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US-Iran War: दिल्ली में 5000 करोड़ का व्यापार प्रभावित होने का अनुमान, छोटे दुकानदारों पर सबसे ज्यादा चोट

डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Asmita Tripathi Updated Wed, 18 Mar 2026 05:22 PM IST
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सार

ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण केवल गैस सेवाएं ही नहीं प्रभावित हुई हैं, बल्कि इससे शहर के विभिन्न क्षेत्रों के व्यापार पर भी गहरा असर पड़ा है। कमर्शियल गैस की उपलब्धता सीमित किए जाने के कारण बड़े होटलों-रेस्टोरेंट में सेवाएं सीमित की गई हैं।

US-Iran War: Business worth Rs 5,000 crore estimated to be affected in Delhi, small shopkeepers worst hit
अमेरिका-ईरान - फोटो : Freepik
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विस्तार

ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण केवल गैस सेवाएं ही नहीं प्रभावित हुई हैं, बल्कि इससे शहर के विभिन्न क्षेत्रों के व्यापार पर भी गहरा असर पड़ा है। कमर्शियल गैस की उपलब्धता सीमित किए जाने के कारण बड़े होटलों-रेस्टोरेंट में सेवाएं सीमित की गई हैं। रेहड़ी-पटरी पर कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ी हैं। इनका असर होटल-बैंक्वेट हॉल की बुकिंग पर भी पड़ा है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि ईरान-अमेरिका युद्ध जल्द समाप्त नहीं होता है तो इससे अकेले दिल्ली के व्यापारियों को 5000 करोड़ का नुकसान हो सकता है। 
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केंद्र और राज्य सरकारें लगातार इस बात के लिए आश्वासन दे रही हैं कि गैस की उपलब्धता में कोई कमी नहीं है और लोग घबराहट में ज्यादा खरीद (पैनिक बाईंग) न करें। गैस की होर्डिंग कर कालाबाजारी करने वाले अनेक लोगों पर कार्रवाई भी की गई है। होर्मुज के रास्ते गैस के जहाज भारत पहुंचने के समाचार से भी लोगों को राहत मिली है, लेकिन इसके बाद भी युद्ध के 19वें दिन भी कुकिंग गैस की सामान्य सप्लाई अब तक सुनिश्चित नहीं हो पाई है। 
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लोगों का दावा है कि ब्लैक मार्केट में सामान्य घरेलू सिलेंडर तीन हजार रुपये और कमर्शियल सिलेंडर पांच हजार रुपये तक में उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन छोटे व्यापारियों का कहना है कि इस कीमत पर गैस खरीद कर वे कोई मुनाफा नहीं कमा सकते, ऐसे में उन्होंने अपनी दुकानें बंद करना ही बेहतर समझा है। व्यापारियों की संस्था सीटीआई का दावा है कि अनेक क्षेत्रों में 20 से 30 प्रतिशत दुकानें या तो बंद हो गई हैं, या उन्हें अपना कामकाज सीमित करना पड़ा है।

दिहाड़ी श्रमिकों-गरीबों को न गैस मिल रही, न भोजन
गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर दिल्ली के उन लाखों श्रमिकों और अन्य गरीब वर्ग को उठाना पड़ रहा है जो दस्तावेजों में कमी के कारण गैस का वैध कनेक्शन नहीं ले पाते, और अपनी आवश्यकता के लिए नजदीकी बाजार एक-दो किलो की गैस रिफिलिंग पर निर्भर करते हैं। ऐसे दिहाड़ी श्रमिकों को न गैस मिल पा रही है, और न ही वे छोटे होटलों-रेस्टोरेंट में खा पा रहे हैं। इनमें से अनेक श्रमिक होटल-ढाबों और बैंक्वेट हॉल में ही काम करते थे, लेकिन इनका कामकाज प्रभावित होने के कारण इन्हें कामकाज मिलना भी मुश्किल हो गया है।    

इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर 
मध्य पूर्व के प्रमुख देशों से ड्राई फ्रूट का बड़ी मात्रा में आयात होता है तो इन देशों को भारतीय मसालों का निर्यात भी होता है। लेकिन ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण मध्य पूर्व के अनेक देशों में तनावपूर्ण स्थिति बन गई है। इससे भारत से होने वाला व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।  इसके चलते दिल्ली के चांदनी चौक, खारी बावली, भागीरथ प्लेस, कश्मीरी गेट और सदर बाजार जैसे बाजारों में व्यापारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। 

व्यापारियों और उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि यदि यह युद्ध आगे भी जारी रहता है तो इससे दिल्ली के व्यापार और उद्योग जगत में 5000 करोड़ रुपए का व्यापार प्रभावित हो सकता है। ईरान के पिस्ता, आलूबुखारा, किशमिश, अंजीर, खजूर, मामरा जैसे सूखे मेवों के दाम 30-40% तक बढ़ चुके हैं। दवाएं और कपड़ा निर्यात पर भी गहरा असर पड़ा है। 

इन दवाओं के कच्चे माल की कीमत बढ़ी
सीटीआई ने दावा किया है कि दवाओं के लिए कच्चे माल, केमिकल कंपोनेंट, प्लास्टिक और एलुमिनियम की कीमतों में तेजी आई है। इसका असर दवा कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है। पेरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत भी करीब 47% तक बढ़ गई है। दर्द निवारक डाइक्लोफेनेक में 54%, डाइक्लोफेनिक पोटेशियम में 33%, अमोक्सिसिलिन ट्राइहाइड्रेट में 45% और सिप्रोफ्लाक्सासिन की कीमत में करीब 60% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका असर आने वाले समय में दवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसका असर निर्यात में कमी के रूप में भी सामने आ सकता है।  
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