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Indian Army: रक्षा उत्पादन सेक्टरों को जल्द मिलेगी अग्निवीरों की कुशल फौज, इस साल सेवानिवृत्त होगा पहला बैच

मोहित धुपड़, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Sun, 11 Jan 2026 12:47 PM IST
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सार

अग्निवीर रक्षा क्षेत्र से ही जुड़े हैं लिहाजा देश की डिफेंस, एयरोस्पेस व रणनीतिक सेक्टर की मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां भी चाहती हैं कि इनकी कुशलता व क्षमताओं का इस्तेमाल किया जाए। यही सोच अग्निवीरों के लिए इस सेक्टर में रोजगार के बड़े अवसर सृजित करेगी।

Defense production sectors will soon receive skilled workforce of Agniveers
अग्निवीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रक्षा उत्पादन सेक्टरों को जल्द ही अग्निवीरों के रूप में एक प्रशिक्षित, अनुशासित और कुशल फौज मिलने वाली है। साल 2026-27 के मध्य में अग्निवीरों का पहला बैच सेवानिवृत्त हो जाएगा। इनकी संख्या करीब एक लाख है। इनमें से कुछ तो सेना में नियमित हो जाएंगे जबकि अन्य अग्निवीरों के लिए सैन्य बलों समेत विभिन्न विभागों व इकाइयों में रोजगार के अवसर खुले रहेंगे।

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चूंकि यह अग्निवीर रक्षा क्षेत्र से ही जुड़े हैं लिहाजा देश की डिफेंस, एयरोस्पेस व रणनीतिक सेक्टर की मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां भी चाहती हैं कि इनकी कुशलता व क्षमताओं का इस्तेमाल किया जाए। यही सोच अग्निवीरों के लिए इस सेक्टर में रोजगार के बड़े अवसर सृजित करेगी। इस दौरान रोजगार मिलने में आसानी हो, इसके लिए सरकार राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा (एनएसक्यूएफ) के तहत अग्निवीरों के प्रशिक्षण को मान्यता दिलवाएगी।
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भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि रक्षा कौशल इको सिस्टम में अग्निवीरों की बड़ी भूमिका रहने वाली है। अग्निवीर योजना ने युवा ऊर्जा, अनुशासन और तकनीकी दक्षता का एक विशाल भंडार खोल दिया है। हर साल हजारों अग्निवीर लॉजिस्टिक्स, आईटी सिस्टम, वाहन रखरखाव, हथियार संचालन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में गहन प्रशिक्षण पूरा करेंगे। ऐसे अग्निवीर रक्षा उत्पादन, सुरक्षा प्रौद्योगिकी, साइबर रक्षा और इससे संबंधित उद्योगों के लिए तैयार कुशल मानव शक्ति के रूप में काम कर सकते हैं।

रक्षा सचिव का मानना है कि पंजाब अपनी मजबूत मिलिट्री परंपरा के साथ इन अग्निवीरों का अच्छा उपयोग कर सकता है। इन्हें डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इको सिस्टम में जाने के लिए संस्थागत रास्ते दे सकता है, चाहे वे सुपरवाइजर, इक्विपमेंट मेंटेनर या एंटरप्रेन्योर के रूप क्यों न हों।

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भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह - फोटो : अमर उजाला

रक्षा विनिर्माण में नहीं उभरा पंजाब
रक्षा सचिव के अनुसार पंजाब सशस्त्र बलों के बुनियादी ढांचे और वेटरन दिग्गजों का बड़ा केंद्र है मगर अभी तक एक प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में नहीं उभर पाया है। दक्षिणी राज्यों में हैदराबाद, बंगलूरू व कोयंबटूर एक मजबूत रक्षा क्लस्टर के रूप में स्थापित हुए हैं जबकि उत्तरी भारत का औद्योगिक आधार इस क्षेत्र में थोड़ा पीछे है। अब पंजाब इस रक्षा घटक विनिर्माण के लिए लक्षित प्रशिक्षण क्लस्टर स्थापित करने की ओर बढ़ रहा है और यह एक सराहनीय पहल है।

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भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह - फोटो : अमर उजाला

आरएंडडी संस्थानों से जुड़ने की सलाह
रक्षा सचिव ने पंजाब को डिफेंस इको सिस्टम नेटवर्क बनाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि लुधियाना, जालंधर और अमृतसर ऐसे क्षेत्र हैं जहां एमएसएमई, डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग और निजी फर्मा का एक विकसित नेटवर्क बनाया जा सकता है, जिसे चंडीगढ़ में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) संस्थानों से जोड़ा जाना चाहिए। पंजाब के ऑटो कंपोनेंट और मशीन टूल क्षेत्र आसानी से सटीक रक्षा घटक विनिर्माण की ओर रुख कर सकते हैं।

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