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Korba News: एसईसीएल गेवरा में कल से भू-विस्थापितों का अनिश्चितकालीन धरना, ये हैं ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: कोरबा ब्यूरो
Updated Tue, 17 Mar 2026 02:45 PM IST
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सार
नाराज ग्रामीणों ने कल से गेवरा क्षेत्र में शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की घोषणा की है। सभी पात्र विस्थापितों को तत्काल स्थायी रोजगार, उचित बसाहट व मुआवजा का वितरण, और रुकी वैकल्पिक रोजगार प्रक्रिया को बहाल करने की मांग की है।
ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के ग्राम नरईबोध और दीपका तहसील के भू-विस्थापित ग्रामीणों ने प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की है। प्रबंधन द्वारा बसाहट मुआवजा और वैकल्पिक रोजगार के वादे पूरे न करने से ग्रामीण नाराज हैं। उन्होंने 18 मार्च यानी कल से गेवरा क्षेत्र में अनिश्चितकालीन धरने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया है।
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ग्रामीणों ने बताया कि पिछले माह वे अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। 08 मार्च 2026 को एस.ई.सी.एल. प्रबंधन ने लिखित आश्वासन दिया था। इसमें 3 लोगों को तुरंत वैकल्पिक रोजगार देने और बाकी लोगों का बी-फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू करने की बात थी।
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इस आश्वासन पर विश्वास कर ग्रामीणों ने अपना पिछला आंदोलन स्थगित कर दिया था। प्रभावित ग्रामीणों ने अब प्रबंधन पर झूठे आश्वासन देकर गुमराह करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पिछले दो-तीन महीनों से रोजगार के लिए लगातार टालमटोल किया जा रहा है। प्रबंधन ने वादा किए गए किसी भी बिंदु पर अमल नहीं किया है। इस वादाखिलाफी और तानाशाही रवैये से त्रस्त होकर ग्रामीण फिर से आंदोलन के लिए बाध्य हुए हैं।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों का स्थायी निराकरण नहीं होता, वे आंदोलन जारी रखेंगे। उनकी मुख्य मांगों में प्रभावित क्षेत्र के सभी पात्र भू-विस्थापितों को तत्काल स्थायी रोजगार प्रदान करना शामिल है। वे उचित बसाहट और मुआवजा राशि का अविलंब वितरण चाहते हैं। इसके साथ ही, वैकल्पिक रोजगार की रुकी हुई प्रक्रिया को तुरंत बहाल करने की भी मांग की गई है।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 17 मार्च तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता है, तो 18 मार्च 2026 से वे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यह एक शांतिपूर्ण आंदोलन होगा, लेकिन वे अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं। ग्रामीणों ने कहा है कि यदि आंदोलन के दौरान किसी ग्रामीण को क्षति पहुंचती है या क्षेत्र में अशांति होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी एस.ई.सी.एल. प्रबंधन की होगी। प्रशासन को भी इस विषय में सूचित कर दिया गया है।