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Chandigarh News: नाटककार जतिंदर बराड़ का निधन, रंगमंच का सुनहरा युग समाप्त
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-देश-विदेश में कला को पहचान देने वाले कलाकार के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। पंजाब के शिरोमणि नाटककार जतिंदर बराड़ का शनिवार को 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य और रंगमंच जगत में गहरा शून्य पैदा हुआ है। बराड़ ने भले ही व्यक्तिगत प्रयासों से नाटक जगत को नया आयाम दिया लेकिन उनके योगदान की गूंज आज भी पूरे पंजाब और देशभर में सुनाई देती है।
बराड़ ने 1965 में स्कूल के दौरान अपना पहला नाटक डॉरमेट्री मंचित किया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग की और नौकरी की तलाश में भटकते रहे। 1998 में उन्होंने खालसा कॉलेज के सामने ओपन एयर थिएटर स्थापित किया और पंजाब नाटशाला की नींव रखी। यह नाटशाला आज न केवल भारत, बल्कि विदेशों में भी बेहतरीन मानी जाती है।
शिरोमणि नाटककार केवल धालीवाल ने बताया कि जतिंदर बराड़ के संस्कार 26 जनवरी को शहीदां साहिब श्मशानघाट में दोपहर 2 बजे होंगे। उन्होंने कहा कि नाटशाला के मंच से कई कलाकार जैसे कपिल शर्मा, भारती सिंह, राजीव ठाकुर, चंदन प्रभाकर उभरे और दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
बराड़ के नाटकों और योगदान की झलक
उनके लिखे नाटकों में कुदेसन, पायदान, फासले, मिर्च-मसाला, डाटर ऑफ द विन, मिर्जा साहिबा, अग्नि परीक्षा, विन बुलाए मेहमान, टोया, सब्ज बाग, अरमान, अहसास, पहचान, रव नाल चैट, साका जलियांवाला बाग सहित दर्जन भर किताबें और लगभग 30 लघु नाटक शामिल हैं। उन्होंने पंजाब में थिएटर को मनोरंजन टैक्स मुक्त करवाने में भी अहम भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने नाटशाला में उनका नाटक देखकर इसे टैक्स मुक्त किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। पंजाब के शिरोमणि नाटककार जतिंदर बराड़ का शनिवार को 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य और रंगमंच जगत में गहरा शून्य पैदा हुआ है। बराड़ ने भले ही व्यक्तिगत प्रयासों से नाटक जगत को नया आयाम दिया लेकिन उनके योगदान की गूंज आज भी पूरे पंजाब और देशभर में सुनाई देती है।
बराड़ ने 1965 में स्कूल के दौरान अपना पहला नाटक डॉरमेट्री मंचित किया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग की और नौकरी की तलाश में भटकते रहे। 1998 में उन्होंने खालसा कॉलेज के सामने ओपन एयर थिएटर स्थापित किया और पंजाब नाटशाला की नींव रखी। यह नाटशाला आज न केवल भारत, बल्कि विदेशों में भी बेहतरीन मानी जाती है।
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शिरोमणि नाटककार केवल धालीवाल ने बताया कि जतिंदर बराड़ के संस्कार 26 जनवरी को शहीदां साहिब श्मशानघाट में दोपहर 2 बजे होंगे। उन्होंने कहा कि नाटशाला के मंच से कई कलाकार जैसे कपिल शर्मा, भारती सिंह, राजीव ठाकुर, चंदन प्रभाकर उभरे और दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
बराड़ के नाटकों और योगदान की झलक
उनके लिखे नाटकों में कुदेसन, पायदान, फासले, मिर्च-मसाला, डाटर ऑफ द विन, मिर्जा साहिबा, अग्नि परीक्षा, विन बुलाए मेहमान, टोया, सब्ज बाग, अरमान, अहसास, पहचान, रव नाल चैट, साका जलियांवाला बाग सहित दर्जन भर किताबें और लगभग 30 लघु नाटक शामिल हैं। उन्होंने पंजाब में थिएटर को मनोरंजन टैक्स मुक्त करवाने में भी अहम भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने नाटशाला में उनका नाटक देखकर इसे टैक्स मुक्त किया।