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पहलगाम आतंकी हमला: भारत ने आतंक पर की करारी चोट, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से बता दिया-अब सहन नहीं करेंगे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Tue, 28 Apr 2026 11:35 AM IST
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सार
पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को आतंकियों ने 26 पर्यटकों को गोली से उड़ा दिया था। इस घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर दुश्मन को करारा जवाब दिया था।
pahalgam terror attack
- फोटो : संवाद/फाइल
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल 22 अप्रैल को हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत ने कड़ा जवाब देकर आतंक के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को फिर स्पष्ट कर दिया है।
लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों द्वारा किए गए इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे, की जान चली गई थी। हमले के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया था। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ और रिटायर्ड ब्रिगेडियर आरएस सिद्धू कहते हैं कि सेना और सरकार ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया था। अब भी ऑपरेशन सिंदूर जारी है।
हमले के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया। सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अनंतनाग- पहलगाम क्षेत्र को सील कर संदिग्धों की धरपकड़ शुरू की। राष्ट्रीय जांच एजेंसी की प्रारंभिक जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तानी सेना की संलिप्तता के संकेत मिले। जांच में दक्षिण कश्मीर के 15 स्थानीय सहयोगियों की पहचान भी हुई, जो आतंकी नेटवर्क को सहायता दे रहे थे।
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लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों द्वारा किए गए इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे, की जान चली गई थी। हमले के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया था। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ और रिटायर्ड ब्रिगेडियर आरएस सिद्धू कहते हैं कि सेना और सरकार ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया था। अब भी ऑपरेशन सिंदूर जारी है।
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हमले के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया। सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अनंतनाग- पहलगाम क्षेत्र को सील कर संदिग्धों की धरपकड़ शुरू की। राष्ट्रीय जांच एजेंसी की प्रारंभिक जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तानी सेना की संलिप्तता के संकेत मिले। जांच में दक्षिण कश्मीर के 15 स्थानीय सहयोगियों की पहचान भी हुई, जो आतंकी नेटवर्क को सहायता दे रहे थे।
उठाए थे कड़े कूटनीतिक कदम
हमले के बाद केंद्र सरकार ने 23 अप्रैल को कड़े कूटनीतिक कदम उठाए। इनमें 1960 की सिंधु जल संधि का निलंबन, अटारी-वाघा बॉर्डर को तत्काल बंद करना, पाकिस्तानी सैन्य सलाहकारों को निष्कासित करना, दूतावास कर्मियों की संख्या घटाना और पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना शामिल है। इन फैसलों ने दोनों देशों के बीच संबंधों में तीखी तल्खी ला दी।ब्रिगेडियर सिद्धू कहते हैं कि इसके साथ ही भारत ने सैन्य विकल्प भी अपनाया। सात मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सेना, वायुसेना और नौसेना ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान और पीओके में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को सटीक हमलों से निशाना बनाया। महज 25 मिनट में पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया, जिसमें करीब 100 आतंकियों और उनके सहयोगियों के मारे जाने का दावा किया गया है।
किसी नागरिक या सैन्य ठिकाने को नहीं बनाया गया निशाना
भारत ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सीमित, सटीक और गैर-उत्तेजक थी, जिसमें किसी नागरिक या सैन्य ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया। हालांकि, पाकिस्तान ने इसे ‘युद्ध की कार्रवाई’ बताते हुए जवाबी हमले किए, जिनमें नियंत्रण रेखा पर गोलाबारी, ड्रोन और मिसाइल हमले शामिल थे। भारतीय सेना ने इन हमलों को प्रभावी ढंग से विफल किया और हवाई श्रेष्ठता भी प्रदर्शित की।चार दिन के भीतर अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद संघर्ष विराम लागू हुआ। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को न्याय और आतंक के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। इस पूरी कार्रवाई ने संकेत दिया है कि अब भारत आतंकवादी हमलों को सीधे युद्ध के रूप में देखेगा और उसके जवाब में निर्णायक कदम उठाएगा।

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