{"_id":"6a759740319c8014df02a148","slug":"due-to-jobs-and-other-demands-not-being-fulfilled-in-exchange-for-land-affected-villagers-shut-down-the-ash-dykethere-is-strong-anger-among-villagers-management-accused-of-arbitrariness-korba-news-c-1-1-noi1487-4585358-2026-08-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Korba: जमीन के बदले 15 साल बाद भी नौकरी नहीं, भड़के प्रभावित ग्रामीणों ने राखड़ डैम कराया बंद, दिया धरना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Korba: जमीन के बदले 15 साल बाद भी नौकरी नहीं, भड़के प्रभावित ग्रामीणों ने राखड़ डैम कराया बंद, दिया धरना
Fri, 07 Aug 2026 03:37 PM IST
कोरबा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: कोरबा ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2026 03:37 PM IST
सार
राखड़ डैम के लिए जमीन गंवाने वाले प्रभावित परिवारों ने रोजगार के मुद्दे पर आंदोलन शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि 2010 में 308 प्रभावित परिवारों के पात्र सदस्यों को नियमित नौकरी देने की घोषणा के बावजूद कई परिवार आज भी रोजगार से वंचित हैं।
विज्ञापन
भड़के प्रभावित ग्रामीणों ने राखड़ डैम कराया बंद
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरबा जिले में राखड़ बांध के लिए जमीन देने वाले प्रभावित परिवारों का लंबे समय से चला आ रहा रोजगार का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। नियमित नौकरी की मांग को लेकर प्रभावित ग्रामीण शुक्रवार को राखड़ डैम पंडोपानी पहुंचे और कामकाज बंद कराते हुए धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के करीब 15 साल बाद भी उन्हें घोषित वादे के मुताबिक नियमित रोजगार नहीं मिल सका है।
ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 2007 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह, कोरबा पूर्व के राखड़ बांध के निर्माण के लिए उनकी पैतृक जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इसके बाद 29 नवंबर 2010 को तत्कालीन मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत 308 प्रभावित परिवारों के एक-एक पात्र सदस्य को CSPGCL में नियमित पद पर नियुक्ति देने की बात कही गई थी।
प्रभावितों का कहना है कि इस संबंध में संचालक मंडल से भी स्वीकृति मिली थी। इसके बावजूद अब तक सभी परिवारों को नियमित नौकरी नहीं मिल सकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि 308 प्रभावित परिवारों में से आधे से अधिक को ही रोजगार मिल पाया है, जबकि बाकी परिवारों को नियमित नियुक्ति के बजाय तीन साल की संविदा पर नौकरी देने की बात कही जा रही है।
विज्ञापन
उनके मुताबिक संविदा में हर वर्ष अनुबंध के नवीनीकरण की शर्त है और तीन साल की अवधि पूरी होने के बाद नियमित नियुक्ति की कोई गारंटी नहीं है। प्रभावित परिवार इसे वर्ष 2010 में किए गए रोजगार संबंधी वादे के विपरीत बता रहे हैं। प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2007 में अधिग्रहित की गई जमीन उनके परिवारों की आय का प्रमुख साधन थी। भूमि चले जाने के बाद उन्हें रोजगार के रूप में स्थायी सहारा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वर्षों बीतने के बाद भी उनकी मांग पूरी नहीं हुई।
ग्रामीणों के मुताबिक पहले से नौकरी पा चुके प्रभावित परिवारों की तरह उन्हें भी नियमित पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर उन्होंने संविदा नौकरी स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
प्रभावित परिवारों ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए 7 अगस्त से राखड़ डैम पंडोपानी में अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी थी। निर्धारित तारीख पर ग्रामीण बड़ी संख्या में डैम पहुंचे और काम बंद कराते हुए धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले 15 वर्षों में कई बार अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए और बैठकों के जरिए समस्या के समाधान की मांग की गई, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकला। ग्रामीणों ने संकेत दिया है कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
रोजगार के साथ प्रभावित ग्रामीणों ने अपने गांवों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि प्रभावित भू-विस्थापित गांवों में बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति ठीक नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के समय पुनर्वास और रोजगार के साथ बेहतर सुविधाओं का भरोसा दिया गया था, लेकिन लंबे समय बाद भी कई समस्याएं बनी हुई हैं।
प्रभावित परिवारों की प्रमुख मांग है कि वर्ष 2010 में की गई घोषणा के अनुरूप पात्र प्रभावित परिवारों के एक-एक सदस्य को नियमित पद पर नियुक्त किया जाए। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि केवल संविदा रोजगार या नए आश्वासन से अब बात नहीं बनेगी। उनका कहना है कि वर्षों से लंबित मांग पर अब निर्णायक कार्रवाई जरूरी है। जब तक नियमित नियुक्ति का रास्ता साफ नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी गई है।
विज्ञापन
ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 2007 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह, कोरबा पूर्व के राखड़ बांध के निर्माण के लिए उनकी पैतृक जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इसके बाद 29 नवंबर 2010 को तत्कालीन मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत 308 प्रभावित परिवारों के एक-एक पात्र सदस्य को CSPGCL में नियमित पद पर नियुक्ति देने की बात कही गई थी।
विज्ञापन
प्रभावितों का कहना है कि इस संबंध में संचालक मंडल से भी स्वीकृति मिली थी। इसके बावजूद अब तक सभी परिवारों को नियमित नौकरी नहीं मिल सकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि 308 प्रभावित परिवारों में से आधे से अधिक को ही रोजगार मिल पाया है, जबकि बाकी परिवारों को नियमित नियुक्ति के बजाय तीन साल की संविदा पर नौकरी देने की बात कही जा रही है।
विज्ञापन
उनके मुताबिक संविदा में हर वर्ष अनुबंध के नवीनीकरण की शर्त है और तीन साल की अवधि पूरी होने के बाद नियमित नियुक्ति की कोई गारंटी नहीं है। प्रभावित परिवार इसे वर्ष 2010 में किए गए रोजगार संबंधी वादे के विपरीत बता रहे हैं। प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2007 में अधिग्रहित की गई जमीन उनके परिवारों की आय का प्रमुख साधन थी। भूमि चले जाने के बाद उन्हें रोजगार के रूप में स्थायी सहारा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वर्षों बीतने के बाद भी उनकी मांग पूरी नहीं हुई।
ग्रामीणों के मुताबिक पहले से नौकरी पा चुके प्रभावित परिवारों की तरह उन्हें भी नियमित पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर उन्होंने संविदा नौकरी स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
प्रभावित परिवारों ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए 7 अगस्त से राखड़ डैम पंडोपानी में अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी थी। निर्धारित तारीख पर ग्रामीण बड़ी संख्या में डैम पहुंचे और काम बंद कराते हुए धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले 15 वर्षों में कई बार अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए और बैठकों के जरिए समस्या के समाधान की मांग की गई, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकला। ग्रामीणों ने संकेत दिया है कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
रोजगार के साथ प्रभावित ग्रामीणों ने अपने गांवों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि प्रभावित भू-विस्थापित गांवों में बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति ठीक नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के समय पुनर्वास और रोजगार के साथ बेहतर सुविधाओं का भरोसा दिया गया था, लेकिन लंबे समय बाद भी कई समस्याएं बनी हुई हैं।
प्रभावित परिवारों की प्रमुख मांग है कि वर्ष 2010 में की गई घोषणा के अनुरूप पात्र प्रभावित परिवारों के एक-एक सदस्य को नियमित पद पर नियुक्त किया जाए। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि केवल संविदा रोजगार या नए आश्वासन से अब बात नहीं बनेगी। उनका कहना है कि वर्षों से लंबित मांग पर अब निर्णायक कार्रवाई जरूरी है। जब तक नियमित नियुक्ति का रास्ता साफ नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी गई है।