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राम मंदिर दान चोरी: धार्मिक पर्यटन के लिए भी झटका है चढ़ावा चोरी कांड

Thu, 16 Jul 2026 03:05 PM IST
Ajay Bokil अजय बोकिल
Updated Thu, 16 Jul 2026 03:05 PM IST
सार

जब हर जगह चोरों का ही बोलबाला है तो मंदिर में चढ़ावा चढ़ाएं क्यों? और जब भगवान खुद ही अपने घर में चोरी नहीं रोक पा रहे तो उस पर सौ फीसदी भरोसा जताए क्यों? और क्या मंदिरों का हिसाब किताब कभी सही ढंग से रखा भी जा सकेगा?

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Ram Mandir Donation Scam - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अयोध्या के श्रीराम मंदिर के चढ़ावा चोरों और उनके ‘संरक्षकों’ को इस बात का ‘श्रेय’ तो देना ही पड़ेगा कि उन्होंने देश भर में तमाम हिंदू मंदिरों के चढ़ावे और दान आदि के हिसाब किताब में चोरी चकारी और कुप्रबंधन की कलई खोलकर समूचे हिंदू समाज को उद्वेलित और आत्ममंथन के लिए विवश कर दिया है।

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यूं तो मंदिरों में गड़बडि़यां पहले भी होती रही होंगी, लेकिन अब तो इसका सीरियल ही चल पड़ा है। वेष्णों देवी, बद्रीनाथ धाम, गुजरात का मां अंबाजी मंदिर, मप्र के नलखेड़ा का मां बगुलामुखी मंदिर, बस्तर का मां दंतेश्वरी देवी मंदिर इन सबकी अंतर्कथा लगभग एक-सी है। चढ़ावा में चोरी, दान में, मंदिर के खजाने और जमीन वसीयतों आदि में हेराफेरी।
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हो सकता है कि गड़बड़ी के कुछ आरोप गलत भी हों, लेकिन इनसे यह तो साफ हो रहा है ज्यादातर मंदिरों के प्रबंधन में ऐसे लोग बैठे हैं, जिनका माया मोह भक्तों के भक्ति भाव से कहीं ज्यादा प्रबल, संगठित और मारक है। और तो और जिन मंदिरों में सरकारी अफसर बतौर सीईओ नियुक्त हैं, वहां भी गड़बडि़यां कम नहीं हैं। इन घटनाक्रमों ने हर आस्थावान हिंदू के मन में खिन्नता का भाव पैदा कर दिया है। वह मन ही मन सोचने लगा है कि आखिर इन मंदिरों में जाएं तो जाएं क्यों? 
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जब हर जगह चोरों का ही बोलबाला है तो मंदिर में चढ़ावा चढ़ाएं क्यों? और जब भगवान खुद ही अपने घर में चोरी नहीं रोक पा रहे तो उस पर सौ फीसदी भरोसा जताए क्यों? और क्या मंदिरों का हिसाब किताब कभी सही ढंग से रखा भी जा सकेगा? क्या मालियों को ही फूल चुराने से रोका जा सकेगा? या सब कुछ वैसा ही चलता रहेगा, जैसा चल रहा है? उधर राम मंदिर चढ़ावा चोरी की एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट अभी नहीं आई है, लेकिन चढ़ावा चोरी को जायज ठहराने वाला एक बयान यूपी विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा नेता सतीश महाना का आ गया है।

सतीशजी ने ज्ञान दिया कि वही चढ़ावा चोरी हुआ, जो भक्तों ने सच्ची श्रद्धा से नहीं दिया। एक तरह से उन्होंने श्रद्धा की शुद्धता जांचने का मीटर चढ़ावा चोरों के हाथ में ही थमा दिया। लिहाजा राम मंदिर चढ़ावा चोरी में आगे क्या होना है, इसे अभी से समझा जा सकता है। 

बहरहाल जो घट रहा है, जिस तरह से निर्लज्ज चढ़ावा चोरी की खबरें फैल रही हैं और जिस तरह से इसके लिए जिम्मेदार बड़े लोग पल्ला झाड़ रहे हैं, उसका सीधा असर मंदिरों में भक्तों के सैलाब पर पड़ने लगा है। बहुतों ने अपने मंदिर टूर के कार्यक्रम या तो रद्द कर दिए हैं या फिर आगे बढ़ा दिए हैं।

इस बीच अयोध्या के श्रीराम मंदिर में राम भक्तों की घटती कतारें और गिरते कारोबार की खबरें इस बात का स्पष्ट संकेत हैं। इसी संदर्भ में राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी का यह बयान भी हैरान करने वाला है कि इस चढ़ावा चोरी में उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती। 

फिर भी वो नैतिक आधार पर पाप प्रक्षालन के लिए धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। पद से इस्तीफे का (कु) विचार तो उनके मन को छू भी नहीं गया है। जबकि हकीकत में कोषाध्यक्ष होने के नाते उन्हीं की रवानगी सबसे पहले होनी थी। लेकिन अपराध के ‘नैतिक पाप प्रक्षालन’ का जो तरीका गोविंद गिरी ने बताया है, उसे तो सरकार को भारतीय न्याय संहिता में शामिल करने पर विचार करना चाहिए। दिलचस्प यह भी है कि गोविंद गिरी मूलत: कृष्ण भक्त हैं और भगवद गीता पर प्रवचन देते हैं, लेकिन उन्हें कोषाध्यक्ष श्रीराम मंदिर का बनाया गया है। 

धार्मिक पर्यटन पर देखा जा रहा है असर

हालांकि राम मंदिर ट्रस्ट भक्तों की संख्या और चढ़ावा घटने की खबरों का खंडन कर रहा है। लेकिन अयोध्या के कारोबारियों के चेहरे पर छाई उदासी और भक्तों की दुबली होती कतारें असली कहानी कह जाती हैं। इस चढ़ावा चोरी प्रकरण का सीधा दुष्प्रभाव उस धार्मिक पर्यटन प्रमोशन थ्योरी पर भी पड़ा है, जिसके माध्यम से सरकार देश की अर्थ व्यवस्था गति देने का सपना देख रही थी। 

राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड के आरोपियों को सजा होगी या नहीं, कितनी होगी, बड़े मगरमच्छ पकड़े जाएंगे या नहीं या फिर सिर्फ लीपापोती कर भोले हिंदुओं को ठगा जाएगा, इन सवालों के जवाब अभी मिलने हैं। मंदिर की व्यवस्थाओंमें सुधार के भी संकते संकेत हैं, लेकिन राम मंदिर सहित सभी बड़े मंदिरों का प्रबंधन बेदाग हो, इसके लिए क्या किया जा रहा है अथवा क्या किया जाना चाहिए, इस बारे में चीजें अभी बहुत स्पष्ट नहीं है।

ऐसी कोई सामान्य और कठोर आचार संहिता पर भी बात नहीं हो रही है। चिंता की बात तो यह है कि अधिकांश मंदिरों के प्रबंधकर्ता मंदिर को ‘कामधेनु’ समझ कर ही काम कर रहे हैं। श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी का अन्य मंदिरों के ‘चोरों’ के हौसलों पर कोई असर नहीं पड़ा है।

उदाहरण के लिए चार धाम में से एक बद्रीनाथ धाम मंदिर के चढ़ावे में चोरी की मंदिर की आंतरिक जांच पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गई है और एसआईटी ने मंदिर के एक कर्मचारी को िगरफ्तार भी किया है। उल्लेखनीय है कि मंदिर चढ़ावे में चोरी की शिकायत भैरव सेना के संस्थापक संदीप खत्री ने श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मुख्य कार्याधिकारी को लिखित रूप में की थी। राज्य सरकार ने अब इसकी जांच एक उच्चस्तरीय समिति को सौंपी है।

इसी तरह जम्मू के प्रसिद्ध श्री वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ावे की चांदी में 550 करोड़ रु. की हेराफेरी का मामला सामने आया है। एक भक्त ने इसकी शिकायत पुलिस में की थी। जम्मू की एक अदालत ने पुलिस को शिकायत के सम्बन्ध में पूरा रिकॉर्ड 29 जुलाई तक पेश करने निर्देश दिया है। बताया जाता है कि मंदिर में चढ़ावे के रूप में लगभग 550 करोड़ रुपये मूल्य की चांदी प्राप्त हुई थी, जिसमें से केवल 20 से 30 करोड़ रुपए मूल्य की चांदी ही असली थी, जबकि शेष चांदी नकली या मिलावटी थी।

इस कथित नकली चांदी में जहरीला 'कैडमियम' मिले होने की बात भी सामने आई है। यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है।  

गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर दान चोरी का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद चढ़ावा गिनती की कलेक्टर ने व्यवस्था को बदला दिया है। एक आरोपी को तुरंत नौकरी से निकाल दिया गया है। 

मप्र के आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित सिद्धपीठ मां बगुलामुखी मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच शुरू हो चुकी है। मंदिर के नाम पर तीन साल पहले यानी 2024 में बनी ‘नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति’ के पदाधिकारी अंडरग्राउंड हैं। नियम विरुद्ध बनी इस समिति में 12 सदस्य हैं। समिति की वो रसीद बुक भी सामने आई है, जिसके माध्यम से समिति के लोग चंदा इकट्ठा करते थे। इस पर "रजत सौंदर्यीकरण हेतु दान पत्र" लिखा है। समिति यह रसीद श्रद्धालुओंको दे रही थी।

जिला कलेक्टर प्रीति यादव के अनुसार मामले की  जांच समिति बना दी गई है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट तौर पर कुछ कहा जा सकता है। उल्लेखनीय है कि बगलामुखी मंदिर प्रबंध समिति के नाम से पहले से सरकारी समिति है, जिसके पदेन अध्यक्ष एसडीएम होते हैं। मंदिर के नाम और तस्वीरों का उपयोग कर फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम सहित कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी आईडी संचालित कर ठगी का धंधा अलग चल रहा है। 

 उधर बस्तर के प्राचीन मां दंतेश्वरी देवी मंदिर में चार दशकों से चढ़ावे, दान, सम्पत्ति, आभूषणों का कोई हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया है। जबकि 6 साल पहले कोर्ट ने हिसाब सार्वजनिक करने का आदेश दिया था। न कोई जांच हुई और न ही कोई रिपोर्ट सामने आई।  वर्ष 1981 के बाद से मंदिर की संपत्ति का सत्यापन भी नहीं हुआ। 

मंदिरों में भक्तों की आस्था के प्रतीक चढ़ावे और दान की चोरी के निकृष्ट अपराध और नैतिक अध:पतन का गलत संदेश पूरी दुनिया में जा रहा है। इसका असर धार्मिक पर्यटन पर पड़ने लगा है। 

चढ़ावा चोरी की घटनाएं सार्वजनिक होने से पहले देश में धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक पर्यटन 10.2 फीसदी की दर से बढ़ रहा था। भारत में कुल पर्यटन में 60 फीसदी हिस्सेदारी धार्मिक पर्यटन की हो चुकी थी। 2032 तक 2032 तक धार्मिक पर्यटन कारोबार के 4 खरब 24 अरब रूपए तक पहुंचने की उम्मीद थी। सभी प्रसिद्ध मंदिरों भक्तों के रेले उमड़ रहे थे, लेकिन अब इसकी रफ्तार मंद होने लगी है। हालात नहीं सुधरे तो अर्थ व्यवस्था के लिए भी यह बड़ा झटका होगा।



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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