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कुदरत का ब्लैकआउट: सुबह अंधेरा, आंधी-बारिश से शहर ठप, 50 पेड़ गिरे, बिजली-पानी का संकट

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 04 May 2026 02:32 AM IST
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Nature's blackout: Morning darkness, storm and rain bring city to a standstill, 50 trees fell, power and water crisis
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चंडीगढ़। रविवार सुबह शहर ने कुदरत का ऐसा रूप देखा जिसने कुछ ही मिनटों में सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। सुबह करीब साढ़े सात बजे अचानक आसमान पर काले बादल छा गए और दिन में ही अंधेरा पसर गया। इसके बाद तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर को झकझोर दिया। कई सेक्टरों और आसपास के गांवों में पेड़ उखड़कर सड़कों और बिजली लाइनों पर गिर गए जिससे बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति ठप हो गई और जलापूर्ति भी प्रभावित हो गई।
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आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि सेक्टर-7, 15, 16, 18, 19, 25, 37, 40, 41, 43 और मलोया समेत कई इलाकों में 50 से अधिक पेड़ गिर पड़े। कई जगह पेड़ कारों पर गिरने से वाहन क्षतिग्रस्त हो गए जबकि सड़कों पर पेड़ों की शाखाएं और टहनियां गिरने से यातायात बाधित रहा। 300 से ज्यादा बिजली के तारों पर पेड़ की टहनियां गिरने से शहर के बड़े हिस्से में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई। वहीं 14 जगहों पर बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हो गए।
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रायपुर कलां, दड़वा, बहलाना और रायपुर खुर्द समेत कई गांवों में बिजली गुल होने के साथ ही जलापूर्ति भी ठप हो गई। बिजली से संचालित ट्यूबवेल और पंपिंग सिस्टम बंद पड़ने के कारण लोगों को पानी के लिए जूझना पड़ा। कई इलाकों में लोगों को टैंकर मंगवाने पड़े। घरों में टंकियों में भरा पानी भी लिफ्ट न हो पाने से परेशानी और बढ़ गई।
नगर निगम के हार्टिकल्चर विंग की टीमें आंधी थमते ही मैदान में उतर गईं। एसई केपी सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही टीमें मौके पर पहुंचीं और गिरे पेड़ों व शाखाओं को हटाने का काम शुरू किया गया। भारी संख्या में टहनियां टूटने से यातायात बाधित हुआ, जिसे प्राथमिकता पर बहाल किया गया।
बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए सीपीडीएल की टीमें भी तुरंत सक्रिय हुईं। सीपीडीएल के अधिकारियों के अनुसार 220 केवी मोहाली और 66 केवी बीबीएमबी सब-स्टेशन प्रभावित होने से सप्लाई ठप हो गई थी। बाद में प्रभावित क्षेत्रों को 220 केवी हल्लोमाजरा और किशनगढ़ सब-स्टेशनों से जोड़ा गया जिससे एक से दो घंटे में कुछ इलाकों में बिजली बहाल हो सकी। हालांकि कई सेक्टरों में बिजली दोपहर बाद ढाई से साढ़े तीन बजे के बीच ही सामान्य हो पाई। बिजली की सबसे ज्यादा समस्या दक्षिणी सेक्टरों में रही। सुबह साढ़े सात बजे गई बिजली दोपहर करीब ढाई से साढ़े तीन बजे के बीच बहाल हो सकी, जबकि जलापूर्ति शाम तक ही सामान्य हो पाई। सीपीडीएल ने हेल्पलाइन और व्हाट्सएप के माध्यम से उपभोक्ताओं को लगातार अपडेट दिया। अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश क्षेत्रों में सप्लाई बहाल कर दी गई है, जबकि जिन इलाकों में बुनियादी ढांचे को ज्यादा नुकसान हुआ है, वहां मरम्मत कार्य जारी है।
लोग बोले-पानी का संकट सबसे बड़ा
स्थानीय निवासियों ने बताया कि बिजली कटने से सबसे ज्यादा परेशानी पानी को लेकर हुई। दड़वा निवासी अजय कुमार और बहलाना के जीत सिंह ने कहा कि सुबह से शाम तक पानी के लिए जूझना पड़ा। वहीं सेक्टर-40 के वीएन शर्मा के अनुसार बिजली दोपहर बाद आई जबकि पानी की सप्लाई भी काफी देर से बहाल हुई।
पार्षद बोले...व्यवस्था सुधारे निगम
दड़वा के पूर्व सरपंच गुरप्रीत सिंह हैप्पी ने कहा कि बिजली कटते ही पानी सप्लाई ठप हो जाती है, इसे रोकने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी है। मनोनीत पार्षद सतिंदरपाल सिंह सिद्धू ने भी गांवों में जलापूर्ति बाधित होने पर चिंता जताई। पार्षद कुलजीत सिंह संधू ने बताया कि कई इलाकों में बिजली दोपहर बाद ही बहाल हो सकी जिससे लोगों को भारी परेशानी हुई। क्राफ्ड के चेयरमैन हितेश पुरी ने पेड़ों की नियमित छंटाई और हर ट्यूबवेल पर जनरेटर लगाने की मांग की।

आंधी-तूफान का असर (आंकड़ों में)
कुल व्यवधान की घटनाएं: 135 (11 केवी ब्रेकडाउन और ट्रिपिंग)
उखड़े/लाइन पर गिरे पेड़: 50
बिजली लाइनों पर गिरी टहनियां: 300
क्षतिग्रस्त बिजली खंभे: 14
हवा की रफ्तार: 60 किमी प्रति घंटा तक
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