फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   is this the reason behind cracks in the relationship

घर के काम से अलग भी होता है 'मेंटल लोड', रिश्तों में बढ़ा सकता है तनाव

Sun, 23 Aug 2026 05:26 AM IST
निर्मल कांत जैंसी डन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
जैंसी डन, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 23 Aug 2026 05:26 AM IST
विज्ञापन
सार
जरूरी नहीं कि रिश्तों में तनाव की वजह हमेशा बड़ी ही हो। कई बार छोटी-छोटी घरेलू जिम्मेदारियां भी इसकी वजह बन जाती हैं।
loader
is this the reason behind cracks in the relationship
रिश्तों में दरार (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

घर में काम का बंटवारा दिखाई देता है-कौन खाना बनाएगा, कौन कपड़े धोएगा या बच्चों को स्कूल कौन छोड़ेगा। लेकिन, एक और काम है, जो दिखाई तो नहीं देता, पर रिश्तों में तनाव की बड़ी वजह बन सकता है। इसे कहते हैं ‘मेंटल लोड’, यानी घर-परिवार की जिम्मेदारियों को लेकर लगातार सोचते रहना। राशन कब खत्म होगा, बच्चे का डॉक्टर से अपॉइंटमेंट कब है, स्कूल की फीस कब जमा करनी है, बच्चों का होमवर्क कैसे होगा-इन सब बातों को याद रखना और समय पर उनका इंतजाम करना भी एक काम है। अक्सर इसकी जिम्मेदारी महिलाओं पर अधिक होती है। नतीजा होता है थकान, चिड़चिड़ापन और रिश्ते में बढ़ती दूरी।


क्लीवलैंड के डैन और मेगन निकोल्स की शादी को 10 साल से अधिक हो चुके हैं और उनके तीन बच्चे हैं। उनके रिश्ते में अक्सर मेगन के ‘मेंटल लोड’ को लेकर बहस होती थी। इससे उनके रिश्ते में तनाव बहुत बढ़ गया। आखिरकार, दोनों ने ‘मेंटल लोड कोच’ जैक वॉटसन की मदद ली।


वॉटसन घर चलाने में होने वाली उस मेहनत को समझाते हैं, जो अक्सर दिखाई नहीं देती। वह घरेलू जिम्मेदारियों को संतुलित करने की रणनीति भी बताते हैं। वह यह समझने में मदद करते हैं कि घर का काम सिर्फ हाथों से किया जाने वाला काम नहीं है। उसके पीछे योजना बनाना, चीजों को याद रखना और यह सुनिश्चित करना भी शामिल है कि काम पूरा हो। उनके मुताबिक, कपड़े धोकर तह कर देना सिर्फ 80 फीसदी काम है; उन्हें सही जगह रखना और डिटर्जेंट खत्म होने से पहले नया लाना 100 प्रतिशत। वॉटसन भी मेंटल लोड की समस्या से जूझ चुके हैं। घर के बड़े फैसलों और जिम्मेदारियों का मानसिक बोझ उनकी पत्नी पर पड़ता था। हालात बदतर होने पर दोनों कुछ समय के लिए अलग भी रहे। बाद में उन्होंने समस्या को समझा और अपने व्यवहार में बदलाव किया। उनकी सलाह का मूल-मंत्र सरल है-घर के काम में ‘मदद’ मत कीजिए, जिम्मेदारी साझा कीजिए। ‘केचअप कहां है?’ जैसे सवाल पूछने के बजाय पहले खुद उसे तलाशिए, क्योंकि हर छोटी चीज के लिए पार्टनर से उम्मीद लगाना भी उस पर मानसिक बोझ डालता है।

मेंटल लोड रिश्तों में तनाव, थकान, भावनात्मक दूरी और यहां तक कि तलाक का कारण बन सकता है। इसके उलट, जब दोनों साथी घर-परिवार की जिम्मेदारियों को बराबर संभालते हैं, तो रिश्ते में बातचीत, भरोसा और नजदीकी बढ़ सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed