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एक मई-मजदूर दिवस: श्रमिकों के सम्मान में खाये बोरे-बासी, कांग्रेस बोली- श्रमिक विरोधी है बीजेपी
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Fri, 01 May 2026 03:03 PM IST
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सार
1st may Labour Day: एक मई मजदूर दिवस पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के पदाधिकारियों ने श्रमिकों के सम्मान में बोरे-बासी खाये।
मजदूरों के सम्मान में खाये बोरे-बासी
- फोटो : Amar ujala digital
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विस्तार
1st may Labour Day: एक मई मजदूर दिवस पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के पदाधिकारियों ने श्रमिकों के सम्मान में बोरे-बासी खाये। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने श्रमवीरों को मजदूर दिवस की बधाई देते हुए कहा कि इस दिन श्रम का सम्मान करते हुए सभी हमारे पारंपरिक भोजन बोरे-बासी को खाये और बोरे-बासी खाते हुए अपनी तस्वीर सोशल मीडिया में जरूर पोस्ट करें। बोरे-बासी छत्तीसगढ़ की अस्मिता संस्कृति का प्रतीक है। यह हमारे किसानों, मजदूरों के सम्मान के साथ अपनी परंपरा पर अभिमान होगा।
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प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा किसान और छत्तीसगढ़ संस्कृति विरोधी है। इसीलिये वे बोरे-बासी का विरोध करते रहे हैं। पूंजीपति मित्रों के मुनाफे के लिए मोदी सरकार ने मजदूरों के रोजगार और सामाजिक सुरक्षा दोनों को खत्म करने का षड्यंत्र रचा है। केंद्रीय सदन में विपक्ष दल के सांसदों को बाहर करके एक ही दिन में बिना चर्चा के दर्जनों श्रम कानूनों में श्रमिक विरोधी संशोधन किए गए। कारोबार सुगमता के नाम पर 27 मौजूदा कानून को समाप्त कर नए कानून में 75 प्रतिशत श्रमिकों को बाहर कर दिया गया। अब नई कंपनी में महिला रूम व बच्चों के देखभाल के लिए क्रेज बनाना भी अनिवार्य नहीं होगा न्यूनतम वेतन कानून, बोनस कानून, अनुबंध कानून, कर्मचारी क्षतिपूर्ति कानून, संविदा श्रमिक कानून, असंगठित मजदूर कानून, स्वास्थ्य एवं बीमा कानून आदि नहीं रहेंगे। काम के घंटे जो मोदी सरकार से पहले 8 घंटे थे, उसे बढ़कर 12 घंटा किया गया, तमाम तरह की सुविधाए और छिन लिया गया। औद्योगिक इकाइयों को अपने हिसाब से मजदूर रखने और निकालने की आजादी दे दी गई है। अब मजदूरों की बदहाली पर श्रम न्यायालय भी संज्ञान नहीं ले पाएगा और ना ही ऊपर किसी अपील में सुनवाई होगी। शोषण के खिलाफ हड़ताल और प्रदर्शन तक के अधिकार एक झटके में समाप्त कर दिए गए, मोदी सरकार ने मजदूरों का हक छीना है।
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बैज ने कहा है कि पूंजीपति मित्रों के प्रभाव में मोदी सरकार ने श्रमिकों की आवाज दबाने भारतीय कारखाना अधिनियम, औद्योगिक विवाद अधिनियम, ट्रेड यूनियन अधिनियम, समान पारिश्रमिक अधिनियम, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, वेतन भुगतान अधिनियम, बोनस भुगतान अधिनियम, यौन उत्पीड़न अधिनियम, बाल श्रम निषेध, मातृत्व लाभ अधिनियम, कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण कानून को आंशिक या पूर्ण रूप से स्थगित कर दिया है। नई मजदूरी कोड मेहनतकश मजदूरों के लिए पूरी तरह धोखा है, यह मजदूरों के अधिकारों पर हमला है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार ने किसानों और मजदूरों की समृद्धि के लिए अनेकों योजनाएं चलाई, साय सरकार ने दुर्भावना पूर्वक भूमिहीन मजदूर न्याय योजना अघोषित तौर पर बंद कर दी है, गोठानो में आजीविका कमा रही 27 लाख महिलाओं से रोजगार छीना, वनांचल में वन उपज की प्रोसेसिंग का कार्य भी महिला समूह से छीन लिया। बेहद स्पष्ट है कि भारतीय जनता पार्टी का असल चरित्र श्रमिक विरोधी है, किसान विरोधी है, महिला विरोधी है।
