Parliament LIVE: रिजिजू बोले- महिलाओं के अधिकार की लड़ाई जारी, संसद परिसर में NDA की महिला सांसदों का प्रदर्शन
Parliament LIVE Lok Sabha Rajya Sabha Proceedings Hindi Updates: संविधान में संशोधन के लिए पेश किए गए विधेयकों पर लगातार दो दिन चर्चा के बाद लोकसभा से पास नहीं हो सका। लोकसभा को कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित। गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में इन विधेयकों पर अपने विचार रखें। इससे पहले संसद के विशेष सत्र में पहले दिन की चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, असदुद्दीन ओवैसी, प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं ने अपने विचार रखे। अमर उजाला के इस लाइव ब्लॉग में पढ़ें संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही से जुड़े तमाम अपडेट्स
लाइव अपडेट
महिला आरक्षण के बहाने परिसीमन का आरोप, देश टूट जाएगा- ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को केंद्र की भाजपा नीत एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण कानून की आड़ में परिसीमन विधेयक लाया गया, जिससे देश टुकड़ों में बंट जाएगा। कूचबिहार में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी इस कदम का हर स्तर पर विरोध करेगी।ममता ने दावा किया कि लोकसभा में पेश 131वें संविधान संशोधन और परिसीमन विधेयक के जरिये 2029 से पहले महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी है। प्रस्ताव के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती है। उन्होंने इसे देश को तोड़ने की कोशिश बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि तृणमूल में पहले से ही 37% महिला सांसद हैं और भाजपा को भी इसी मॉडल को अपनाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर बंगाल के विकास पर गलत जानकारी दी जा रही है, जबकि उनकी सरकार ने इस क्षेत्र में 1.72 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने सितलकुची फायरिंग की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है, लेकिन लोकतंत्र में गोली नहीं, वोट काम करता है।
सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा- मनोज कुमार झा
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश हित से जुड़े सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है और सरकार या किसी भी पक्ष से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय हित और किसी राजनीतिक दल के हित को एक जैसा नहीं माना जा सकता।#WATCH | दिल्ली: RJD सांसद मनोज कुमार झा ने कहा, "क्या मैं देश हित में सवाल नहीं पूछ सकता? अमेरिकन डील भारत के हित में क्यों नहीं है? देश हित और सरकार हित एक चीज़ नहीं है... देश का सरोकार और किसी व्यक्ति का सरोकार एक चीज़ नहीं है..." pic.twitter.com/tQ0qIlpHQN
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 17, 2026
'सरकार का वास्तविक उद्देश्य कुछ और था'
कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि महिला आरक्षण के पीछे वास्तविक उद्देश्य कुछ और था। उनके अनुसार, इस विधेयक का उपयोग परिसीमन और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन से जुड़े राजनीतिक हित साधने के लिए किया जा रहा था, जिससे सत्ता संतुलन को प्रभावित किया जा सके।#WATCH दिल्ली: कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा, "वे महिला आरक्षण नहीं चाहते, वे महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन चाहते थे। वे निर्वाचन क्षेत्रों में अपने हिसाब से बांटना चाहते हैं जिससे उनकी सरकार बनी रहे।" pic.twitter.com/ofsIIDxUvF
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 17, 2026
आधी आबादी की अपेक्षाओं को नुकसान- धर्मेंद्र प्रधान
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी ने महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर नकारात्मक रवैया अपनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा, जिससे देश की आधी आबादी की अपेक्षाओं को नुकसान पहुंचा है।#WATCH | दिल्ली: केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संविधान संशोधन(131वां संशोधन) बिल के लोकसभा में पारित न होने पर कहा, "कांग्रेस पार्टी मानसिक रूप से दिवालिया हो चुकी है। कांग्रेस पार्टी ने अपने महिला विरोधी चरित्र को उजागर किया, SC, ST, OBC विरोधी मानसिकता को उजागर किया...… pic.twitter.com/Wp6P8JJ9pV
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 17, 2026
बेहद दुर्भाग्यपूर्ण- किरेन रिजिजू
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी देश में महिलाओं के अधिकारों से जुड़े विधेयक का विरोध किया जाए और उसे राजनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जाए, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि सरकार महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में आगे भी प्रयास जारी रहेंगे।विपक्ष ने इसे समर्थन नहीं दिया- राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए निराशाजनक है। उनके अनुसार, यह विधेयक महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में एक-तिहाई आरक्षण देने के उद्देश्य से लाया गया था, लेकिन विपक्ष के रुख ने इस प्रक्रिया को बाधित किया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की थी, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष ने इसे समर्थन नहीं दिया।यह सचमुच निंदनीय और कल्पना से परे- अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा से महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक के गिरने के बाद सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट में कहा 'आज लोकसभा में बहुत अजीब दृश्य दिखा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया। महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिरा देना, उसका उत्साह मनाना और जयनाद करना सचमुच निंदनीय और कल्पना से परे है।'उन्होंने लिखा 'अब देश की महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण, जो उनका अधिकार था, वह नहीं मिल पाएगा। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने यह पहली बार नहीं किया, बल्कि बार-बार किया है। उनकी यह सोच न महिलाओं के हित में है और न देश के। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि नारी शक्ति के अपमान की यह बात यहां नहीं रुकेगी, दूर तक जाएगी। विपक्ष को ‘महिलाओं का आक्रोश’ न सिर्फ 2029 लोकसभा चुनाव में, बल्कि हर स्तर, हर चुनाव और हर स्थान पर झेलना पड़ेगा।'
संसद परिसर में NDA की महिला सांसदों का प्रदर्शन
लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पारित नहीं हो पाने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। महिला आरक्षण से जुड़े इस विधेयक के असफल रहने पर सांसदों ने नाराजगी जताई और इसे महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।#WATCH | Delhi | Women NDA MPs protest in the Parliament premises after the Constitution (One Hundred and Thirty-First Amendment) Bill, 2026 fails to pass in Lok Sabha pic.twitter.com/xAT1xeyBLs
— ANI (@ANI) April 17, 2026
लोकसभा में 298 सांसदों ने पक्ष में किया मतदान
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक पर व्यापक चर्चा के बाद अब इस महत्वपूर्ण बिल पर शुक्रवार शाम को वोटिंग हुई। कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया, जिसमें 298 सांसदों ने इस विधेयक के समर्थन में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट डाला। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि यह विधेयक दो-तिहाई सदस्यों द्वारा पारित नहीं हो सका। अब इस संविधान संशोधन विधेयक पर आगे की कार्यवाही करना संभव नहीं है। दो अन्य विधेयकों के संबंध में आगे की कार्यवाही पर सत्ता पक्ष द्वारा निर्णय लिया जाना है।इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने से जुड़ा ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण विधेयक था। इसी पर यह नतीजा आया है। विपक्ष ने इसमें साथ नहीं दिया। बहुत खेद की बात है। आपने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया। महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने का हमारा अभियान जारी रहेगा और हम उन्हें अधिकार दिलाकर ही रहेंगे। जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा को कल (शनिवार) सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया है।
अमित शाह बोले- धर्म के आधार पर आरक्षण कभी नहीं देंगे
अमित शाह ने कहा 'भारतीय संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद इंडी अलायंस के दलों ने केवल अपनी राजनीति चमकाने के लिए देश में मुस्लिम आरक्षण की मांग की है। इस देश में यदि ओबीसी समाज की कोई सबसे बड़ी विरोधी पार्टी है, तो वह कांग्रेस है। इन्होंने चौधरी चरण सिंह और सीताराम केसरी जैसे नेताओं की मांगों को कभी पूरा नहीं किया। इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने हमेशा पिछड़ों के हितों को दबाया है।उन्होंने बताया '1950 के दशक में काका कालेलकर आयोग के सुझावों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। 1980 में जब इंदिरा जी सत्ता में आईं, तब मंडल आयोग के सुझावों को नकार दिया गया। 1990 में जब वीपी सिंह की सरकार आई, तब जाकर मंडल आयोग लागू हो सका।'
शाह ने कहा 'विपक्ष के तत्कालीन नेता नेहरू जी ने तो मंडल आयोग के विरोध में सदन में सबसे लंबा भाषण दिया था। कांग्रेस ने हमेशा जातिगत जनगणना का भी विरोध किया, लेकिन अब जब वे चुनाव हार रहे हैं, तो अचानक ओबीसी के हितैषी बनने का ढोंग कर रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने एक अति पिछड़े समाज के व्यक्ति को देश का प्रधानमंत्री बनाया है। मोदी सरकार में आज 27 मंत्री ओबीसी समुदाय से हैं, जो कुल मंत्रिमंडल का लगभग 40 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री मोदी ने ही ओबीसी आयोग को संवैधानिक मान्यता दी और राज्यों को ओबीसी सूची संशोधित करने का अधिकार पुनः प्रदान किया। मोदी सरकार ने अब तक 16 नई जातियों को ओबीसी श्रेणी में शामिल कर उन्हें न्याय दिलाया है।

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