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जीवन धारा: किसी के वर्तमान को देखकर भविष्य का फैसला क्यों नहीं करना चाहिए? बदलाव की संभावना ही जीवन का सच है

Mon, 26 Oct 2026 07:23 AM IST
शिवम गर्ग ऐनी कॉनवे
ऐनी कॉनवे Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 26 Oct 2026 07:23 AM IST
सार

वर्तमान दशा को देखकर किसी के भविष्य का फैसला नहीं सुनाया जा सकता। जो आज कमजोर है, वह कल मजबूत हो सकता है और जो आज गलत रास्ते पर है, वह कल अपनी दिशा बदल सकता है।

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Jeevan Dhara: Why We Should Never Judge the Future by the Present
वर्तमान को देखकर भविष्य का फैसला न करें - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

मैं संसार को केवल वैसा नहीं देखती, जैसा वह आज दिखाई देता है, बल्कि वैसा भी देखती हूं, जैसा वह कल बन सकता है। मेरे लिए जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि किसी भी जीव की वर्तमान दशा के आधार पर उसके भविष्य का फैसला नहीं सुनाया जा सकता। जो आज कमजोर है, वह कल मजबूत हो सकता है और जो आज गलत रास्ते पर है, वह कल अपनी दिशा बदल सकता है। इसलिए, किसी के बारे में अंतिम राय बना लेना मुझे जीवन को समझने का सबसे कमजोर तरीका लगता है। किसी व्यक्ति में बदलाव की संभावना को समझने के लिए हमें पहले यह समझना होगा कि यदि हर चीज हमेशा एक जैसी ही रहती, तो सीखने, समझने और बेहतर बनने का कोई अर्थ नहीं होता।
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जरा सोचिए, यदि किसी छोटे पौधे को देखकर ही तय कर दिया जाए कि वह कभी विशाल नहीं हो सकता और न ही छाया दे सकता है, तो क्या यह निर्णय उचित होगा? भले ही पौधे में अभी छाया देने की क्षमता दिखाई न दे रही हो, पर इसका अर्थ यह नहीं कि भविष्य में भी वह ऐसा नहीं कर पाएगा। उसके भीतर एक संभावना है, जो समय, परिस्थितियों और विकास के साथ अपना रूप प्रकट करेगी। इसी तरह मनुष्य का जीवन भी वर्तमान से कहीं अधिक व्यापक हो सकता है। हम देखते हैं कि बीज धीरे-धीरे पेड़ बनता है और दुख से गुजरने वाला व्यक्ति दूसरों के दुख को पहले से बेहतर समझने लगता है। इसीलिए, मैं किसी जीव को केवल उसके शरीर, उसकी गलती या उसकी मौजूदा स्थिति तक सीमित नहीं मानती। मैं यह समझने की कोशिश करती हूं कि वह अपनी वर्तमान स्थिति से कैसे बाहर निकल सकता है। मेरे लिए इस करुणा का अर्थ किसी पर दया करना नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपी बेहतर बनने की संभावना को पहचानना भी है। यही सोच हमें जीवन को देखने का एक नया नजरिया देती है। यदि हम दूसरों को बदलने की संभावना देते हैं, तो अपने लिए यह संभावना क्यों खत्म कर दें? हालांकि, किसी भी बदलाव के लिए धैर्य, समझ और अपने भीतर झांकने का साहस चाहिए। इसके लिए हमें यह स्वीकार करना पड़ता है कि हमारी आज की समझ अधूरी हो सकती है। जो बात हमें कभी सही लगती थी, उसे बाद में गलत मानने का साहस भी इसी बदलाव का हिस्सा है।
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मेरे लिए जीवन की सबसे सुंदर बात यही है कि इसकी कहानी किसी एक मोड़ पर आकर खत्म नहीं होती। हम हर अनुभव से कुछ नया सीखते हैं और हर नई समझ हमें अपने पुराने रूप से थोड़ा आगे ले जाती है। आखिर बदलाव की शुरुआत इसी भरोसे से होती है कि हमारे भीतर अभी बहुत कुछ ऐसा है, जिसे समझना और संवारना बाकी है। -द प्रिंसिपल्स ऑफ द मोस्ट एंशिएंट एंड मॉडर्न फिलॉसफी के अनूदित अंश
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