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विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा बरी: 13 साल पुराने मामले में दोषसिद्धि और सजा रद्द, हाईकोर्ट से मिली राहत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Tue, 31 Mar 2026 10:24 AM IST
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सार
मामला 2013 में तरनतारन के सिटी थाना में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है जिसमें मारपीट, महिला की मर्यादा भंग, धमकी, दंगा और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं लगाई गई थीं।
court room
- फोटो : ANI
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खडूर साहिब के विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा को बड़ी राहत देते हुए 13 साल पुराने आपराधिक मामले में उनकी दोषसिद्धि और चार साल की सजा को रद्द कर दिया है। अदालत ने यह फैसला दोनों पक्षों के बीच हुए आपसी समझौते के आधार पर सुनाया।
यह मामला 2013 में तरनतारन के सिटी थाना में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है जिसमें मारपीट, महिला की मर्यादा भंग, धमकी, दंगा और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं लगाई गई थीं। ट्रायल कोर्ट ने 10 सितंबर 2025 को आरोपियों को दोषी ठहराते हुए चार साल की सजा सुनाई थी जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील लंबित थी।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि 4 फरवरी 2026 को दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर ट्रायल कोर्ट ने इसकी जांच की। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, तरनतारन की रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि समझौता बिना किसी दबाव या प्रलोभन के हुआ है और आरोपियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
अदालत में पंजाब सरकार और शिकायतकर्ता के वकीलों ने भी दोषसिद्धि रद्द करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। कोर्ट ने कहा कि निजी प्रकृति के मामलों में समझौते के आधार पर आपराधिक कार्यवाही समाप्त की जा सकती है।
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यह मामला 2013 में तरनतारन के सिटी थाना में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है जिसमें मारपीट, महिला की मर्यादा भंग, धमकी, दंगा और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं लगाई गई थीं। ट्रायल कोर्ट ने 10 सितंबर 2025 को आरोपियों को दोषी ठहराते हुए चार साल की सजा सुनाई थी जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील लंबित थी।
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सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि 4 फरवरी 2026 को दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर ट्रायल कोर्ट ने इसकी जांच की। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, तरनतारन की रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि समझौता बिना किसी दबाव या प्रलोभन के हुआ है और आरोपियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
अदालत में पंजाब सरकार और शिकायतकर्ता के वकीलों ने भी दोषसिद्धि रद्द करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। कोर्ट ने कहा कि निजी प्रकृति के मामलों में समझौते के आधार पर आपराधिक कार्यवाही समाप्त की जा सकती है।