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दूसरा पहलू: एच5एन1 से बचाव के लिए अनोखा अभियान
Tue, 08 Sep 2026 07:11 AM IST
निर्मल कांत
जूली ओल्ड
जूली ओल्ड
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 08 Sep 2026 07:11 AM IST
सार
लिटिल पेंगुइनों का टीकाकरण करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है, ताकि उन्हें संक्रामक एच5एन1 बर्ड फ्लू से बचाया जा सके।
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लिटिल पेंगुइन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
विक्टोरिया में पांच हजार से अधिक लिटिल पेंगुइनों को पकड़कर उनका टीकाकरण करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन्हें अत्यंत संक्रामक एच5एन1 बर्ड फ्लू से बचाना है। यह जंगली पक्षियों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम है। फिलिप आइलैंड में एक लिटिल पेंगुइन पहले ही बर्ड फ्लू से मर चुका है।
लिटिल पेंगुइन, जिसका वैज्ञानिक नाम इयुडिप्टुला माइनर है, दुनिया का सबसे छोटा पेंगुइन है। इनकी ऊंचाई करीब 30 सेंटीमीटर व वजन लगभग 1.5 किलोग्राम होता है। ये ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी तटों, तस्मानिया व न्यूजीलैंड में पाए जाते हैं। फिलिप आइलैंड इनके लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहां हर साल सात लाख से अधिक पर्यटक सूर्यास्त के समय समुद्र से लौटकर अपने बिलों की ओर जाते पेंगुइनों को देखने आते हैं। इस दृश्य को ‘पेंगुइन परेड’ के नाम से जाना जाता है। फिलिप आइलैंड व सेंट किल्डा की कॉलोनियों में करीब 40,000 पेंगुइन रहते हैं। पेंगुइनों को पकड़ना आसान नहीं है, क्योंकि टीके की दो खुराक देने के लिए उन्हें दो बार पकड़ना पड़ता है। हालांकि, उनके रात में नियमित रूप से अपने बिलों में लौटने के कारण उनका टीकाकरण अन्य जंगली पक्षियों की तुलना में संभव है। एच5एन1 का इस्तेमाल होने वाला टीका निष्क्रिय वायरस पर आधारित है। पहली खुराक के बाद प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस को पहचानकर एंटीबॉडी व मेमोरी बी कोशिकाएं बनाती है। कुछ सप्ताह बाद दी जाने वाली बूस्टर डोज प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को और मजबूत करती है। टीका संक्रमण को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं देता और सभी पेंगुइनों का टीकाकरण भी संभव नहीं है। फिर भी, यह बीमारी के प्रभाव को कम करने का महत्वपूर्ण उपाय है। बर्ड फ्लू का वायरस समय के साथ बदलता रहेगा, इसलिए भविष्य में नए रूपों के अनुसार नए टीकों की आवश्यकता पड़ सकती है। फिलहाल, टीकाकरण इस खतरे से निपटने का एक महत्वपूर्ण साधन है।
-द कन्वर्सेशन
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लिटिल पेंगुइन, जिसका वैज्ञानिक नाम इयुडिप्टुला माइनर है, दुनिया का सबसे छोटा पेंगुइन है। इनकी ऊंचाई करीब 30 सेंटीमीटर व वजन लगभग 1.5 किलोग्राम होता है। ये ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी तटों, तस्मानिया व न्यूजीलैंड में पाए जाते हैं। फिलिप आइलैंड इनके लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहां हर साल सात लाख से अधिक पर्यटक सूर्यास्त के समय समुद्र से लौटकर अपने बिलों की ओर जाते पेंगुइनों को देखने आते हैं। इस दृश्य को ‘पेंगुइन परेड’ के नाम से जाना जाता है। फिलिप आइलैंड व सेंट किल्डा की कॉलोनियों में करीब 40,000 पेंगुइन रहते हैं। पेंगुइनों को पकड़ना आसान नहीं है, क्योंकि टीके की दो खुराक देने के लिए उन्हें दो बार पकड़ना पड़ता है। हालांकि, उनके रात में नियमित रूप से अपने बिलों में लौटने के कारण उनका टीकाकरण अन्य जंगली पक्षियों की तुलना में संभव है। एच5एन1 का इस्तेमाल होने वाला टीका निष्क्रिय वायरस पर आधारित है। पहली खुराक के बाद प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस को पहचानकर एंटीबॉडी व मेमोरी बी कोशिकाएं बनाती है। कुछ सप्ताह बाद दी जाने वाली बूस्टर डोज प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को और मजबूत करती है। टीका संक्रमण को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं देता और सभी पेंगुइनों का टीकाकरण भी संभव नहीं है। फिर भी, यह बीमारी के प्रभाव को कम करने का महत्वपूर्ण उपाय है। बर्ड फ्लू का वायरस समय के साथ बदलता रहेगा, इसलिए भविष्य में नए रूपों के अनुसार नए टीकों की आवश्यकता पड़ सकती है। फिलहाल, टीकाकरण इस खतरे से निपटने का एक महत्वपूर्ण साधन है।
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-द कन्वर्सेशन