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Chhattisgarh News: रामकृष्ण केयर अस्पताल में बड़ा हादसा, तीन लोगों की हुई मौत, जानें पूरा मामला
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Wed, 18 Mar 2026 10:16 AM IST
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सार
Ramakrishna Care Hospital Raipur Accident News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित रामकृष्ण अस्पताल में मंगलवार की देर रात दर्दनाक हादसा देखने को मिला।
ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल
- फोटो : Amar ujala digital
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विस्तार
Ramakrishna Care Hospital Raipur Accident News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित रामकृष्ण केयर अस्पताल में मंगलवार की देर रात दर्दनाक हादसा देखने को मिला। यहां के सिवरेज टैंक में सफाई करने उतरे तीन लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद लोगों में काफी आक्रोश है। परिजन दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर मामले की जांच कर रही है। प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रोते-बिलखते रहे परिजन
इस घटना के बाद मृतक के परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा। अस्पताल के गेट पर मृतकों के परिजन और पुलिसकर्मियों के बीच जमकर झूमाझटकी हुई। हंगामा करते हुए परिजन अस्पताल के अंदर घुस गए। इस दौरान परिजन रोते-बिलखते रहे। बताया जाता है कि हॉस्पिटल के सिवरेज टैंक की सफाई के लिए तीन स्वीपर टैंक के अंदर उतरे थे। इस दौरान टैंक के अंदर जहरीली गैस होने की वजह से एक-एक कर तीनों स्वीपर की हालत बिगड़ने से मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी सुरक्षा उपकरण के ही मजदूरों को सिवरेज टैंक में सफाई करने के लिए उतारा गया। अस्पताल प्रबंधन ने खर्चा बचाने के लिए नियमों की घोर अनदेखी की। ट्रेंड मजदूरों की बजाय अनट्रेंड मजदूरों को सफाई करने के लिए उतारा गया। ऐसे में साफ जाहिर है कि यदि नियमों का पालन किया गया होता, तो इतना बड़ा हादसा होने से टाला जा सकता था।
इनकी हुई मौत
परिजनों का आरोप
अस्पताल प्रबंधन पर मामले को छिपाने के आरोप लग रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने अभी तक किसी भी व्यक्ति ने बात नहीं की है। मामले में जमकर लापरवाही बरती जा रही है। घटना की जांच कराई जानी चाहिये।
50 फीट गहरे सेप्टिक टैंक में उतरे थे स्वीपर
बताया जाता है कि 50 फीट गहरे सेप्टिक टैंक में तीन मजूदरों को उतारा गया था। सुरक्षा के नाम पर उन्हें केवल मास्क ही दिया गया था। सिमरन सिटी निवासी सफाईकर्मी गोविंद सेंद्रे, अनमोल मचकन और प्रशांत कुमार जब टैंक के अंदर उतरे, तो उस दौरान टैंक के अंदर जहरीली गैस होने से उनका दम घुटने लगा और मौके पर उनकी मौत हो गई।
देर रात तक हंगामा
सफाईकर्मियों के मौत की सूचना जैसे ही परिजनों की मिली। वे तुरंत अस्पताल पहुंचकर जमकर हंगामा किया। समय पर शव नहीं मिलने से अस्पताल में तनाव की स्थिति रही। परिजन अस्पताल के गेट पर बैठ गये। सुरक्षा के लिहाज से बाद में पुलिस को बुलानी पड़ी तब जाकर किसी तरह से लोगों का गुस्सा शांत हुआ।
सुरक्षा मानकों में बरती लापरवाही
सेप्टिक टैंक की सफाई आमतौर पर नगर निगम या प्रशिक्षित कर्मियों से आधुनिक उपकरणों के साथ कराया जाता है। सुरक्षा उपकरणों में गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन मास्क और अन्य उपकरण शामिल होते हैं, लेकिन इन सभी उपकरणों को दरकिनार कर सफाईर्मियों को टैंक में जाने दिया गया। कुल मिलाकर अस्पताल प्रबंधन ने खर्च बचाने के लिए सुरक्षा नियमों को लेकर भारी लापरवाही बरती।
रायपुर में एक साल पहले भी हुआ था हादसा
करीब एक साल पहले भी राजधानी के रायपुरा स्थित अशोका बिरयानी में भी इस तरह का हादसा हुआ था, जिसमें सेप्टिक टैंक में उतरने से दो लोगों की मौत हो गई थी। बाद में होटल प्रबंधन ने मुआवजा राशि देकर मामले का निपटारा किया था। वहीं होटल पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई भी की थी।
कांग्रेस ने उठाये सवाल
मामले में कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने ट्वीट कर कहा कि रामकृष्ण हास्पिटल जो अपने चिकित्सक नर्सिंग स्टाफ को मास्क सुरक्षा कवच के बिना आईसीयू एवं अन्य मरीजों की देखरेख करने नहीं देता। मरीजों के परिजनों को बिना सुरक्षा मिलने नहीं देता, वो सफाईकर्मियों को बिना सुरक्षा कवच के सेफ्टिक टैंक सफाई करने टैंक में कैसे उतार दिया? क्या सफाई कर्मियों की जीवन का कोई मोल नहीं? जब सेफ्टिक टैंक सफाई की आधुनिक मशीने हैं फिर उसका उपयोग क्यों नहीं किया गया? सफाईकर्मियों की मौत के लिए रामकृष्ण प्रबंधन पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिये। सफाईकर्मियों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाये। सरकार यह सुनिश्चित करें कि सेफ्टिक टैंक की सफाई आधुनिक मशीनों से ही हो ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो।
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रोते-बिलखते रहे परिजन
इस घटना के बाद मृतक के परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा। अस्पताल के गेट पर मृतकों के परिजन और पुलिसकर्मियों के बीच जमकर झूमाझटकी हुई। हंगामा करते हुए परिजन अस्पताल के अंदर घुस गए। इस दौरान परिजन रोते-बिलखते रहे। बताया जाता है कि हॉस्पिटल के सिवरेज टैंक की सफाई के लिए तीन स्वीपर टैंक के अंदर उतरे थे। इस दौरान टैंक के अंदर जहरीली गैस होने की वजह से एक-एक कर तीनों स्वीपर की हालत बिगड़ने से मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
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घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी सुरक्षा उपकरण के ही मजदूरों को सिवरेज टैंक में सफाई करने के लिए उतारा गया। अस्पताल प्रबंधन ने खर्चा बचाने के लिए नियमों की घोर अनदेखी की। ट्रेंड मजदूरों की बजाय अनट्रेंड मजदूरों को सफाई करने के लिए उतारा गया। ऐसे में साफ जाहिर है कि यदि नियमों का पालन किया गया होता, तो इतना बड़ा हादसा होने से टाला जा सकता था।
इनकी हुई मौत
- गोविंद सेंद्रे
- अनमोल मचकन
- प्रशांत कुमार, तीनों सिमरन सिटी निवासी
परिजनों का आरोप
अस्पताल प्रबंधन पर मामले को छिपाने के आरोप लग रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने अभी तक किसी भी व्यक्ति ने बात नहीं की है। मामले में जमकर लापरवाही बरती जा रही है। घटना की जांच कराई जानी चाहिये।
50 फीट गहरे सेप्टिक टैंक में उतरे थे स्वीपर
बताया जाता है कि 50 फीट गहरे सेप्टिक टैंक में तीन मजूदरों को उतारा गया था। सुरक्षा के नाम पर उन्हें केवल मास्क ही दिया गया था। सिमरन सिटी निवासी सफाईकर्मी गोविंद सेंद्रे, अनमोल मचकन और प्रशांत कुमार जब टैंक के अंदर उतरे, तो उस दौरान टैंक के अंदर जहरीली गैस होने से उनका दम घुटने लगा और मौके पर उनकी मौत हो गई।
देर रात तक हंगामा
सफाईकर्मियों के मौत की सूचना जैसे ही परिजनों की मिली। वे तुरंत अस्पताल पहुंचकर जमकर हंगामा किया। समय पर शव नहीं मिलने से अस्पताल में तनाव की स्थिति रही। परिजन अस्पताल के गेट पर बैठ गये। सुरक्षा के लिहाज से बाद में पुलिस को बुलानी पड़ी तब जाकर किसी तरह से लोगों का गुस्सा शांत हुआ।
सुरक्षा मानकों में बरती लापरवाही
सेप्टिक टैंक की सफाई आमतौर पर नगर निगम या प्रशिक्षित कर्मियों से आधुनिक उपकरणों के साथ कराया जाता है। सुरक्षा उपकरणों में गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन मास्क और अन्य उपकरण शामिल होते हैं, लेकिन इन सभी उपकरणों को दरकिनार कर सफाईर्मियों को टैंक में जाने दिया गया। कुल मिलाकर अस्पताल प्रबंधन ने खर्च बचाने के लिए सुरक्षा नियमों को लेकर भारी लापरवाही बरती।
रायपुर में एक साल पहले भी हुआ था हादसा
करीब एक साल पहले भी राजधानी के रायपुरा स्थित अशोका बिरयानी में भी इस तरह का हादसा हुआ था, जिसमें सेप्टिक टैंक में उतरने से दो लोगों की मौत हो गई थी। बाद में होटल प्रबंधन ने मुआवजा राशि देकर मामले का निपटारा किया था। वहीं होटल पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई भी की थी।
कांग्रेस ने उठाये सवाल
मामले में कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने ट्वीट कर कहा कि रामकृष्ण हास्पिटल जो अपने चिकित्सक नर्सिंग स्टाफ को मास्क सुरक्षा कवच के बिना आईसीयू एवं अन्य मरीजों की देखरेख करने नहीं देता। मरीजों के परिजनों को बिना सुरक्षा मिलने नहीं देता, वो सफाईकर्मियों को बिना सुरक्षा कवच के सेफ्टिक टैंक सफाई करने टैंक में कैसे उतार दिया? क्या सफाई कर्मियों की जीवन का कोई मोल नहीं? जब सेफ्टिक टैंक सफाई की आधुनिक मशीने हैं फिर उसका उपयोग क्यों नहीं किया गया? सफाईकर्मियों की मौत के लिए रामकृष्ण प्रबंधन पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिये। सफाईकर्मियों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाये। सरकार यह सुनिश्चित करें कि सेफ्टिक टैंक की सफाई आधुनिक मशीनों से ही हो ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो।