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Korba: जगन्नाथ यात्रा की तैयारी हुई पूरी, 125 साल की आस्था का प्रतीक भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा

Wed, 15 Jul 2026 09:43 PM IST
कोरबा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा Published by: कोरबा ब्यूरो Updated Wed, 15 Jul 2026 09:43 PM IST
सार

कोरबा जिले के दादरखुर्द में 125 वर्षों से चली आ रही आस्था की परंपरा एक बार फिर गूंजने को तैयार है। यहां 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा निकाली जाएगी।

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Preparations for the Jagannath Yatra are complete in Korba
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विस्तार

कोरबा जिले के दादरखुर्द में 125 वर्षों से चली आ रही आस्था की परंपरा एक बार फिर गूंजने को तैयार है। यहां 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा निकाली जाएगी। सदी से भी पुराना यह महापर्व आज भी लाखों श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा और लोककल्याण का केंद्र बना हुआ है। इस बार आयोजन को और भव्य बनाने के लिए मंदिर समिति, प्रशासन और स्थानीय लोगों ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

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 दादरखुर्द स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। पूरे मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी झालरों, फूलों और लाइटों से सजाया जा रहा है। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दिव्य श्रृंगार और वस्त्राभूषण की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पुजारी और सेवायत लगातार पूजा-अनुष्ठान में जुटे हैं ताकि यात्रा के दिन भगवान का स्वरूप सबसे आकर्षक दिखे।
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16 जुलाई की सुबह विशेष पूजा-अर्चना के बाद तीनों देवताओं को भव्य रथ पर विराजमान किया जाएगा। इसके बाद जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ रथ नगर भ्रमण के लिए निकलेगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं। रथ की रस्सी खींचना अत्यंत शुभ माना जाता है और मान्यता है कि जो भी भक्त रथ खींचता है उसे भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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मंदिर के मुख्य पुजारी श्री कुंज द्विवेदी ने बताया कि दादरखुर्द की रथयात्रा कोरबा जिले की सबसे पुरानी धार्मिक परंपराओं में से एक है। पिछले 125 वर्षों से यह यात्रा बिना किसी रुकावट के निकाली जा रही है। उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ को 'जगत के नाथ' कहा जाता है यानी वे पूरे संसार के पालनहार हैं। उनकी बड़ी-बड़ी आंखें इस बात का प्रतीक हैं कि वे हर जाति, वर्ग और समुदाय के भक्तों पर समान दृष्टि रखते हैं। इसी कारण इस रथयात्रा को समानता, सेवा और लोककल्याण का महापर्व भी कहा जाता है।


इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है। मंदिर समिति के साथ मिलकर पुलिस, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है। यात्रा मार्ग पर बैरिकेडिंग, पेयजल, चिकित्सा शिविर और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की गई है। यातायात को सुगम बनाने के लिए रूट डायवर्जन भी तय किया गया है। 125 वर्षों की यह परंपरा आज भी लोगों को एक सूत्र में बांध रही है। 16 जुलाई को दादरखुर्द एक बार फिर जय जगन्नाथ के जयकारों से गूंजेगा। भक्त भगवान को रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करते देख अपनी आस्था को और मजबूत करेंगे।

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