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Korba SECL: भठोरा फेस खदान बंद, उत्पादन-परिवहन कार्य ठप; ग्रामीण पुनर्वास और रोजगार की मांग पर अड़े

अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा Published by: कोरबा ब्यूरो Updated Mon, 13 Apr 2026 04:45 PM IST
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सार

एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के ग्राम नराईबोध के ग्रामीणों ने सोमवार सुबह 7 बजे से भठोरा फेस खदान को पूरी तरह बंद कर दिया। ग्राम पंचायत के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन के कारण खदान में उत्पादन और परिवहन कार्य ठप हो गया है।

SECL Gevra mine opposed by Naraibodh villagers over basic facilities
गेवरा खदान बंद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

 एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के ग्राम नराईबोध के ग्रामीणों ने सोमवार को भठोरा फेस का खदान बंद कर दिया है। यह कार्रवाई पुनर्वास, बसाहट और रोजगार जैसी मूलभूत मांगों को लेकर की गई है। ग्राम पंचायत के नेतृत्व में सुबह सात बजे से शुरू हुए इस आंदोलन से खदान में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में जिला प्रशासन, एसईसीएल प्रबंधन और ग्राम नराईबोध के बीच एक त्रिपक्षीय बैठक हुई थी। इस बैठक में कई अहम समझौतों पर सहमति बनी थी, लेकिन आज तक उन्हें लागू नहीं किया गया है। प्रभावित ग्रामीणों को उचित बसाहट स्थल और नागरिक सुविधाएं प्रदान करने का वादा किया गया था। छूटे हुए मकानों की जीपीएस के माध्यम से पारदर्शी नापी और उचित मुआवजा भी तय हुआ था।
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समझौते के अनुसार, आउटसोर्सिंग कंपनी पीएनसी में 70 फीसदी स्थानीय प्रभावित ग्रामीणों को प्राथमिकता के साथ रोजगार देना था। बसाहट स्थल पर लंबित विकास कार्यों को तत्काल शुरू करने की भी मांग है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल सांकेतिक विरोध नहीं है। यदि प्रबंधन और प्रशासन तत्काल ठोस निर्णय नहीं लेते हैं, तो पंद्रह अप्रैल दो हजार छब्बीस से खदान के समीप अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।

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प्रबंधन पर आरोप
पार्षद अमिला राकेश पटेल ने बताया कि प्रबंधन ने बार-बार केवल आश्वासन दिए हैं। धरातल पर कोई काम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सार्थक कार्रवाई नहीं होती, यह आंदोलन जारी रहेगा। किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन की होगी।

 

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समाचार लिखे जाने तक भठोरा फेस में उत्पादन और परिवहन प्रभावित रहा। मौके पर भारी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और युवा डटे हुए हैं। प्रशासन की ओर से अब तक कोई भी वरिष्ठ अधिकारी वार्ता के लिए नहीं पहुंचा है। इससे ग्रामीणों में रोष और बढ़ता जा रहा है।
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