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CG High Court: दिव्यांगों को आरक्षण देने के फैसले को चुनौती,18 कारों में स्टंट मामले पर हाईकोर्ट सख्त

अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: अनुज कुमार Updated Sat, 20 Sep 2025 08:59 PM IST
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सार

छत्तीसगढ़ सरकार के पुराने 1995 के अधिनियम के तहत केवल 5 प्रकार की दिव्यांगता को आरक्षण देने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, तो वहीं मस्तूरी रोड पर 18 कारों में स्टंट और रील बनाने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जब्त वाहनों को बिना अनुमति छोड़ने पर रोक लगाई है।

Challenge to reservation for disabled, High Court strict on stunt case involving 18 cars
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट - फोटो : highcourt.cg.gov.in
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विस्तार

संसद द्वारा पारित दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के बजाय राज्य सरकार द्वारा पुराने नियमों के तहत दिव्यांगजनों को आरक्षण देने के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

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दोनों पैर से दिव्यांग डॉ रितेश तिवारी आयुर्वेद स्नातक है और बीएल कैटेगरी में नौकरी की पात्रता रखते हैं। दायर याचिका में उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 1995 के अधिनियम के तहत दिव्यांगों को आरक्षण दिया जा रहा है। इस अधिनियम में तीन कैटेगरी में पांच प्रकार की दिव्यांगता का उल्लेख है। लेकिन इसी आधार पर चिन्हांकित सिर्फ तीन कैटेगरी के दिव्यांगों को शासकीय सेवा में आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है।
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चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच के समक्ष पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कहा कि वर्ष 2016 में पार्लियामेंट ने दिव्यांगजनों के अधिकार अधिनियम में बड़ा बदलाव कर दिया है। आरक्षण सुविधा के लिए 17 कैटेगरी को शामिल किया है। इसमें बहु विकलांगता, ऑटिज्म, मानसिक विकलांगता, एसिड अटैक विकलांगता, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, ब्लाइंड, बौनापन सहित इस कैटेगरी में शामिल किए गए दिव्यांजनों को आरक्षण का लाभ देने का प्रावधान है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सभी नियुक्तियों में पूर्व के अधिनियम के अनुसार सिर्फ 5 प्रकार की दिव्यांगता को ही चिन्हांकित कर आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। यह पार्लियामेंट द्वारा पारित अधिनियम और बनाए गए कानून का सीधे तौर पर उल्लंघन है।

डिवीजन बेंच को बताया कि पार्लियामेंट द्वारा पारित अधिनियम का छत्तीसगढ़ में पालन नहीं किया जा रहा है। दिव्यांगजनों को आरक्षण देने के लिए अब तक कमेटी का गठन नहीं किया गया है और ना ही पद चिन्हांकित किए हैं। दिव्यांगजनों को सरकारी नौकरी में आयु सीमा में भी छूट नहीं दी जा रही है।

रील के शौक पर पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
मस्तूरी रोड पर देर रात 18 कारों में स्टंट और रील बनाने के मामले को हाईकोर्ट ने संज्ञान में लिया है। कोर्ट ने इसे बहुत गंभीर बताते हुए आदेश दिया कि मस्तूरी पुलिस द्वारा जब्त की गई 18 कारों को हाईकोर्ट की अनुमति के बिना नहीं छोड़ा जाएगा। कोर्ट ने अगली सुनवाई 23 सितंबर को रखी है जिसमें राज्य सरकार के मुख्य सचिव को शपथपत्र में बताना होगा कि इन अपराधियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई है।

कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा- पुलिस का प्रकोप केवल गरीब, मध्यम वर्ग और दलितों पर ही पड़ता है, लेकिन जब अपराधी कोई संपन्न व्यक्ति होता है, चाहे वह बाहुबल, धन या राजनीतिक समर्थन के मामले में हो, तो पुलिस अधिकारी नख-दंतहीन बाघ बन जाते हैं। ऐसे अपराधियों को मामूली जुर्माना भरकर छोड़ दिया जाता है, उनके वाहन भी मालिकों को सौंप दिए जाते हैं। कोर्ट ने आदेश की कॉपी राज्य के मुख्य सचिव को भेजने कहा है।

सरकार की ओर से दी गई कार्रवाई की जानकारी
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर अभियान चलाया और स्टंट में शामिल 18 गाड़ियों को जब्त कर लिया है। इसके साथ ही कार मालिकों के ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की सिफ़ारिश की गई है। यह कार्रवाई सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से की गई है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। गाड़ियों के मालिकों की पहचान कर ली गई है और सभी के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। साथ ही युवाओं को चेतावनी दी गई है कि सार्वजनिक सड़कों पर स्टंटबाजी करने पर कड़ी सजा दी जाएगी।

कोर्ट ने यह भी कहा है कि पुलिस अधिकारियों को आखिर ऐसे लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज करने से कौन, और क्यों रोकता है। ऐसे अपराधी प्रवृत्ति के लोग गैर जिम्मेदार होते हैं और अन्य यात्रियों की जान को खतरे में डालते हैं। ऐसे गुंडा तत्वों के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जो उनके जीवन के लिए एक सबक हो। कोर्ट ने यह भी कहा है कि वर्तमान मामले में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई केवल दिखावा है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि मस्तूरी पुलिस द्वारा जब्त की गई 18 कारों को हाईकोर्ट की अनुमति के बिना नहीं छोड़ा जाएगा।

तीन दिन पहले बिलासपुर मस्तूरी रोड पर देर रात 15-20 कारों में स्टंट करते हुए लोगों ने हाइवे जाम कर दिया था। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई। वीडियो में युवाओं को तेज रफ्तार से गाड़ियां दौड़ाते, स्टंट करते और सड़क पर खतरा पैदा करते देखा गया।

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