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जब चुनौतियों का अंत न दिख रहा हो: कमजोर मानसून, महंगा तेल और बढ़ती आर्थिक चिंता

Jayantilal Bhandari जयंतीलाल भंडारी
Updated Fri, 12 Jun 2026 06:55 AM IST
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सार

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से सरकार के नीतिगत हस्तक्षेप की गुंजाइश सीमित है, इसलिए हर वर्ग के लोगों को महंगाई का मुकाबला करने के लिए आगे बढ़ना होगा।
 

indian economy challenges al nino impact monsoon west asia conflict uncertainty
महंगाई ने बढाई चिंता - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार

कमजोर मानसून और कच्चे तेल की महंगाई की दोहरी मार से अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीतिजनित मंदी की चुनौती बढ़ गई है। अमेरिका ने ईरान पर नए सिरे से हमले तेज कर दिए हैं, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने लगी हैं। हाल ही में विश्व मौसम विभाग ने कहा है कि इस वर्ष 2026 में भारत अल नीनो से अत्यधिक प्रभावित होगा। इससे भारत में कमजोर मानसून और सूखे की स्थिति कृषि, जल आपूर्ति और महंगाई के लिए चुनौतियां पैदा करेंगी। एशियाई विकास बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वर्ष 2026-27 में भारत में महंगाई 6.9 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच सकती है।


पेट्रोल, डीजल और गैस के महंगे होने का सबसे बड़ा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने लगा है। खासतौर से खाड़ी देशों से आयातित कच्चे माल से बने उत्पादों की कीमतें सबसे ज्यादा बढ़ी हैं। आम आदमी के जीवन से जुड़ी वस्तुएं, कपड़े और घरेलू उपकरण आदि भी महंगे होते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस समय दैनिक जरूरतों का सामान बनाने वाली कई फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) कंपनियां अपने उत्पादों की कीमत बढ़ाने या पैकेट के वजन घटाने के विकल्पों पर विचार कर रही हैं। ऐसे में एक ओर कमजोर मानसून और सूखे से निर्मित होने वाली चिंताओं पर ध्यान देना होगा, वहीं कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से निर्मित महंगाई की चिंताओं पर भी ध्यान देना होगा।
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किसानों को इस बड़े मौसमी संकट से बचाने के लिए सरकार ने एक जून से देशव्यापी 'खेत बचाओ' अभियान के तहत रणनीतिपूर्वक कदम आगे बढ़ाए हैं। इसके तहत किसानों को उनके इलाके और फसल के हिसाब से खास सलाह दी जा रही है, ताकि वे मौसम के जोखिमों को समझकर सही फसल लगाएं। किसानों को मौसम, मिट्टी और बाजार की मांग के हिसाब से कृषि उत्पादन संबंधी व्यावहारिक मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। सरकार ने एक व्यापक और सहयोगी ढांचा तैयार किया है, जिसमें पंचायतों, राज्य सरकारों, कृषि विज्ञान केंद्रों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों और स्थानीय कृषि विभागों को एक साथ जोड़ा गया है। नए कृषि मार्गदर्शन की पहुंच मजबूत करने के लिए 1,600 से ज्यादा विशेष टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड और पीएम-किसान जैसी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद भी करेंगी।
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हालांकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से सरकार के नीतिगत हस्तक्षेप की गुंजाइश सीमित है, इसलिए सरकार के साथ-साथ उद्योग-कारोबार और हर वर्ग के लोगों को महंगाई का मुकाबला करने के लिए आगे बढ़ना होगा। लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर अमल करना चाहिए, जिसमें किफायत बरतने की जरूरत बताई गई है। सरकार ने हाल ही में पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 85 प्रतिशत तक किए जाने का निर्णय लिया है, जिससे पेट्रोल की कीमत में प्रति लीटर 20 रुपये तक की कमी आएगी। सरकार को तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देना चाहिए। एथेनॉल और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल से जहां आम आदमी सस्ता और प्रदूषण-मुक्त सफर कर सकेंगे, वहीं कच्चे तेल का आयात कम होने से देश का पैसा बचेगा और किसानों की कमाई भी बढ़ेगी। सरकार ने एथेनॉल मिले पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी खत्म कर दी है। उम्मीद करें कि सरकार भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा को पेट्रोल-डीजल का विकल्प बनाने जैसे दीर्घकालीन उपायों के साथ रणनीतिपूर्वक आगे बढ़ेगी।
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