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कैमरे पर घिरे नकवी: 'अपने लिए कुछ नहीं किया', यू-टर्न पर PCB का बचाव करते हुए यह बयान देकर खुद का मजाक बनवाया

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लाहौर Published by: स्वप्निल शशांक Updated Tue, 10 Feb 2026 11:25 AM IST
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सार

भारत के खिलाफ टी20 विश्व कप मैच के बहिष्कार का रुख अपनाने के बाद पाकिस्तान को आखिरकार फैसला बदलना पड़ा। आधिकारिक घोषणा से ठीक पहले पीसीबी प्रमुख मोहसिन नकवी से जब सवाल पूछे गए तो वह बचाव की मुद्रा में नजर आए। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने अपने लिए कुछ नहीं मांगा, बल्कि बांग्लादेश के लिए खड़ा हुआ था।

Boycott to Backtrack: Mohsin Naqvi Cornered on T20 World Cup 2026 U-Turn
नकवी ने खुद का मजाक बनवाया - फोटो : Twitter
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विस्तार

कई दिनों की तनातनी और राजनीतिक बयानबाज़ी के बाद पाकिस्तान ने 15 फरवरी को भारत के खिलाफ खेलने का फैसला कर लिया, लेकिन इस फैसले से ठीक पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचे, जहां उनसे बहिष्कार पर तीखे सवाल पूछे गए। जैसे ही कार्यक्रम खत्म हुआ, एक इंटरव्यूअर ने उन्हें रोक लिया और अंदर की बात जाननी चाही। यहीं से यह लगभग साफ हो गया कि पाकिस्तान अब पीछे हटने वाला है।
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'अपने लिए कुछ नहीं किया'
जब नकवी से पूछा गया कि क्या आईसीसी से बातचीत में पाकिस्तान ने अपने लिए कोई रियायत हासिल की, तो उन्होंने साफ कहा, 'अपने लिए कुछ नहीं किया।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'बस अब थोड़ी देर में फैसला हो जाएगा।' इंटरव्यूअर ने फिर पूछा, 'अच्छी खबर आ रही है?' नकवी ने जवाब दिया, 'हम तो हर वक्त अच्छी खबर ही देते हैं।'
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बांग्लादेश का हवाला
नकवी ने अपने रुख को सही ठहराने के लिए बार-बार बांग्लादेश का नाम लिया। उन्होंने कहा, 'आपने बांग्लादेश की स्टेटमेंट देखी होगी। बांग्लादेश ने रिक्वेस्ट की है पाकिस्तान से कि हम मैच खेलें। निश्चित तौर पर, उनका सारा मामला तय हुआ है, तभी उन्होंने ये रिक्वेस्ट की है।'

एक और सवाल आया कि क्या पाकिस्तान ने अपनी कोई शर्त मनवाई? नकवी का जवाब था, 'हमने बांग्लादेश के लिए स्टैंड लिया था। उन्हीं की बात थी। हमने अपने लिए कुछ नहीं किया।' यानी पूरा नैरेटिव यही बनाया गया कि पाकिस्तान सिद्धांत के लिए खड़ा था, खुद के फायदे के लिए नहीं।
 

पर्दे के पीछे की हकीकत
हालांकि कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक तस्वीर इतनी सीधी नहीं थी। पाकिस्तान की ओर से कई मांगें रखी गई थीं, जिनमें भारत के साथ द्विपक्षीय सीरीज बहाल करने जैसी बातें भी शामिल थीं, लेकिन आईसीसी ने इन प्रस्तावों को मानने से इनकार कर दिया। आखिरकार जो रास्ता निकला, वह टूर्नामेंट को पटरी पर रखने वाला था कि पाकिस्तान खेलेगा।

आईसीसी का आधिकारिक रुख
ड्रामा खत्म होने के बाद आईसीसी ने भी बयान जारी किया। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने साफ कहा, 'मौजूदा भावना को देखते हुए यह सहमति बनी है कि सभी सदस्य आईसीसी इवेंट्स में अपनी भागीदारी की शर्तों का सम्मान करेंगे और टूर्नामेंट की सफलता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।' मतलब साफ था- प्रतिबद्धताएं निभानी होंगी।

छवि बचाने की कोशिश?
राजनीतिक और खेल विश्लेषकों का मानना है कि नकवी कैमरे पर यह दिखाना चाहते थे कि पाकिस्तान खाली हाथ नहीं लौटा। इसलिए “हमने अपने लिए कुछ नहीं मांगा” वाली लाइन पर जोर दिया गया, लेकिन आलोचक पूछ रहे हैं कि अगर अंत में खेलना ही था, तो बहिष्कार की इतनी बड़ी घोषणा क्यों?

नतीजा क्या निकला
आखिरकार पाकिस्तान उसी जगह पहुंचा जहां उसे होना था, मैदान पर। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार वापसी कैमरों के सामने, सवालों के बीच और काफी दबाव में हुई। 15 फरवरी को जब मैच शुरू होगा, तब शायद यह विवाद पीछे छूट जाए, लेकिन यू-टर्न वाला अध्याय क्रिकेट राजनीति की फाइल में दर्ज रहेगा।
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