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छत्तीसगढ़ में गैस वितरण नीति बदली: 20% सीमा लागू, रोजाना होगी निगरानी; जरूरी सेवाओं को मिलेगी प्राथमिकता
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 26 Mar 2026 12:39 PM IST
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सार
नए निर्णय के अनुसार, अब व्यावसायिक संस्थानों और प्रतिष्ठानों को उनकी पिछले महीने की कुल खपत के अधिकतम 20 प्रतिशत तक ही एलपीजी उपलब्ध कराया जाएगा।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रायपुर में खाद्य विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद कमर्शियल एलपीजी वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। बैठक में गैस आपूर्ति को सुव्यवस्थित करने और जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता देने के लिए कई अहम फैसले लिए गए।
नए निर्णय के अनुसार, अब व्यावसायिक संस्थानों और प्रतिष्ठानों को उनकी पिछले महीने की कुल खपत के अधिकतम 20 प्रतिशत तक ही एलपीजी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में 25 दिनों और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिनों के भीतर ऑनलाइन रिफिल बुकिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन को एलपीजी वितरकों के गोदामों और कार्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस और होमगार्ड की तैनाती के जरिए भीड़ और अव्यवस्था को नियंत्रित करने पर जोर दिया गया है। साथ ही वितरकों को उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित समाधान करने और अपने संपर्क नंबर सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
गैस आपूर्ति के लिए प्राथमिकता श्रेणियां भी तय की गई हैं, ताकि आवश्यक सेवाओं पर कोई असर न पड़े। इनमें अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, सुरक्षा बलों के कैंप, जेल, होटल, रेलवे और एयरपोर्ट कैंटीन, शासकीय कार्यालय, गेस्ट हाउस और अन्य जरूरी संस्थान शामिल हैं।
बैठक की अध्यक्षता खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने की, जिसमें ऑयल कंपनियों के क्षेत्रीय अधिकारियों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य फोकस प्रदेश में एलपीजी की उपलब्धता, वितरण प्रणाली और उपभोक्ताओं तक समय पर गैस पहुंचाने पर रहा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कमर्शियल एलपीजी के स्टॉक और वितरण की दैनिक समीक्षा की जाएगी। ऑयल कंपनियां हर दिन की रिपोर्ट विभाग को देंगी, जिससे स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा सके।
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नए निर्णय के अनुसार, अब व्यावसायिक संस्थानों और प्रतिष्ठानों को उनकी पिछले महीने की कुल खपत के अधिकतम 20 प्रतिशत तक ही एलपीजी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में 25 दिनों और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिनों के भीतर ऑनलाइन रिफिल बुकिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन को एलपीजी वितरकों के गोदामों और कार्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस और होमगार्ड की तैनाती के जरिए भीड़ और अव्यवस्था को नियंत्रित करने पर जोर दिया गया है। साथ ही वितरकों को उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित समाधान करने और अपने संपर्क नंबर सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
गैस आपूर्ति के लिए प्राथमिकता श्रेणियां भी तय की गई हैं, ताकि आवश्यक सेवाओं पर कोई असर न पड़े। इनमें अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, सुरक्षा बलों के कैंप, जेल, होटल, रेलवे और एयरपोर्ट कैंटीन, शासकीय कार्यालय, गेस्ट हाउस और अन्य जरूरी संस्थान शामिल हैं।
बैठक की अध्यक्षता खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने की, जिसमें ऑयल कंपनियों के क्षेत्रीय अधिकारियों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य फोकस प्रदेश में एलपीजी की उपलब्धता, वितरण प्रणाली और उपभोक्ताओं तक समय पर गैस पहुंचाने पर रहा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कमर्शियल एलपीजी के स्टॉक और वितरण की दैनिक समीक्षा की जाएगी। ऑयल कंपनियां हर दिन की रिपोर्ट विभाग को देंगी, जिससे स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा सके।