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भारत में रोज ईवी से जुड़े 25 हादसे: तीन साल में इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की कितनी घटनाएं, क्या हैं वजहें?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: Kirtivardhan Mishra Updated Wed, 18 Mar 2026 03:42 PM IST
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सार

मध्य प्रदेश के इंदौर में चार्जिंग के दौरान ईवी में लगी आग ने पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में आठ लोगों की मौत हुई है। इंदौर की इस घटना के बाद पूरे देश में ईवी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आइये जानते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहनों में कब-कब आग का खतरा पैदा हो जाता है और देश में ईवी से जुड़ी हादसे के क्या आंकड़े हैं। 

Electric Vehicles Fire in Indore EV Fire and Accidents Government Data MoRTH Charging Short Circuit Battery
इंदौर में ईवी में लगी आग ने घर को चपेट में लिया। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश के इंदौर में बुधवार अल-सुबह जबरदस्त हादसा हुआ। यहां बंगाली चौराहे के पास स्थित एक कॉलोनी में मकान के बाहर खड़ी इलेक्ट्रिक कार में चार्जिंग के दौरान आग लग गई। यह आग देखते ही देखते इतनी बड़ी हो गई कि तीन मंजिल का पूरा मकान इसकी चपेट में आ गया। इस हादसे में आठ लोगों की जलकर मौत हो गई। वहीं, तीन लोगों को बचाया गया, जिनकी स्थिति गंभीर है। 
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इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं। दरअसल, यह ईवी से जुड़ा कोई पहला हादसा नहीं है, बल्कि समय-समय पर इलेक्ट्रिक कारों, दोपहिया वाहनों में आग लगने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इन घटनाओं में पहले भी जान गई हैं। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में आग लगने की घटनाओं का आंकड़ा क्या है? ईवी आमतौर पर इतनी आसानी से आग क्यों पकड़ लेते हैं? इसके अलावा मौसम के बदलाव और तापमान का ईवी की आग से क्या संबंध है? क्या सरकार की तरफ से ईवी हादसों की जांच और आगे हादसे रोकने से जुड़े दिशा-निर्देश भी बनाए गए हैं? आइये जानते हैं...

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की घटनाओं के क्या आंकड़े?

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के इलेक्ट्रॉनिक डिटेल एक्सीडेंट रिपोर्ट (eDAR) पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों यानी 2023 से 2025 में देश भर में इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी कुल 23,865 दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन कुल दुर्घटनाओं में से इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की महज 26 घटनाएं दर्ज हुई हैं।

 

इन आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर दिन ईवी से जुड़ी औसतन करीब 25 दुर्घटनाएं दर्ज होती हैं। वहीं, आग लगने की घटनाओं के औसतन महज तीन केस ही दर्ज हुए हैं।

इसके अलावा, कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2026 में भी इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की घटनाएं दर्ज हुई हैं। इनमें फरवरी में यूपी के हापुड़ में एक ईवी में आग लगने की घटना सामने आई थी, जिसमें कंपनी ने बैटरी की खराबी से इनकार किया था। इसी तरह जनवरी में गाजियाबाद में एक ईवी में आग लगने की घटना प्रमुख थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस घटना में ईवी में आग चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट के बाद लगी थी। 



इसके अलावा 2025 में दिल्ली के शहादरा में ई-व्हीकल के चार्जिंग पॉइंट में आग लगने से कई ई-रिक्शा जल गए थे। ऐसी ही कुछ घटनाएं लगभग हर वर्ष देखी जाती रही हैं। खास बात यह है कि ईवी में आग की अधिकतर घटनाएं इनके चार्जिंग में लगे होने के दौरान हुईं। इन चार-पहिया वाहनों से लेकर दो-पहिया तक के जलने की घटनाएं शामिल हैं।

क्यों इलेक्ट्रिक वाहनों में अचानक लग जाती है आग?

मौजूदा समय में इलेक्ट्रिक वाहनों में आधुनिक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) होता है, जो कार के फुल चार्ज होने पर ऑटोमैटिक रूप से पावर सप्लाई को काट देता है, इसलिए तकनीकी रूप से इन्हें सुरक्षित माना जाता है। इसके बावजूद अचानक आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। इसकी एक वजह बैटरी की खराब क्वालिटी या चार्जिंग इन्फ्रास्ट्र्क्चर की खराबी हो सकता है। 

1. क्या गर्मी से लग सकती है ईवी में आग?

अक्सर लोग मानते हैं कि गर्मियों के अधिक तापमान के कारण ईवी में आग लगती है, लेकिन विशेषज्ञ इसे एक गलतफहमी मानते हैं। असल में, 99% बैटरी की आग शॉर्ट सर्किट के कारण होती है। शॉर्ट सर्किट से अनियंत्रित करंट बहता है और बैटरी के सेल का तापमान 100°C से ऊपर चला जाता है। इस स्थिति को 'थर्मल रनअवे' कहते हैं। इस स्थिति में बैटरी अपने आप और ज्यादा गर्म होने लगती है और आग बेकाबू हो जाती है, जिससे धमाके और जहरीली गैसें निकल सकती हैं।

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2. क्या बैटरी की खराबी हो सकती है वजह?

बैटरी में शॉर्ट सर्किट होने की एक अहम वजह सेल क्वालिटी का खराब होना, बैटरी का कमजोर डिजाइन और खराब बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम हो सकता है, जहां सॉफ्टवेयर सही तरीके से बैटरी सेल्स को मैनेज नहीं कर पाता। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कुछ निर्माता उत्पादों के डिजाइन पर पर्याप्त समय नहीं दे रहे हैं।

3. और क्या हो सकती हैं ईवी में आग लगने की वजह?

ईवी मालिक अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां करते हैं जो बड़े हादसों का कारण बनती हैं। कई बार वे साधारण एक्सटेंशन कॉर्ड का इस्तेमाल करते हैं जो लगातार 15 एम्पियर (15A) या उससे ज्यादा का भारी लोड नहीं झेल पाते और पिघल जाते हैं। इसके अलावा बिना प्रॉपर अर्थिंग वाले सॉकेट का इस्तेमाल करने से शॉर्ट सर्किट का करंट सीधे कार या चार्जर को नुकसान पहुंचा सकता है, जो कि आग का कारण बनता है। 

जानकारों के मुताबिक, अगर प्लग सॉकेट में ढीला रहता है तो वहां स्पार्किंग होती है, जो धीरे-धीरे प्लग को जला देती है। इसके अलावा वाहन निर्माता कंपनियों की ओर से दिए गए चार्जर की जगह सस्ते और लोकल चार्जर का इस्तेमाल करना भी आग लगने का एक बड़ा कारण है। 

दुनियाभर में ईवी में आग लगने की एक बड़ी वजह यह भी रही है कि लंबे समय तक चलने के तुरंत बाद बैटरी के सेल गर्म रहते हैं। ऐसे में बिना बैटरी को ठंडा होने का समय दिए उसे तुरंत चार्जिंग पर लगा देना जोखिम भरा हो सकता है और आग की वजह बन सकता है। 

चार्जिंग पॉइंट की खराबी का ईवी हादसों पर क्या असर?

इंदौर की घटना में चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट को ईवी में आग लगने का कारण माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, शॉर्ट सर्किट से पैदा हुई चिंगारी ईवी तक पहुंच गई और इससे इलेक्ट्रिक कार जल उठी। आइबेरिया में अलायंज कमर्शियल के अधिकारी राफेल रिओबो के मुताबिक, किसी ईवी के जीवन में सबसे ज्यादा जोखिम भरा समय उसकी ड्राइविंग नहीं, बल्कि चार्जिंग का समय होता है। 

एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत मामलों में आग कार की बैटरी से नहीं, बल्कि दीवार के सॉकेट, पुरानी वायरिंग या खराब एक्सटेंशन कॉर्ड से शुरू होती है। लगातार कई घंटों तक हाई-वोल्टेज करंट बहने की वजह से घर के कमजोर तार गर्म होकर पिघल जाते हैं, जो शॉर्ट सर्किट का बड़ा कारण बनता है। हाल ही में गाजियाबाद में हुए एक हादसे में भी आग कार की बैटरी से नहीं, बल्कि चार्जिंग पॉइंट में हुए इलेक्ट्रिकल फॉल्ट के कारण लगी थी।

क्या सरकार की तरफ से इससे जुड़े दिशा-निर्देश भी बनाए गए हैं?

इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की लगातार घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए सरकार द्वारा कई कड़े दिशा-निर्देश और सुरक्षा मानक स्थापित किए हैं। इसके अलावा सरकार की ओर से राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, ईवी के साथ हुए हादसों को लेकर जांच भी बिठाई गई हैं। 

नए और सख्त बैटरी सुरक्षा मानक 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ईवी हादसों के मूल कारणों की जांच के लिए डीआरडीओ, आईआईएससी और एनएसटीएल के विशेषज्ञों की एक टीम गठित करने की जानकारी दी थी। इस समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स में बड़े बदलाव किए हैं। इसके तहत दोपहिया और चौपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की ट्रैक्शन बैटरी और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम के लिए एआईएस:156 और एआईएस:038 (रेव 2) जैसे सख्त तकनीकी मानक लागू किए गए हैं, जो 1 दिसंबर 2022 से प्रभावी हो चुके हैं।

कन्फॉर्मिटी ऑफ प्रोडक्शन (सीओपी) के नियम

सभी श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों (जिनमें दोपहिया, चौपहिया, ई-रिक्शा और क्वाड्रिसाइकिल शामिल हैं) के निर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 19 दिसंबर 2022 को कन्फॉर्मिटी ऑफ प्रोडक्शन से जुड़ी एक नई अधिसूचना भी जारी की है।
 

कंपनियों पर कार्रवाई और रिकॉल के निर्देश

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अलग-अलग मौकों पर स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरतने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और खराब या दोषपूर्ण वाहनों को वापस मंगाने के आदेश दिए जाएंगे। 


घर के बाहर न बनाएं चार्जिंग पॉइंट
इस बीच इंदौर के विद्युत सलाहकार दिलीप धारकर ने कहा कि कभी भी घर के बाहर ईवी चार्जिंग पॉइंट नहीं रखना चाहिए। क्योंकि बैटरी चार्ज करने के लिए आमतौर पर घरों में 3 केवी चार्जर लगता है। चार्जिंग के दौरान कई बार पॉइंट के वायर गर्म होते हैं और शॉर्ट सर्किट का खतरा रहता है। बाहर सर्किट होने से सीधे धूप पॉइंट पर आती है। इसके अलावा पेड़-पौधों में पानी देते समय यदि पॉइंट में पानी घुस जाता है तो भी सर्किट होने या करंट लगने का खतरा रहता है। 


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