह गई। इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर भारतीय छात्रों, विशेषकर पंजाब के युवाओं, पर पड़ा है। पंजाब लंबे समय से कनाडा का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय छात्र स्रोत रहा है।
कनाडा की नई नीति और भविष्य की चुनौती
कनाडा स्टडी वीज़ा एक्सपर्ट सुकांत के अनुसार, इस गिरावट का असर कनाडा के कॉलेजों, यूनिवर्सिटीज़ और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कई शिक्षण संस्थानों को फंडिंग संकट का सामना करना पड़ रहा है जबकि हाउसिंग, पार्ट-टाइम जॉब्स और छात्र-आधारित व्यवसाय भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रे मैटर इमिग्रेशन की सोनिया सिंह का कहना है कि कनाडा अब अधिक संख्या की बजाय उच्च गुणवत्ता और आर्थिक रूप से मजबूत छात्रों को प्राथमिकता दे रहा है। इसका अर्थ है कि आने वाले समय में भारतीय विद्यार्थियों के लिए कनाडा में पढ़ाई का सपना और अधिक चुनौतीपूर्ण और प्रतिस्पर्धी हो सकता है।
वीजा अप्रूवल रेट की स्थिति
2021: 80–85 प्रतिशत
2022: 75 प्रतिशत
2023: 65 प्रतिशत
2024–25: 50–55 प्रतिशत
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सुरिंदर पाल
जालंधर। कनाडा में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नए आगमन की संख्या अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 में केवल 2,485 नए अंतरराष्ट्रीय छात्र कनाडा पहुंचे जबकि दिसंबर 2023 में यह संख्या 95,320 थी।
यह करीब 97 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट को दर्शाता है और कनाडा की शिक्षा व इमिग्रेशन नीति में बड़े बदलाव का संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट का मुख्य कारण भारतीय छात्रों का वीजा अप्रूवल रेट घटता जाना है। हर साल भारतीय छात्रों के लिए कनाडा में स्टडी वीज़ा हासिल करना पहले से अधिक कठिन होता जा रहा है।
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न्यू इमेज की पूजा सिंह का कहना है कि यह गिरावट कनाडा सरकार की सख्त स्टडी परमिट नीति का परिणाम है। इसमें स्टडी परमिट पर वार्षिक कैप, एडमिशन लेटर की कड़ी वेरिफिकेशन, फाइनेंशियल प्रूफ की सख्त शर्तें, पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट और स्पाउस वीज़ा नियमों में बदलाव शामिल हैं। साथ ही, फर्जी कॉलेजों और एजेंट्स पर सख्त कार्रवाई के कारण बड़ी संख्या में वीज़ा आवेदन खारिज किए जा रहे हैं।
छात्र संख्या में भारी कमी
जनवरी से नवंबर 2025 के बीच पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत कम नए छात्र कनाडा पहुंचे। उदाहरण के लिए, अगस्त 2024 में 79,745 छात्र आए थे, वहीं अगस्त 2025 में यह संख्या घटकर 45,065 रह गई। इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर भारतीय छात्रों, विशेषकर पंजाब के युवाओं, पर पड़ा है। पंजाब लंबे समय से कनाडा का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय छात्र स्रोत रहा है।
कनाडा की नई नीति और भविष्य की चुनौती
कनाडा स्टडी वीज़ा एक्सपर्ट सुकांत के अनुसार, इस गिरावट का असर कनाडा के कॉलेजों, यूनिवर्सिटीज़ और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कई शिक्षण संस्थानों को फंडिंग संकट का सामना करना पड़ रहा है जबकि हाउसिंग, पार्ट-टाइम जॉब्स और छात्र-आधारित व्यवसाय भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रे मैटर इमिग्रेशन की सोनिया सिंह का कहना है कि कनाडा अब अधिक संख्या की बजाय उच्च गुणवत्ता और आर्थिक रूप से मजबूत छात्रों को प्राथमिकता दे रहा है। इसका अर्थ है कि आने वाले समय में भारतीय विद्यार्थियों के लिए कनाडा में पढ़ाई का सपना और अधिक चुनौतीपूर्ण और प्रतिस्पर्धी हो सकता है।
वीजा अप्रूवल रेट की स्थिति
2021: 80–85 प्रतिशत
2022: 75 प्रतिशत
2023: 65 प्रतिशत
2024–25: 50–55 प्रतिशत