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Chandigarh News: पीयू में मेंटर-मेंटी कार्यक्रम लागू हर विद्यार्थी को मिलेगा मार्गदर्शन
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी और इससे संबंधित कॉलेजों में पढ़ रहे हर विद्यार्थी को शिक्षक का मार्गदर्शन मिलेगा। पीयू ने फैसला लिया है कि इसके लिए यूनिवर्सिटी के सभी विभागों और कॉलेजों में मेंटर-मेंटी कार्यक्रम लागू किया जाएगा। यह जानकारी यूनिवर्सिटी डीन इंस्ट्रक्शन की ओर से दी गई।
नए नियम के तहत हर शिक्षक के साथ 15 से 20 छात्रों को जोड़ा जाएगा। शिक्षक इन छात्रों से हर हफ्ते तय समय पर मुलाकात करेंगे और उनकी पढ़ाई, करियर, मानसिक तनाव और निजी समस्याओं पर बात करेंगे। हर विभाग को हफ्ते में एक समय तय करना होगा।
यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा है कि छात्रों के अच्छे विकास के लिए सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम भी कराए जाएंगे। इनमें खेल प्रतियोगिताएं, मानसिक स्वास्थ्य और नशा मुक्ति पर बातचीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कौशल सिखाने वाले सत्र और विभागों के बीच गतिविधियां शामिल होंगी।
हर महीने यूनिवर्सिटी को जाएगी रिपोर्ट : हर विभाग को इन सभी गतिविधियों की महीने की रिपोर्ट बनाकर यूनिवर्सिटी को देनी होगी। इसमें यह बताया जाएगा कि शिक्षकों और छात्रों के बीच कितनी बैठकें हुईं, कौन-कौन सी गतिविधियां कराई गईं और छात्रों को इससे क्या फायदा हुआ। यह रिपोर्ट सरकार के एक पोर्टल पर भी डाली जाएगी।
डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शन प्रो. योजना रावत की ओर से दी गई सूचना के मुताबिक यह फैसला सुप्रीम कोर्ट और शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार लिया गया है। इसका मकसद यह है कि छात्रों को समय पर सही सलाह मिले और उनकी पढ़ाई व जीवन से जुड़ी समस्याओं का समाधान हो सके।
इससे विद्यार्थी नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहेंगे, करियर की सही दिशा मिलेगी, आत्मविश्वास बढ़ेगा, कमजोर विद्यार्थियों पर खास ध्यान दिया जाएगा। इससे विद्यार्थी और शिक्षकों के बीच अच्छा रिश्ता भी बनेगा।
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नए नियम के तहत हर शिक्षक के साथ 15 से 20 छात्रों को जोड़ा जाएगा। शिक्षक इन छात्रों से हर हफ्ते तय समय पर मुलाकात करेंगे और उनकी पढ़ाई, करियर, मानसिक तनाव और निजी समस्याओं पर बात करेंगे। हर विभाग को हफ्ते में एक समय तय करना होगा।
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यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा है कि छात्रों के अच्छे विकास के लिए सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम भी कराए जाएंगे। इनमें खेल प्रतियोगिताएं, मानसिक स्वास्थ्य और नशा मुक्ति पर बातचीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कौशल सिखाने वाले सत्र और विभागों के बीच गतिविधियां शामिल होंगी।
हर महीने यूनिवर्सिटी को जाएगी रिपोर्ट : हर विभाग को इन सभी गतिविधियों की महीने की रिपोर्ट बनाकर यूनिवर्सिटी को देनी होगी। इसमें यह बताया जाएगा कि शिक्षकों और छात्रों के बीच कितनी बैठकें हुईं, कौन-कौन सी गतिविधियां कराई गईं और छात्रों को इससे क्या फायदा हुआ। यह रिपोर्ट सरकार के एक पोर्टल पर भी डाली जाएगी।
डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शन प्रो. योजना रावत की ओर से दी गई सूचना के मुताबिक यह फैसला सुप्रीम कोर्ट और शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार लिया गया है। इसका मकसद यह है कि छात्रों को समय पर सही सलाह मिले और उनकी पढ़ाई व जीवन से जुड़ी समस्याओं का समाधान हो सके।
इससे विद्यार्थी नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहेंगे, करियर की सही दिशा मिलेगी, आत्मविश्वास बढ़ेगा, कमजोर विद्यार्थियों पर खास ध्यान दिया जाएगा। इससे विद्यार्थी और शिक्षकों के बीच अच्छा रिश्ता भी बनेगा।