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राज और नीति : मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की छापेमारी

Suresh Tiwari सुरेश तिवारी
Updated Fri, 27 Feb 2026 05:40 AM IST
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सार

डॉ. मोहन यादव ने वल्लभ भवन में अधिकारियों-कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु छापेमारी अभियान शुरू कराया है। शिकायतों के बाद शुरू हुई इस कवायद का उद्देश्य अनुशासन और कार्यसंस्कृति सुधारना है। अब देखना होगा कि यह अभियान स्थायी बदलाव ला पाता है या नहीं।

Raj and Niti: Chief Minister Dr. Mohan Yadav raids the ministry
राज और नीति : मप्र में सियासी और प्रशासनिक हलचल बताता कॉलम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों, कर्मचारियों की मंत्रालय वल्लभ भवन में कार्यालय समय में उपस्थिति को लेकर जो छापेमारी गुरुवार को करवाई, उसे देखकर कहा जा रहा है कि यह मुख्यमंत्री की अपने तरह की अलग कवायद है, जिसमें अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अधिकारी-कर्मचारी अपनी टेबल पर काम करते हुए नजर आएं। प्रदेश में अभी तक इसके पहले यह काम प्रशासकीय स्तर पर ही यदा कदा होता था, लेकिन मुख्यमंत्री स्तर पर इस कार्य को गंभीरता से लिया जाना काफी मायने रखता है। पता चला है कि मुख्यमंत्री को मंत्रियों और अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से यह शिकायत कई बार मिली है कि अधिकारी-कर्मचारी मंत्रालय में अपनी टेबल पर बैठते नहीं हैं। मनमानी तरीके से आते हैं और चले जाते हैं। इसमें प्रशासकीय दृष्टि से किसी प्रकार का नियंत्रण भी नहीं है। माना जाता है कि इसी बात को लेकर मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए और इसे एक अभियान के रूप में इसे शुरू किया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह अभियान कितने दिन तक चलता है और क्या अब वाकई अधिकारी कर्मचारी अपनी टेबल पर मिलेंगे?
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दो भाजपा नेत्रियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई
इंदौर जिले में महू विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की दो नेत्रियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई अब सड़कों पर आ गई है। दोनों नेत्रियों के बीच वैसे तो चुनाव के समय से ही छोटे-मोटे विवाद होने की खबरें आती रही हैं, लेकिन हाल ही में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में आयोजित एक समारोह में यह विवाद खुलकर सामने आ गया। महू में नाना जी देशमुख की प्रतिमा के अनावरण पर जैसे ही डिजिटल शिलालेख सामने आया वैसे ही एक नेत्री का पारा सातवें आसमान पर था। उस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव, केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर और दूसरी महिला नेत्री का प्रमुख रूप से नाम था। इस पर उन्होंने वहीं पर नाराजगी जाहिर की। नाराज होने वाली नेत्री भाजपा के कभी दिग्गज रहे नेता की बेटी हैं, इसलिए वे महू को अपनी विरासत समझती हैं। हालांकि पार्टी ने कभी उन्हें महू विधानसभा का टिकट नहीं दिया और यहां पर हमेशा इंदौर के नेताओं का कब्जा रहा, कहा जा रहा है कि ये बात भी ये महिला नेत्री बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं।
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एक ही बैच के आईएएस, पत्नी कलेक्टर, पति एसडीएम  
यह मामला 2022 बैच के आईएएस दंपती से जुड़ा है। मध्य प्रदेश से इसका संबंध इसलिए है कि पति मध्य प्रदेश कैडर के हैं और पत्नी एजीएमयूटी कैडर की। हम बात कर रहे हैं इशिता राठी और रवि विहाग की। दोनों ने पिछले साल 2025 दिसंबर में प्रेम विवाह रचाया। पत्नी के लिए यह शादी बहुत लकी रही और वह शादी के दो माह बाद ही एजीएमयूटी कैडर में पुडुचेरी के कराईकल जिले की कलेक्टर बन गईं। उनके जिला कलेक्टर की कुर्सी संभालते ही सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई कि क्या उन्हें देश में अब तक का सबसे तेज प्रमोशन मिला है। जहां अन्य प्रदेशों में अभी 2016-2017 बैच के सीधी भर्ती के आईएएस अधिकारी कलेक्टर नहीं बन पाए हैं, वहीं, इशिता का जिला कलेक्टर बनने का सपना इतनी जल्दी पूरा हो गया। बात करें उनके पति मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रवि विहाग की तो, वे अभी भी एसडीएम ही बने हुए हैं। वे सिवनी जिले में लखनादौन के एसडीएम हैं। इस मामले में अब सबसे दिलचस्प बात यह रह गई है कि क्या कलेक्टर बनने के बाद इशिता अपने कैडर को मध्य प्रदेश में बदलेगी या एजीएमयूटी कैडर में ही बनी रहेंगी।

अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें। 
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