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Punjab: अमरिंदर सिंह के साथ भाजपा में शामिल होने वाले पांच नेताओं को Y श्रेणी की सुरक्षा, मिल रही थीं धमकियां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 10 Oct 2022 09:08 PM IST
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सार
गृह मंत्रालय ने पंजाब भाजपा में शामिल होने वाले अमरीक सिंह अलीवाल, हरचंद कौर, प्रेम मित्तल, हरजिंदर सिंह कांट्रैक्टर और कमलदीप सैनी को वाई श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराने का फैसला किया है। ये सभी नेता हाल ही में कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ भाजपा में शामिल हुए थे।
कैप्टन अमरिंदर सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर। (फाइल फोटो)
- फोटो : @BJP4India
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विस्तार
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ भाजपा में शामिल होने वाले पांच नेताओं को केंद्र सरकार ने वाई श्रेणी सुरक्षा प्रदान की है। यह सुरक्षा सरकार ने आईबी की रिपोर्ट के आधार पर दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब के वर्तमान राजनीतिक हालात को देखते हुए यह सुरक्षा प्रदान की है। पंजाब में अपराधियों की बढ़ रही घुसपैठ भी सुरक्षा देने का बड़ा कारण है। पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले से ही उच्च सुरक्षा के घेरे में हैं।
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वाई श्रेणी देश का चौथा सुरक्षा लेवल है, जिसके तहत गण्यमान्य व्यक्ति को 11 सदस्यीय सुरक्षा कवच प्रदान किया जाता है। इस सुरक्षा कवच में एनएसजी के दो कमांडो और पुलिसकर्मी शामिल होते हैं। कुल पांच लेवल के सुरक्षा कवच में से संबंधित व्यक्ति को किस लेवल की सुरक्षा मुहैया कराई जानी चाहिए, यह फैसला खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाता है।
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गृह मंत्रालय ने पंजाब भाजपा में शामिल होने वाले अमरीक सिंह अलीवाल, हरचंद कौर, प्रेम मित्तल, हरजिंदर सिंह कांट्रैक्टर और कमलदीप सैनी को वाई श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराने का फैसला किया है। ये सभी नेता हाल ही में कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ भाजपा में शामिल हुए थे। आईबी ने इन नेताओं को मिल रही धमकियों के आधार पर केंद्रीय मंत्रालय से सुरक्षा बढ़ाने की सिफारिश की थी।
किसानों के गुस्से का शिकार हुए थे भाजपा नेता
तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के दौरान पंजाब में भाजपा के नेताओं को किसानों और उनके परिवारों के गुस्से का सामना करना पड़ा था। सार्वजनिक स्थलों पर कई भाजपा नेताओं से दुर्व्यवहार के मामले सामने आए और कई नेताओं के घरों पर किसानों ने गोबर आदि फेंककर अपने गुस्से का इजहार किया था।
दिल्ली की सरहदों पर किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा विरोध पंजाब में ही भाजपा नेताओं को झेलना पड़ा था। आंदोलन का एक बड़ा नुकसान भाजपा को यह भी हुआ कि सूबे में उसका कैडर बिखर गया। युवा कार्यकर्ताओं ने भी पार्टी से दूरी बना ली। इसी का खामियाजा भाजपा को 2022 के विधानसभा चुनाव में भी भुगतना पड़ा जब पार्टी के उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के दौरान भी किसानों और उनके समर्थकों के खुले विरोध का सामना करना पड़ा था।
