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जन्म शुरुआत है अंतिम फैसला नहीं: कहां पहुंचते हैं, यही असली कहानी
Thu, 08 Oct 2026 08:15 AM IST
नितिन गौतम
जेफ्री आर्चर, अमर उजाला
जेफ्री आर्चर, अमर उजाला
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 08 Oct 2026 08:15 AM IST
सार
हमारी कहानी केवल हमारे जन्म से नहीं बनती। वह इससे भी बनती है कि हमने उपलब्ध अवसरों का क्या किया, अपनी सीमाओं को कैसे समझा और बदलती परिस्थितियों में अपने लिए कौन-से रास्ते खोजे।
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ब्लॉग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कल्पना कीजिए कि एक ही शहर में एक ही दिन दो बच्चों का जन्म होता है। एक का जन्म अमीर परिवार में हुआ, जबकि दूसरे का जन्म एक बेहद गरीब परिवार में हुआ। पहले बच्चे के कमरे में खिलौनों के साथ दुनिया का नक्शा भी है। दूसरे बच्चे के कमरे में खिलौने तो नहीं हैं, मगर खिड़की से दिखाई देने वाली सड़क उसे हर दिन एक नई दुनिया का एहसास कराती है। बीस साल बाद, पहला युवक विदेश के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में पढ़ रहा है। दूसरा एक छोटी-सी नौकरी करके अपना घर चला रहा है। यदि कोई इस समय दोनों के जीवन की तुलना करे, तो शायद कहेगा कि पहले का भविष्य उज्ज्वल है और दूसरे का सीमित। लेकिन, जीवन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह अपनी कहानी का आखिरी पन्ना शुरुआत में नहीं दिखाता।
हम अक्सर मौजूदा हालात देखकर भविष्य का अनुमान लगाने लगते हैं। अमीर घर का बच्चा सफल होगा, गरीब परिवार का बच्चा संघर्ष करेगा, ये अनुमान निराधार नहीं हैं, क्योंकि जन्म और सामाजिक परिस्थितियां मनुष्य के अवसरों को प्रभावित करती हैं। लेकिन, अवसरों का अंतर और भविष्य का निश्चित होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। जन्म यह तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है कि हम कहां से शुरू करेंगे, पर यह तय नहीं करता कि हमारी यात्रा कहां समाप्त होगी। जिस बच्चे को अच्छी शिक्षा, आर्थिक सुरक्षा और सही मार्गदर्शन मिलता है, उसे जीवन की दौड़ में वास्तविक लाभ मिलता है। वहीं, अभाव में पलने वाले बच्चे के लिए एक छोटी-सी गलती भी बड़े संकट का कारण बन सकती है। यह अंतर वास्तविक है। लेकिन, क्या इसका अर्थ यह है कि पहले बच्चे की सफलता सुनिश्चित है और दूसरे की असफलता? नहीं। इसका अर्थ केवल यह है कि दोनों की यात्रा समान नहीं होगी।
हम अक्सर अपनी सफलता का पैमाना दूसरों को देखकर तय करते हैं। ऐसी स्थिति में जन्म की परिस्थितियां और भी निर्णायक दिखाई देने लगती हैं। जो पहले से संपन्न है, वह तेजी से आगे निकल सकता है। जिसके पास साधन सीमित हैं, उसे संघर्ष करना पड़ सकता है। लेकिन, क्या जीवन का मूल्य केवल इस तुलना से तय होना चाहिए? हम अपने जन्म को नहीं बदल सकते। अतीत को दोबारा नहीं लिख सकते। लेकिन, हम वर्तमान को समझने और भविष्य की संभावनाओं पर काम कर सकते हैं।
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हमारी कहानी केवल इस बात से नहीं बनती कि हम कहां पैदा हुए थे। वह इससे भी बनती है कि हमने उपलब्ध अवसरों का क्या किया, अपनी सीमाओं को कैसे समझा और बदलती परिस्थितियों में अपने लिए कौन-से रास्ते खोजे। इसलिए, अपने जन्म पर गर्व करने या उसके लिए शर्मिंदा होने के बजाय उसे जीवन की एक वास्तविकता की तरह स्वीकार कीजिए।
अपनी कहानी खुद लिखें
हम कहां जन्म लेते हैं, यह हमारे हाथ में नहीं होता, पर वहां से आगे कहां पहुंचना है, यह बहुत हद तक हमारे प्रयास तय करते हैं। परिस्थितियां अवसरों को छोटा-बड़ा कर सकती हैं, पर संभावनाओं को नहीं। दूसरों को देखकर अपने भविष्य का अनुमान न लगाएं। अतीत को स्वीकार करें, वर्तमान का सही उपयोग करें और भविष्य के लिए निरंतर प्रयास करते रहें।
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हम अक्सर मौजूदा हालात देखकर भविष्य का अनुमान लगाने लगते हैं। अमीर घर का बच्चा सफल होगा, गरीब परिवार का बच्चा संघर्ष करेगा, ये अनुमान निराधार नहीं हैं, क्योंकि जन्म और सामाजिक परिस्थितियां मनुष्य के अवसरों को प्रभावित करती हैं। लेकिन, अवसरों का अंतर और भविष्य का निश्चित होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। जन्म यह तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है कि हम कहां से शुरू करेंगे, पर यह तय नहीं करता कि हमारी यात्रा कहां समाप्त होगी। जिस बच्चे को अच्छी शिक्षा, आर्थिक सुरक्षा और सही मार्गदर्शन मिलता है, उसे जीवन की दौड़ में वास्तविक लाभ मिलता है। वहीं, अभाव में पलने वाले बच्चे के लिए एक छोटी-सी गलती भी बड़े संकट का कारण बन सकती है। यह अंतर वास्तविक है। लेकिन, क्या इसका अर्थ यह है कि पहले बच्चे की सफलता सुनिश्चित है और दूसरे की असफलता? नहीं। इसका अर्थ केवल यह है कि दोनों की यात्रा समान नहीं होगी।
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हम अक्सर अपनी सफलता का पैमाना दूसरों को देखकर तय करते हैं। ऐसी स्थिति में जन्म की परिस्थितियां और भी निर्णायक दिखाई देने लगती हैं। जो पहले से संपन्न है, वह तेजी से आगे निकल सकता है। जिसके पास साधन सीमित हैं, उसे संघर्ष करना पड़ सकता है। लेकिन, क्या जीवन का मूल्य केवल इस तुलना से तय होना चाहिए? हम अपने जन्म को नहीं बदल सकते। अतीत को दोबारा नहीं लिख सकते। लेकिन, हम वर्तमान को समझने और भविष्य की संभावनाओं पर काम कर सकते हैं।
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हमारी कहानी केवल इस बात से नहीं बनती कि हम कहां पैदा हुए थे। वह इससे भी बनती है कि हमने उपलब्ध अवसरों का क्या किया, अपनी सीमाओं को कैसे समझा और बदलती परिस्थितियों में अपने लिए कौन-से रास्ते खोजे। इसलिए, अपने जन्म पर गर्व करने या उसके लिए शर्मिंदा होने के बजाय उसे जीवन की एक वास्तविकता की तरह स्वीकार कीजिए।
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हम कहां जन्म लेते हैं, यह हमारे हाथ में नहीं होता, पर वहां से आगे कहां पहुंचना है, यह बहुत हद तक हमारे प्रयास तय करते हैं। परिस्थितियां अवसरों को छोटा-बड़ा कर सकती हैं, पर संभावनाओं को नहीं। दूसरों को देखकर अपने भविष्य का अनुमान न लगाएं। अतीत को स्वीकार करें, वर्तमान का सही उपयोग करें और भविष्य के लिए निरंतर प्रयास करते रहें।