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छत्तीसगढ़: कोर्ट ने महिला और उसके प्रेमी को सुनाई उम्रकैद की सजा, पत्नी ने आशिक संग की थी पति की हत्या
Thu, 09 Jul 2026 12:20 PM IST
रायगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़
Published by: रायगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2026 12:20 PM IST
सार
रायगढ़ जिले में अवैध संबंध छिपाने के लिए महिला ने अपने कथित प्रेमी के साथ मिलकर पति विशेश्वर राठिया की हत्या कर दी। अदालत ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास और एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
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हत्या के आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक महिला ने अपने अवैध संबंध को छिपाने के लिए कथित प्रेमी के साथ मिलकर पति को मौत के घाट उतार दिया। अदालत ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास और जुर्माने से दंडित किया है। यह घटना 12 फरवरी 2020 को हुई थी।
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मृतक विशेश्वर राठिया के भाई विन्देश्वर राठिया ने धरमजयगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि विशेश्वर अपनी पत्नी सहोद्रा राठिया और बच्चे के साथ पुराने मकान में सो रहा था। रात करीब 2:30 बजे सहोद्रा ने नए मकान में आकर बताया कि विशेश्वर कहीं बाहर से गिरकर आया है और उसे चोट लगी है। विशेश्वर को धरमजयगढ़ अस्पताल ले जाया गया, जहां सुबह 5 बजे उसकी मौत हो गई।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की जानकारी मिलने पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ धारा 302 के तहत अपराध दर्ज किया गया। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी टीकाराम उर्फ बन सागर राठिया का सहोद्रा राठिया के साथ अवैध संबंध था। टीकाराम अक्सर उनके घर आता-जाता था। मृतक विशेश्वर राठिया को इस अवैध संबंध की जानकारी हो गई थी।
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अवैध संबंध की बात को दबाने के लिए आरोपियों ने घटना के दिन ईंट और सिल लोढ़ा से विशेश्वर राठिया के सिर पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। तात्कालिक निरीक्षक अमित शुक्ला ने विवेचना पूरी कर अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा के न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।
न्यायालय ने सभी साक्षियों के बयान दर्ज कराए और दोनों पक्षों की बहस सुनी। इसके बाद, न्यायालय ने टीकाराम उर्फ बन सागर राठिया और सहोद्रा राठिया को विशेश्वर राठिया की हत्या का दोषी ठहराया। उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। न्यायालय ने मृतक के परिजनों को विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत 1 लाख रुपये क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने की अनुशंसा भी की। इस मामले में राज्य की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने पैरवी की।