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Supreme Court: 'ED की छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी का दखल देना अच्छी स्थिति नहीं', सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Wed, 18 Mar 2026 06:13 PM IST
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सार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दखल को 'ठीक स्थिति नहीं' बताया और कहा कि केंद्रीय एजेंसियों के काम में बाधा नहीं आनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि ईडी जैसी एजेंसी को कार्रवाई में बाधा आने पर कानूनी उपाय से वंचित नहीं किया जा सकता। पढ़िए रिपोर्ट-
सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल से कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का दखल देना 'अच्छी स्थिति नहीं' है। आई-पैक कार्यालय में ईडी की छापेमारी को लेकर शीर्ष कोर्ट ने यह टिप्पणी की।
बार एंड बेंच के अनुसार, जस्टिस पंकज मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसी के काम में बाधा आने पर उसे बिना किसी उपाय के नहीं छोड़ा जा सकता। बेंच की यह टिप्पणी उस समय आई, जब पश्चिम बंगाल की ओर से यह दलील दी गई कि कोई केंद्रीय एजेंसी संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकती।
सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की ओर से वकील श्याम दीवान पेश हुए। उन्होंने कहा, ईडी कोई अलग कानूनी इकाई नहीं है, यह केवल सरकार का एक विभाग है। इसकी अपनी कोई अलग पहचान नहीं है। लाइव लॉ के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई मौलिक अधिकार लागू ही नहीं होता, तो अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर नहीं की जा सकती।
सीएम ममता बनर्जी के वकील ने क्या दलील दी?
वकील दीवान ने दलील दी कि अगर ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों को अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई, तो यह संघीय ढांचे के लिए 'खतरनाक उदाहरण' बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा होने पर सांविधानिक व्यवस्था में मौजूद संतुलन और नियंत्रण की प्रक्रिया पूरी तरह दरकिनार हो जाएगी और एक विभाग दूसरे के खिलाफ इस अनुच्छेद का इस्तेमाल करने लगेगा।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने क्या कहा?
वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी कहा कि ईडी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए नहीं कह सकती। सिब्बल ने कहा, ईडी सीबीई से जांच कराने के लिए नहीं कह सकती, जब तक कोई मूल अपराध दर्ज नहीं होता, ईडी मामले में नहीं आ सकती और न ही वह मौलिक अधिकार के नाम पर सीबीआई से प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए याचिका दायर कर सकती है।
ये भी पढ़ें: पश्चिम एशिया संकट: पीएम मोदी ने कुवैत के क्राउन प्रिंस से की बात, क्षेत्र में शांति और होर्मुज पर चर्चा हुई
मामले की पृष्ठभूमि क्या है?
जनवरी में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आई-पैक के निदेशक प्रतीक जैन के घर पहुंच गई थीं, जब ईडी इस राजनीतिक परामर्श फर्म पर छापेमारी कर रही थी। केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, बनर्जी छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण स्थानों पर पहुंचीं और जांच में बाधा डाली, साथ ही दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे अहम सबूत अपने साथ ले गईं। ममता बनर्जी ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा है कि केंद्रीय एजेंसी केंद्र सरकार की 'राजनीतिक बदले की भावना' के तहत काम कर रही है।
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बार एंड बेंच के अनुसार, जस्टिस पंकज मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसी के काम में बाधा आने पर उसे बिना किसी उपाय के नहीं छोड़ा जा सकता। बेंच की यह टिप्पणी उस समय आई, जब पश्चिम बंगाल की ओर से यह दलील दी गई कि कोई केंद्रीय एजेंसी संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकती।
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सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की ओर से वकील श्याम दीवान पेश हुए। उन्होंने कहा, ईडी कोई अलग कानूनी इकाई नहीं है, यह केवल सरकार का एक विभाग है। इसकी अपनी कोई अलग पहचान नहीं है। लाइव लॉ के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई मौलिक अधिकार लागू ही नहीं होता, तो अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर नहीं की जा सकती।
सीएम ममता बनर्जी के वकील ने क्या दलील दी?
वकील दीवान ने दलील दी कि अगर ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों को अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई, तो यह संघीय ढांचे के लिए 'खतरनाक उदाहरण' बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा होने पर सांविधानिक व्यवस्था में मौजूद संतुलन और नियंत्रण की प्रक्रिया पूरी तरह दरकिनार हो जाएगी और एक विभाग दूसरे के खिलाफ इस अनुच्छेद का इस्तेमाल करने लगेगा।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने क्या कहा?
वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी कहा कि ईडी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए नहीं कह सकती। सिब्बल ने कहा, ईडी सीबीई से जांच कराने के लिए नहीं कह सकती, जब तक कोई मूल अपराध दर्ज नहीं होता, ईडी मामले में नहीं आ सकती और न ही वह मौलिक अधिकार के नाम पर सीबीआई से प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए याचिका दायर कर सकती है।
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मामले की पृष्ठभूमि क्या है?
जनवरी में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आई-पैक के निदेशक प्रतीक जैन के घर पहुंच गई थीं, जब ईडी इस राजनीतिक परामर्श फर्म पर छापेमारी कर रही थी। केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, बनर्जी छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण स्थानों पर पहुंचीं और जांच में बाधा डाली, साथ ही दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे अहम सबूत अपने साथ ले गईं। ममता बनर्जी ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा है कि केंद्रीय एजेंसी केंद्र सरकार की 'राजनीतिक बदले की भावना' के तहत काम कर रही है।
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