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एक भारतीय राजनयिक की पहल बनी वैश्विक पहचान, अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दिवस के 10 साल पूरे

Mon, 26 Oct 2026 08:07 AM IST
Abhay kumar अभय कुमार
Updated Mon, 26 Oct 2026 08:07 AM IST
सार

भारतीय राजनयिक अभय के. की पहल से शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दिवस अब दुनिया के कई देशों तक पहुंच चुका है
24 अक्तूबर 2026 को इस पहल के 10 साल पूरे हुए, जिसका उद्देश्य राजनयिकों और उनके परिवारों के योगदान को पहचान दिलाना है।

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An Indian Diplomats Idea Goes Global as International Day of Diplomats Completes 10 Years
भारतीय राजनयिक अभय के. की पहल से शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दिवस अब दुनिया के कई देशों तक पहुंच - फोटो : AI Generated

विस्तार

दुनिया में शांति बनाए रखने, देशों के बीच रिश्ते मजबूत करने और विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने में राजनयिकों की अहम भूमिका होती है। हालांकि, उनके काम और निजी जीवन में आने वाली चुनौतियों पर आमतौर पर कम चर्चा होती है।

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इसी योगदान को पहचान दिलाने के उद्देश्य से शुरू किया गया अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दिवस अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। चलिए जानते हैं इस दिन के बारे में। आप आगे इस बारे में विस्तार से जान सकते हैं...
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अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दिवस के 10 साल पूरे

24 अक्तूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दिवस की दसवीं वर्षगांठ मनाई गई
इस पहल की शुरुआत भारतीय राजनयिक अभय के. ने वर्ष 2017 में ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया से की थी
एक छोटे से आयोजन से शुरू हुआ यह विचार अब अलग-अलग देशों के राजनयिकों और विदेश मंत्रालयों तक पहुंच गया है

कैसे हुई इस दिन की शुरुआत?

अभय के. ने 12 अक्तूबर 2017 को एक लेख के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दिवस मनाने का विचार सामने रखा था
उनका उद्देश्य दुनिया भर के राजनयिकों और उनके परिवारों की मेहनत, जिम्मेदारियों और त्याग को सम्मान देना था
इसके बाद उन्होंने ब्रासीलिया में अपने राजनयिक मित्रों और उनके परिवारों को एक आयोजन के लिए आमंत्रित किया
24 अक्तूबर 2017 को आयोजित पहले कार्यक्रम में बांग्लादेश, ब्राजील, फ्रांस, घाना, भारत, इजरायल, इटली, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और तुर्किये के राजनयिक शामिल हुए
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इस तरह एक छोटी-सी पहल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का सफर शुरू किया

राजनयिकों की जिंदगी क्यों होती है चुनौतीपूर्ण?

राजनयिकों का काम केवल विदेश में अपने देश का प्रतिनिधित्व करना नहीं है
उन्हें विभिन्न देशों के साथ संवाद बनाए रखना, समझौते कराने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और विदेश नीति से जुड़े अहम मामलों में सरकारों को सलाह देने जैसी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं


उनकी जिंदगी की एक बड़ी चुनौती बार-बार स्थान बदलना भी है
अभय के. के अनुसार राजनयिकों को अक्सर हर तीन से चार साल में एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में जाना पड़ता है
इस दौरान उन्हें नई भाषा, संस्कृति और सामाजिक माहौल के साथ तालमेल बिठाना होता है

उनके परिवारों को भी बार-बार स्थान बदलने और पुराने रिश्तों से दूर होने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है
ऐसे में यह दिवस उनके योगदान को समझने का अवसर देता है

कई देशों में होने लगे आयोजन

समय के साथ अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दिवस का दायरा बढ़ता गया
दूसरे वर्ष 2018 में ब्रासीलिया के अलावा अन्य राजधानियों में भी इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए
बाद के वर्षों में सोशल मीडिया के जरिए भी राजनयिकों ने इस दिवस को मनाया
#InternationalDiplomatsDay और #ServingPeopleGlobally जैसे हैशटैग के माध्यम से लोगों ने राजनयिकों के योगदान को सराहा

पांचवें आयोजन तक इस पहल में मंत्री, सांसद, राजदूत, शिक्षाविद और अन्य जानी-मानी हस्तियां शामिल होने लगीं
वर्ष 2022 में दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने भी इस दिवस को मनाया
2026 में दसवीं वर्षगांठ के अवसर पर श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में इंडोनेशिया की राजदूत देवी गुस्तिना टोबिंग ने राजनयिक समुदाय के सदस्यों और उनके परिवारों के साथ आयोजन किया
श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ भी इसमें शामिल हुए। साथ ही कनाडा के ग्लोबल अफेयर्स विभाग ने भी अपने राजनयिकों के योगदान को सराहा

विश्व शांति में कूटनीति की अहम भूमिका

कूटनीति देशों के बीच मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने और आपसी विश्वास बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है
राजनयिक वार्ता, सहयोग और समझौतों के जरिए संभावित विवादों को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकते हैं

अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दिवस का उद्देश्य केवल एक पेशे का सम्मान करना नहीं, बल्कि दुनिया को जोड़ने में संवाद और आपसी समझ की अहमियत को सामने लाना भी है
अभय के. के लिए इस पहल के दस साल पूरे होना खास उपलब्धि है
वर्ष 2017 में शुरू हुआ यह विचार अब उन जगहों पर भी मनाया जा रहा है, जहां वे स्वयं कभी नहीं गए
यही इस पहल की सबसे बड़ी सफलता मानी जा सकती है

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