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Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Hareli Tihar 2026: Hareli Tihar celebrated today in CM House Naya Raipur

Hareli Tihar 2026: सीएम हाउस नया रायपुर में आज मनेगा हरेली तिहार; रहेगी छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति की धूम

Wed, 12 Aug 2026 07:48 AM IST
Lalit Kumar Singh Lalit Kumar Singh
Updated Wed, 12 Aug 2026 07:48 AM IST
सार

Hareli Tihar 2026: आज छत्तीसगढ़ में पहला लोक तिहार (पर्व ) मनाया जायेगा। 12 अगस्त को मुख्यमंत्री निवास नवा रायपुर में यह पर्व धूमधाम से मनाया जायेगा। सुबह दस बजे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में हरेली तिहार पारंपरिक उल्लास और छत्तीसगढ़ी रंग में मनाया जाएगा। 
 

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Hareli Tihar 2026: Hareli Tihar celebrated today in CM House Naya Raipur
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

Hareli Tihar 2026: आज छत्तीसगढ़ में पहला लोक तिहार (पर्व ) मनाया जायेगा। 12 अगस्त को मुख्यमंत्री निवास नवा रायपुर में यह पर्व धूमधाम से मनाया जायेगा। सुबह दस बजे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में हरेली तिहार पारंपरिक उल्लास और छत्तीसगढ़ी रंग में मनाया जाएगा। 
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इस दौरान मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ी लोक परंपराओं और ग्रामीण परिवेश जीवंत झलक देखने को मिलेगी। ऐसे में सीएम हाउस को छत्तीसगढ़ी ग्रामीण परिवेश में सजाया गया है। खेती-किसानी से जुड़ी पारंपरिक वस्तुओं, कृषि उपकरणों और लोक संस्कृति के प्रतीकों को आकर्षक तरीके से सजाया गया है। कार्यक्रम में हरेली से जुड़ी पारंपरिक गतिविधियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं, कृषि संस्कृति और ग्रामीण जीवन की समृद्ध विरासत से जोड़ना  है।
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क्या है हरेली तिहार?
हरेली छत्तीसगढ़ का प्रमुख और पहला लोकपर्व है। खेती-किसानी से जुड़ा यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, अच्छी फसल की कामना और ग्रामीण जीवन के सामूहिक उल्लास का प्रतीक है। सावन की हरियाली के बीच मनाया जाने वाला हरेली तिहार प्रदेश की कृषि प्रधान संस्कृति और प्रकृति के साथ छत्तीसगढ़ के आत्मीय जुड़ाव को दिखाता है।
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किसान हरेली के दिन अपने कृषि उपकरणों और हल-नांगर की साफ-सफाई कर उनकी पूजा करते हैं। खेती में उपयोग होने वाले औजारों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। गांवों में घरों और चौपालों में पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हरेली की खुशियां मनाई जाती है। गेड़ी चढ़ने की परंपरा और विभिन्न छत्तीसगढ़ी खेल इस पर्व में चार चांद लगाते हैं। हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की उस जीवन पद्धति का प्रतीक है, जिसमें प्रकृति, कृषि और संस्कृति एक-दूसरे से जुड़े हैं। यह पर्व किसान और खेती के सम्मान के साथ सामूहिकता, प्रकृति संरक्षण और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता है।

 
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