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अभिषेक शर्मा रिकॉर्ड: क्रिकेटर अभिषेक शर्मा की मैदान की आक्रामकता और मन की नीरवता

Fri, 18 Sep 2026 11:34 AM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Fri, 18 Sep 2026 11:34 AM IST
सार

अभिषेक शर्मा के बल्ले का प्रदर्शन मैदान पर शिव के 'तांडव' जैसी ऊर्जा और उग्रता से भरा था, लेकिन शतक के तुरंत बाद पिच पर बैठकर ध्यान लगाना उसी उग्रता को शांत समाधि में रूपांतरित करने का प्रतीक था।

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Abhishek Sharma Breaks Rohit Sharma Record With 30-Ball Century, Then Turns to Meditation know Why
अभिषेक शर्मा - फोटो : IANS

विस्तार

Abhishek Sharma Meditation: क्रिकेट के मैदान पर आक्रामक शतकों की गूंज और दर्शकों का कोलाहल स्वाभाविक है, लेकिन जब कोई बल्लेबाज मात्र 30 गेंदों में भारत का सबसे तेज टी-20 अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ने के बाद पिच पर पद्मासन लगाकर योग-ध्यान की मुद्रा में बैठ जाए तो वह क्षण मात्र खेल का नहीं रह जाता। वह दृश्य अध्यात्म, मानसिक नियंत्रण और अद्वितीय प्रतिभा के संगम का प्रतीक बन जाता है।

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अफगानिस्तान के खिलाफ अभिषेक शर्मा का दमदार प्रदर्शन

दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में अफगानिस्तान के खिलाफ मुकाबले में भारतीय ओपनर अभिषेक शर्मा ने बिल्कुल ऐसा ही दृश्य पेश किया। इस मैच में अभिषेक शर्मा की बल्लेबाजी में असाधारण स्पष्टता और लय नजर आई। गेंदबाजों की हर गेंद को सीमा रेखा के पार भेजने का इरादा रखते हुए उन्होंने रोहित शर्मा के 35 गेंदों में बनाए गए भारत के सबसे तेज टी-20 अंतरराष्ट्रीय शतक के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
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जब क्रिकेट मैदान में लगाई थी ध्यान मुद्रा 

शतक पूरा करते ही अभिषेक शर्मा ने अपना हेलमेट उतारा, मैदान की पिच पर पद्मासन लगाकर बैठ गए। आंखें बंदकर हाथों को घुटनों पर रखते हुए ध्यान की मुद्रा धारण की। दरअसल, सनातन परंपरा और योगशास्त्र में इस मुद्रा का संबंध आदिगुरु भगवान शिव से है। भगवान शिव को 'आदियोगी' माना गया है। वे जहां एक तरफ 'तांडव' के जरिए प्रचंड शक्ति और विनाशकारी ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं दूसरी तरफ 'समाधि' में लीन होकर अनंत शांति और परम चेतना का साक्षात्कार कराते हैं।
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खेल की उग्रता को शांत करने का तरीका

अभिषेक शर्मा के बल्ले का प्रदर्शन मैदान पर शिव के 'तांडव' जैसी ऊर्जा और उग्रता से भरा था, लेकिन शतक के तुरंत बाद पिच पर बैठकर ध्यान लगाना उसी उग्रता को शांत समाधि में रूपांतरित करने का प्रतीक था। यह मुद्रा दर्शाती है कि जब इंसान अपनी चरम क्षमता और सफलता को हासिल कर लेता है, तब उसे अहंकार के बजाय ईश्वर के प्रति कृतज्ञता और अपने भीतर की नीरवता में लौटना चाहिए।

योग और ध्यान का अभ्यास करते हैं अभिषेक शर्मा

मैदान पर दिखाई दिया यह दृश्य अचानक नहीं था। इसके पीछे उनकी अंतर्निहित भक्ति साधना और मानसिक अभ्यास का गहरा हाथ है। अभिषेक शर्मा ने अपने पूर्व के साक्षात्कारों में इस बात का उल्लेख किया है कि वो अपनी दिनचर्या में नियमित ध्यान और योग को शामिल करते हैं। वे मानते हैं कि खेल के दबाव और बाहरी शोर से निपटने के लिए मन को शांत रखना सबसे प्रभावी माध्यम है।

मैचों से पहले और अपनी यात्राओं के दौरान वे मंदिरों के दर्शन कर मानसिक संबल प्राप्त करते हैं। शतक के बाद पिच पर ध्यान साधना उनके लिए केवल उत्सव मनाने का जरिया नहीं, अपितु भगवान शिव और परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक मौन और पावन माध्यम था।

भारत के सबसे तेज टी-20 शतक का कीर्तिमान

अभिषेक शर्मा की यह ऐतिहासिक पारी यह सिद्ध करती है कि जब कठोर परिश्रम को योग, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक चेतना का साथ मिलता है तो सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित होते हैं। उनकी यह पारी न केवल भारत के सबसे तेज टी-20 शतक के रूप में दर्ज रहेगी, बल्कि मैदान पर भगवान शिव के ध्यानी रूप की उस झलक के लिए भी याद की जाएगी, जिसने साबित किया कि महा-तूफान के बीच भी अंतर्मन को शांत रखा जा सकता है।

प्रतिभा के साथ आस्था और अनुशासन 

गौरतलब है कि टीम इंडिया के कई सितारे अपनी असाधारण खेल प्रतिभा के साथ-साथ गहरी धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक अनुशासन के लिए भी जाने जाते हैं। विराट कोहली यह स्वीकार कर चुके हैं कि आध्यात्मिकता से उन्हें जीवन और खेल में शांति और संतुलन प्राप्त होता है। रोहित शर्मा, के.एल. राहुल, सूर्यकुमार यादव, महेंद्र सिंह धोनी, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव समेत कई खिलाड़ी अपनी धार्मिक परंपराओं और पूजा-पाठ से गहरे जुड़े हुए हैं।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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