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बिलासपुर हाईकोर्ट: कर्मचारी से त्रुटिपूर्ण वेतन निर्धारण पर जारी वसूली आदेश रद्द, जानें पूरा मामला
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: आकाश दुबे
Updated Tue, 02 Sep 2025 12:09 AM IST
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सार
याचिका पर जस्टिस एके प्रसाद की बेंच में सुनवाई हुई। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि वेतन निर्धारण में कोई भी त्रुटि पूरी तरह से प्रतिवादियों की ओर से है और 16 वर्षों के बाद वेतन से वसूली मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और कानूनन गलत है। याचिकाकर्ता की अपने वेतन निर्धारण में कोई भूमिका नहीं थी।
बिलासपुर हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हाईकोर्ट ने कर्मचारी से त्रुटिपूर्ण वेतन निर्धारण पर जारी वसूली आदेश के खिलाफ दायर याचिका में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कोर्ट ने कहा कि अतिरिक्त भुगतान अगर गलत बयानी, धोखाधड़ी या कर्मचारी की गलती के कारण नहीं, बल्कि नियोक्ता की गलती के कारण हुआ हो तो कर्मचारी को नियोक्ता द्वारा की गई गलती के लिए दंडित नहीं किया जा सकता। इसके साथ कोर्ट ने याचिकाकर्ता से जारी वसूली आदेश को रद्द कर वसूली गई राशि वापस करने का निर्देश दिया है।
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याचिकाकर्ता गोपाल प्रसाद नायक को 1996 में व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था। बाद में उन्हें शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, जांजगीर-चांपा में प्राचार्य के पद पर पदोन्नत किया गया, जहां वह निर्धारित कार्यों को कर रहे थे। निदेशक तकनीकी शिक्षा नया रायपुर ने 21 दिसंबर 2022 को एक विवादित आदेश पारित किया, जिसमें याचिकाकर्ता को वर्ष 2006 से किए गए कथित अतिरिक्त भुगतान की वसूली का निर्देश दिया गया और वेतन निर्धारण में संशोधन भी कर दिया। निदेशक तकनीकी शिक्षा द्वारा जारी वसूली आदेश के खिलाफ याचिका दायर की। याचिका पर जस्टिस एके प्रसाद की बेंच में सुनवाई हुई। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि वेतन निर्धारण में कोई भी त्रुटि पूरी तरह से प्रतिवादियों की ओर से है और 16 वर्षों के बाद वेतन से वसूली मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और कानूनन गलत है। याचिकाकर्ता की अपने वेतन निर्धारण में कोई भूमिका नहीं थी।
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रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे दूर-दूर तक यह पता चले कि याचिकाकर्ता ने अधिकारियों को गुमराह करने में कोई भूमिका निभाई थी, या वह धोखाधड़ी, गलत बयानी, या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने का दोषी था। किसी भी स्तर पर उसे यह नहीं बताया गया कि ऐसा निर्धारण त्रुटिपूर्ण था या वह कथित अतिरिक्त भुगतान वापस करने के लिए उत्तरदायी हो सकता है। याचिकाकर्ता पर दायित्व थोपना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और निष्पक्षता, समता और अच्छे विवेक के सिद्धांतों के विपरीत है। इसके साथ कोर्ट ने निदेशक तकनीकी शिक्षा द्वारा जारी वसूली आदेश को रद्द किया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से वसूली गई राशि आदेश प्राप्त होने की तिथि से तीन माह के अंदर लौटाने का आदेश दिया है।