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बिना अपील 32 साल जेल में रहा दोषी: हाईकोर्ट ने कहा-पीड़ा नहीं बढ़ा सकते, जेल प्रशासन की लापरवाही पर नाराजगी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 01 Apr 2026 08:21 AM IST
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सार
याची रमेश को नवंबर 1993 को करनाल कोर्ट ने हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। रमेश ने सजा के खिलाफ मार्च 2026 में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हत्या के मामले में सजा के खिलाफ अपील दाखिल करने में 32 साल की देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने कहा कि न्याय प्रक्रिया में इतनी लंबी देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती और अब इस पीड़ा को और लंबा नहीं खींचा जा सकता।
कोर्ट ने बताया कि वर्ष 1992 में दोषी ठहराए गए व्यक्ति ने करीब 32 वर्ष जेल में बिताए लेकिन इस दौरान उसकी ओर से अपील तक दाखिल नहीं की गई। हाईकोर्ट ने पाया कि दोषी करीब 11,740 दिनों (लगभग 32 साल) की देरी के बाद अपील लेकर कोर्ट पहुंचा।
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कोर्ट ने बताया कि वर्ष 1992 में दोषी ठहराए गए व्यक्ति ने करीब 32 वर्ष जेल में बिताए लेकिन इस दौरान उसकी ओर से अपील तक दाखिल नहीं की गई। हाईकोर्ट ने पाया कि दोषी करीब 11,740 दिनों (लगभग 32 साल) की देरी के बाद अपील लेकर कोर्ट पहुंचा।
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कानूनी सहायता प्रणाली की विफलता पर भी चिंता
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने कहा कि इतने लंबे समय तक कैद के बावजूद अपील दाखिल न होना गंभीर चिंता का विषय है। यदि आरोपी स्वयं अपील दाखिल नहीं कर सका तो यह जेल प्रशासन की जिम्मेदारी थी कि वह इस दिशा में आवश्यक कदम उठाता।पीठ ने इस मामले में कानूनी सहायता प्रणाली की विफलता पर भी चिंता जताई और कहा कि इसकी निष्क्रियता का खामियाजा दोषी को नहीं भुगतना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह प्रकरण न्याय व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है। हाईकोर्ट ने 32 वर्ष की देरी को माफ करते हुए अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 2 मई को तय की गई है।