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सरगुजा में एएसएफ वैक्सीन का ट्रायल: सुकर फार्म में वैज्ञानिकों ने लिए सैंपल, सूकर पालकों को राहत की उम्मीद
Mon, 13 Jul 2026 05:27 PM IST
अंबिकापुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अम्बिकापुर
अमर उजाला नेटवर्क, अम्बिकापुर
Published by: अंबिकापुर ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jul 2026 05:27 PM IST
सार
सरगुजा के सकलो शासकीय सुकर फार्म में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (एएसएफ) वैक्सीन का ट्रायल जारी है। एनआईएचएसएडी के वैज्ञानिकों ने सैंपल लेकर परीक्षण की समीक्षा की। सफल ट्रायल से सूकर पालकों को राहत मिलेगी और बीमारी से होने वाले आर्थिक नुकसान में कमी आने की उम्मीद है।
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सुकर फार्म में वैज्ञानिकों ने लिए सैंपल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सरगुजा जिले के शासकीय सुकर फार्म, सकलो में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (एएसएफ) वैक्सीन का ट्रायल मार्च से जारी है। ट्रायल का संचालन पशुपालन विभाग के निर्देशन में किया जा रहा है, जबकि वैक्सीन का विकास और परीक्षण भोपाल स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज (एनआईएचएसएडी) के वैज्ञानिकों की देखरेख में हो रहा है।
फार्म प्रबंधक डॉ. अजय अग्रवाल ने बताया कि ट्रायल की प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए एनआईएचएसएडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजू कुमार 8 जुलाई को सकलो सुकर फार्म पहुंचे। उन्होंने ट्रायल की समीक्षा की और सूकरों के ब्लड, सीरम तथा नेजल सैंपल एकत्र किए, जिन्हें आगे की वैज्ञानिक जांच के लिए भेजा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अफ्रीकन स्वाइन फीवर सूकरों में फैलने वाला बेहद घातक वायरल रोग है, जो घरेलू और जंगली दोनों प्रकार के सूकरों को प्रभावित करता है। इस बीमारी में मृत्यु दर काफी अधिक होती है और फिलहाल इसका कोई प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है। संक्रमित पशुओं का केवल लक्षणों के आधार पर उपचार किया जाता है।
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पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भारत में अफ्रीकन स्वाइन फीवर वैक्सीन का यह पहला ट्रायल माना जा रहा है। वर्तमान में देश समेत दुनिया के अधिकांश देशों में इस बीमारी के लिए कोई पूर्ण रूप से स्वीकृत व्यावसायिक वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
शासकीय सुकर फार्म के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सी.के. मिश्रा ने बताया कि सकलो फार्म में ट्रायल वैज्ञानिक मानकों और जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि परीक्षण सफल रहता है तो भविष्य में यह वैक्सीन सूकर पालकों के लिए बड़ी राहत साबित होगी और अफ्रीकन स्वाइन फीवर से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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फार्म प्रबंधक डॉ. अजय अग्रवाल ने बताया कि ट्रायल की प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए एनआईएचएसएडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजू कुमार 8 जुलाई को सकलो सुकर फार्म पहुंचे। उन्होंने ट्रायल की समीक्षा की और सूकरों के ब्लड, सीरम तथा नेजल सैंपल एकत्र किए, जिन्हें आगे की वैज्ञानिक जांच के लिए भेजा गया है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, अफ्रीकन स्वाइन फीवर सूकरों में फैलने वाला बेहद घातक वायरल रोग है, जो घरेलू और जंगली दोनों प्रकार के सूकरों को प्रभावित करता है। इस बीमारी में मृत्यु दर काफी अधिक होती है और फिलहाल इसका कोई प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है। संक्रमित पशुओं का केवल लक्षणों के आधार पर उपचार किया जाता है।
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पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भारत में अफ्रीकन स्वाइन फीवर वैक्सीन का यह पहला ट्रायल माना जा रहा है। वर्तमान में देश समेत दुनिया के अधिकांश देशों में इस बीमारी के लिए कोई पूर्ण रूप से स्वीकृत व्यावसायिक वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
शासकीय सुकर फार्म के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सी.के. मिश्रा ने बताया कि सकलो फार्म में ट्रायल वैज्ञानिक मानकों और जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि परीक्षण सफल रहता है तो भविष्य में यह वैक्सीन सूकर पालकों के लिए बड़ी राहत साबित होगी और अफ्रीकन स्वाइन फीवर से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।