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सिंचाई घोटाला: HC ने पंजाब सरकार को लगाई फटकार, कहा-चीफ सेक्रेटरी हलफनामा दाखिल करें, वरना होगी कार्रवाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 09 Jan 2026 08:14 PM IST
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सार
याचिकाकर्ता हरमीत सिंह ने अदालत में दलील दी कि उच्च अधिकारियों और पूर्व मंत्रियों के खिलाफ जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हो रही है। 17 अगस्त 2017 को दर्ज एफआईआर में दो पूर्व मंत्रियों, तीन आईएएस अधिकारियों और उनके निजी सहायकों के खिलाफ मामले की जांच शुरू की गई थी लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सिंचाई घोटाले से संबंधित अभियोजन स्वीकृति पर फैसला लेने में हो रही देरी को लेकर कड़ी फटकार लगाई है।
अदालत ने पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि वह अगले सप्ताह तक मुख्य सचिव के माध्यम से हलफनामा दाखिल करे जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि अभियोजन स्वीकृति पर अब तक क्यों कोई निर्णय नहीं लिया गया। कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल नहीं किया जाता है तो दमनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला सिंचाई घोटाले से जुड़ी जनहित याचिका से संबंधित है, जिसमें पंजाब सरकार पर आरोप था कि वह जानबूझकर मामले की जांच को धीमा कर रही है। याचिकाकर्ता हरमीत सिंह ने अदालत में दलील दी कि उच्च अधिकारियों और पूर्व मंत्रियों के खिलाफ जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हो रही है। 17 अगस्त 2017 को दर्ज एफआईआर में दो पूर्व मंत्रियों, तीन आईएएस अधिकारियों और उनके निजी सहायकों के खिलाफ मामले की जांच शुरू की गई थी लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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अदालत ने पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि वह अगले सप्ताह तक मुख्य सचिव के माध्यम से हलफनामा दाखिल करे जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि अभियोजन स्वीकृति पर अब तक क्यों कोई निर्णय नहीं लिया गया। कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल नहीं किया जाता है तो दमनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला सिंचाई घोटाले से जुड़ी जनहित याचिका से संबंधित है, जिसमें पंजाब सरकार पर आरोप था कि वह जानबूझकर मामले की जांच को धीमा कर रही है। याचिकाकर्ता हरमीत सिंह ने अदालत में दलील दी कि उच्च अधिकारियों और पूर्व मंत्रियों के खिलाफ जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हो रही है। 17 अगस्त 2017 को दर्ज एफआईआर में दो पूर्व मंत्रियों, तीन आईएएस अधिकारियों और उनके निजी सहायकों के खिलाफ मामले की जांच शुरू की गई थी लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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