{"_id":"69c119bc5321a4e6a20c8325","slug":"gangalur-pota-cabin-mamle-me-sarv-aadivasi-samaj-ki-janch-riport-jaari-bijapur-news-c-1-1-noi1491-4081632-2026-03-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bijapur: गंगालूर पोर्टा केबिन मामले में सर्व आदिवासी समाज की जांच रिपोर्ट जारी, प्रसारित सूचना अर्ध सत्य मिलीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bijapur: गंगालूर पोर्टा केबिन मामले में सर्व आदिवासी समाज की जांच रिपोर्ट जारी, प्रसारित सूचना अर्ध सत्य मिलीं
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
Published by: बीजापुर ब्यूरो
Updated Mon, 23 Mar 2026 04:36 PM IST
विज्ञापन
सार
सर्व आदिवासी समाज की जांच में छात्राओं के गर्भवती होने की खबरें अर्ध-सत्य मिलीं। एक अनुपस्थित थी, दो मंगनी किए युवकों संग रह रही थीं। छात्रावास में सुरक्षा कमियां मिलीं।
बीजापुर न्यूज
विज्ञापन
विस्तार
जिले के गंगालूर स्थित पोर्टा केबिन में छात्राओं के गर्भवती होने संबंधी खबरों को लेकर सर्व आदिवासी समाज द्वारा गठित जांच दल ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर के निर्देशन में 19 मार्च 2026 को गठित नौ सदस्यीय जांच दल ने स्थलीय निरीक्षण, संबंधित छात्राओं और उनके परिजनों तथा छात्रावास स्टाफ से चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की।
Trending Videos
जांच में पाया गया कि सोशल मीडिया एवं कुछ मीडिया माध्यमों में प्रसारित खबरें पूर्णतः सत्य नहीं हैं, बल्कि आंशिक (अर्ध-सत्य) जानकारी पर आधारित हैं। जांच के अनुसार, एक छात्रा सितंबर 2025 में अवकाश पर घर गई थी और बाद में छात्रावास वापस नहीं लौटी। वहीं, अन्य दो छात्राएं जुलाई 2025 से ही विद्यालय में नियमित नहीं थीं और वे अपने मंगनी किए गए युवकों के साथ रह रही थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित छात्राओं की मंगनी 3-4 वर्ष पूर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत हो चुकी थी। हालांकि, जांच दल ने आवासीय विद्यालय में सुरक्षा एवं प्रबंधन से जुड़ी गंभीर कमियां भी उजागर की हैं। छात्रावास में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था का अभाव, लंबे समय से बंद पड़े सीसीटीवी कैमरे तथा छात्राओं में नैतिक एवं स्वास्थ्य शिक्षा की कमी प्रमुख रूप से सामने आई है।
सर्व आदिवासी समाज ने प्रशासन से मांग की है कि छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ की जाए, सीसीटीवी कैमरों को तत्काल चालू किया जाए। साथ ही छात्राओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएं। समाज ने यह भी स्पष्ट किया है कि भ्रामक खबरों से समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है, इसलिए तथ्यात्मक जानकारी ही प्रसारित की जानी चाहिए।