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CG News: माइंस प्रभावित क्षेत्रों में लगातार बढ़ता जनाक्रोश, कांकेर सांसद का दौरा; पुल-स्कूल-सड़क सब अधर में

अमर उजाला नेटवर्क, कांकेर Published by: अनुज कुमार Updated Mon, 13 Oct 2025 02:43 PM IST
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सार

कांकेर के माइंस प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों का जनाक्रोश बढ़ रहा है, क्योंकि 2014 से संचालित माइंस के करोड़ों राजस्व के बावजूद वादे किए गए पुल, स्कूल, अस्पताल और सड़कें अधर में लटक गई हैं। सांसद विजय नाग ने प्रभावित पंचायतों का दौरा कर अनदेखी का जायजा लिया।

Kanker MP visits mine-affected areas amid growing public anger
कांकेर लोकसभा सांसद खुद माइंस प्रभावित क्षेत्र का ग्रामीणों संग दौरा किया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

यूं तो किसी क्षेत्र में माइंस की शुरुआत होती है तो क्षेत्र में एक उम्मीद आती है कि क्षेत्र विकास के नए आयाम गढ़ेगा। पर आज हम आपको एक ऐसी सच्चाई से रूबरू करवाएंगे। जहां तमाम तरीकों के आसमानी वादें जमीन पर दम तोड़ते दिखते हैं।
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कांकेर लोकसभा सांसद ने खुद माइंस प्रभावित क्षेत्र का ग्रामीणों संग दौरा किया और प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों संग जनसंवाद के माध्यम से तमाम विकास कार्य जो माइंस प्रबंधन की ओर से होने थे। उनका जायजा लिया। वहीं बैठक के माध्यम से प्रभावित 7 पंचायत के लोगों ने माइंस प्रबंधन पर क्षेत्र की अनदेखी के आरोप लगाए और बताया कि किस तरीके से माइंस का संचालन तो उनके क्षेत्र में चालू कर दिया गया। लेकिन अनुबंध के अनुरूप कोई विकास कार्य उनके क्षेत्र में नहीं हुए।
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दरअसल, 3 दिन पहले माइंस प्रभावित क्षेत्र के सरपंचों द्वारा माइंस प्रबंधन की वादा खिलाफी के चलते माइंस बंद करने का ज्ञापन सांसद नाग और अंतागढ़ एडीएम को सौंपा गया। सांसद नाग ने मामले पर संज्ञान लेते हुए माइंस प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और हर उस विकास कार्य जो कि माइंस प्रबंधन के वादों में थे। उनका जायजा लिया और कार्य शून्य पाया।

ये पहला मौका था, जब इतने अंदरूनी क्षेत्र में कोई सांसद आया हो। वो भी विकास कार्यों का जायजा लेने। अब बात माइंस द्वारा वहां किए विकास की कर लेते हैं। तो संसद नाग ने मेटाबोदेली में बैठक करने के बाद ग्रामीणों संग गांव के हर उस कोने तक पहुंचे जहां विकास के ढोल माइंस प्रबंधन द्वारा पिटे जाते हैं। यह बैठक विशेष इसलिए रही क्योंकि आदिवासी समाज के तमाम पदाधिकारियों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने भी इस बैठक की विश्वसनीयता और एकजुटता को बनाए रखा।

मुख्य प्रभावित गांव है मेटाबोदेली यहां पुल ही नहीं है, पंचायत मुख्यालय जाना हो या अन्य जरूरी कार्य, जान जोखिम में डाल नदी पार कर ग्रामीण आज भी जाने को विवश हैं। बारिश के दिनों में गांव दो हिस्से में बंट जाता है। अब कल्पन करिए की करोड़ों का राजस्व देने वाला माइंस, जिस गांव में विकास के दावे कर रहा हो। वहां की ऐसी तस्वीर तो समझा जा सकता है। विकास के क्या मायने हैं। 

विकास के नाम पर टूटे फूटे जर्जर स्कूल, बिजली पानी की व्यवस्था विहीन आंगनबाड़ी, टूटे सड़क और सांसद नाग ने यह भी बताया कि खदानों को लेकर आमजनों द्वारा लगातार उनसे शिकायतें की जा रही थी, तो पूर्व में भी उन्होंने डीएमएफ की बैठक को तीन महीने टाल दिया था।  स्पष्ट किया कि प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्रों में शत प्रतिशत विकास के कार्य होने चाहिए। वहीं सांसद नाग ने दौरे के दौरान उस बच्ची से भी मुलाकात की। जिसने माइंस वाहनों के चलते हुए हादसे में 3 साल पहले अपनी मां को खोया और खुद भी अपंगता में जीने को मजबूर मुआवजे के नाम पर खाना पूर्ति मात्र की गई। न उचित इलाज मिला, न वादे पूरे हुए। उचित इलाज न मिलने के चलते लाचारी की जीवन जीने को मजबूर है।

बता दें माइंस का संचालन वर्ष 2014 से शुरू हुआ और जनसुनवाई के दौरान कई हवाई वादे हुए की क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को सुधारने अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोला जाएगा। अच्छी चिकित्सा व्यवस्था के लिए हॉस्पिटल सड़क पुल पुलिया इस तरीके के विकास कार्यों को करवाने की एवज में माइंस प्रबंधन ने यहां के लोगों के साथ छलावा का आरोप लगा रहे है। 

आज अगर इस क्षेत्र को समझा जाए तो यह वो इलाका है, जो एक समय पहले माओवाद प्रभावित इलाका हुआ करता था। आज की वर्तमान स्थिति को अगर समझे तो सुरक्षाबल और पुलिस द्वारा बस्तर में लगातार मिशन 2026 के नक्सल मुक्त बस्तर की ओर अब क्षेत्र कदम बढ़ा चुका है। यह वहीं इलाका है, जहां सड़क पुल-पुलिया का विरोध एक समय पहले होता था। पर आज क्षेत्र में बदलाव की झलक देखे तो अब इस जगह पर बात विकास की होती है। 

दरअसल यह बताने का कारण यह है कि ये उन इलाकों में है, जिसे ये कहा जाए कि माओवाद गतिविधियों के चलते क्षेत्र को विकास विकास की दौंड में माइंस प्रबंधन द्वारा पीछे रखा गया। वहीं ग्रामीणों का यह भी कहना है मेटाबोदेली चारगांव माइंस प्रबंधन द्वारा उनके क्षेत्र में वादानुरूप विकास कार्यों के न होने चलते वे आक्रोशित हैं।

न सड़क की दसा सुधरी, न स्वास्थ्य व्यस्था में बदलाव आया, न ही शिक्षा के क्षेत्र में कोई कारगर पहल हुई। वहीं बता दें ग्रामीणों का कहना है कि जब तक माइंस प्रबंधन द्वारा किए गए वादों के हिसाब से कार्य नहीं होगा तब तक वे परिवहन नहीं होने देंगे।
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