अपनों को दिया धोखा तो ईश्वर भी नहीं देगा मौका, खुद ही समझें
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पंजाब कला भवन में शनिवार को परिंदा नाटक का मंचन हुआ। पूजा मलिक के लिखे नाटक में व्यथ थिएटर ग्रुप, अंबाला के कलाकारों ने मंचित किया। नाटक का निर्देशन अतुल वशिष्ट ने किया। प्रोजेक्ट निर्देशन भारत सोपोरी ने किया।
नाटक में दिखाया कि रिश्ता सबसे ऊपर है, फिर चाहे हम जिदंगी में सब कुछ ही क्यों न हार जाएं। परिंदा एक ऐसे इंसान की कहानी है जो तिनका तिनका इकट्ठा कर परिवार के लिए जोड़कर रिश्तों को आगे बढ़ाने में लगा रहा, लेकिन अंत में उसे कुछ हासिल नहीं हुआ।
नाटक में यह सीख दी गई है कि रिश्तों में सभी को साथ लेकर चलोगे तभी एक अच्छा और बेहतर समाज बनाया जा सकता है। कहानी एक पंडित परिवार की है जिसके तीन पुत्र कृष्ण, विजय, मदन होते हैं।
बड़ा बेटा विजय अपनी पत्नी के साथ शहर नौकरी करने चला जाता है। कुछ दिन बाद उसकी नौकरी चली जाती है। वह वापस गांव लौट आता है। यहां भी उसका मन नहीं लगता और वह अपनी पत्नी के साथ विदेश चला जाता है।
वह बाद में अपने भाई मदन को भी ले जाता है। गांव में अकेला छोटा भाई कृष्ण रह जाता है जो रिश्तों की डोर बचाने में लगा रहता और मेहनत करता रहता है। कुछ दिन बाद वह मकान बना लेता और जमीन भी ले लेता है।
जब यह बात विदेश में बैठे बड़े भाई विजय को पता चलती है तो वह वापस आकर चाल चलता है और हेराफेरी से कागज बनाकर कृष्ण की सारी जमीन और घर बेच देता है। इसके बाद उसे बिना कुछ बताए कुछ दिनों के लिए उसे अपने साथ ले जाता है। कुछ समय बाद कृष्ण जब अपने देश और गांव आता तो उसे असलियत का पता चलता है।
उसे बहुत दुख होता है कि उसने एक परिंदे की तरह तिनका तिनका इकट्ठा कर परिवार को बचाना चाहा, लेकिन आज वह सब कुछ हार गया। नाटक में बताया गया है कि सभी को मिलकर रहना चाहिए। अपनों को धोखा दें तो उन्हें ईश्वर भी माफ नहीं करता।