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रायपुर सामूहिक आत्महत्या कांड में नया मोड़: सट्टेबाजी के कर्ज ने उजाड़ा पूरा परिवार? SIT जांच में बड़े खुलासे
Fri, 31 Jul 2026 01:16 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 31 Jul 2026 01:16 PM IST
सार
रायपुर में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए तथ्य सामने आ रहे हैं। एसआईटी की पड़ताल में आर्थिक तंगी, सट्टेबाजी, भारी कर्ज और संदिग्ध फोन कॉल्स जांच के केंद्र में आ गए हैं।
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रायपुर में पांच मौतों की SIT जांच में नया खुलासा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर के संजय नगर में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत के मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को जांच के दौरान कई अहम सुराग मिले हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परिवार का मुखिया साजिद अली लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा था और कथित तौर पर सट्टेबाजी में बड़ी रकम गंवा चुका था।
पुलिस के अनुसार, साजिद ने आर्थिक परेशानी से निकलने के लिए बाजार से करीब 16 लाख रुपये ऊंचे ब्याज पर उधार लिए थे। समय पर रकम वापस नहीं कर पाने के कारण उस पर लगातार दबाव बढ़ता गया। जांच में यह भी सामने आया है कि कर्ज देने वाले लोग कई बार उसके घर पहुंचकर पैसे की मांग और दबाव बना रहे थे।
जांच एजेंसियों का मानना है कि घटना वाले दिन साजिद ने पहले अपनी पत्नी राबिया, बेटे इरशाद, दोनों बेटियों शाहिदा बेगम और इरशाबा परवीन को जहर दिया। इसके बाद वह कई घंटे तक घर में मौजूद रहा और करीब नौ घंटे बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। हालांकि पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की हर पहलू से पुष्टि करने में जुटी हुई है।
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तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को साजिद के मोबाइल फोन से दो ऐसे मोबाइल नंबर मिले हैं, जिनसे घटना से पहले लगातार बातचीत हुई थी। बताया जा रहा है कि 17 जुलाई की रात भी इन नंबरों पर उसकी बातचीत हुई थी, जबकि अगले दिन परिवार के पांचों सदस्यों के शव मिले थे। घटना के बाद से दोनों नंबर बंद हैं। पुलिस इन नंबरों से जुड़े लोगों की पहचान और तलाश कर रही है।
एसआईटी की जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि साजिद पिछले करीब एक वर्ष से बैटरी निर्माण का काम नहीं कर रहा था। इसके बावजूद परिवार का खर्च चलता रहा। उसके बैंक खाते और मोबाइल रिकॉर्ड की जांच में आईपीएल सट्टेबाजी से जुड़े कई लेन-देन के संकेत मिले हैं। पुलिस अब वित्तीय लेन-देन, कॉल रिकॉर्ड और पारिवारिक परिस्थितियों की गहन जांच कर रही है।
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पुलिस के अनुसार, साजिद ने आर्थिक परेशानी से निकलने के लिए बाजार से करीब 16 लाख रुपये ऊंचे ब्याज पर उधार लिए थे। समय पर रकम वापस नहीं कर पाने के कारण उस पर लगातार दबाव बढ़ता गया। जांच में यह भी सामने आया है कि कर्ज देने वाले लोग कई बार उसके घर पहुंचकर पैसे की मांग और दबाव बना रहे थे।
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जांच एजेंसियों का मानना है कि घटना वाले दिन साजिद ने पहले अपनी पत्नी राबिया, बेटे इरशाद, दोनों बेटियों शाहिदा बेगम और इरशाबा परवीन को जहर दिया। इसके बाद वह कई घंटे तक घर में मौजूद रहा और करीब नौ घंटे बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। हालांकि पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की हर पहलू से पुष्टि करने में जुटी हुई है।
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तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को साजिद के मोबाइल फोन से दो ऐसे मोबाइल नंबर मिले हैं, जिनसे घटना से पहले लगातार बातचीत हुई थी। बताया जा रहा है कि 17 जुलाई की रात भी इन नंबरों पर उसकी बातचीत हुई थी, जबकि अगले दिन परिवार के पांचों सदस्यों के शव मिले थे। घटना के बाद से दोनों नंबर बंद हैं। पुलिस इन नंबरों से जुड़े लोगों की पहचान और तलाश कर रही है।
एसआईटी की जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि साजिद पिछले करीब एक वर्ष से बैटरी निर्माण का काम नहीं कर रहा था। इसके बावजूद परिवार का खर्च चलता रहा। उसके बैंक खाते और मोबाइल रिकॉर्ड की जांच में आईपीएल सट्टेबाजी से जुड़े कई लेन-देन के संकेत मिले हैं। पुलिस अब वित्तीय लेन-देन, कॉल रिकॉर्ड और पारिवारिक परिस्थितियों की गहन जांच कर रही है।