सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Cricket ›   Cricket News ›   Amar Ujala Samwad: Former Indian Cricketer Mohammad Kaif and Aakash Chopra live updates and key moments

Amar Ujala Samwad: श्रीलंका के खिलाफ वैभव सूर्यवंशी की लड़ाई पर क्या बोले कैफ? कहा- खराब समय में साथ दीजिए

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Wed, 24 Jun 2026 04:26 PM IST
विज्ञापन
सार

Amar Ujala Samwad, Mohammad Kaif and Aakash Chopra: अमर उजाला देहरादून में 'अमर उजाला संवाद उत्तराखंड 2026' का आयोजन कर रहा है। सतत विकास की थीम पर आयोजित हो रहे इस संवाद में विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां शामिल हो रही हैं। इसी कड़ी में पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ और आकाश चोपड़ा ने बात की। जानिए चर्चा के दौरान और किन विषयों पर बात हुई।

Amar Ujala Samwad: Former Indian Cricketer Mohammad Kaif and Aakash Chopra live updates and key moments
मोहम्मद कैफ - फोटो : Amar Ujala Graphics
विज्ञापन

विस्तार

अमर उजाला देहरादून में 'अमर उजाला संवाद उत्तराखंड 2026' का आयोजन कर रहा है। सतत विकास की थीम पर आयोजित हो रहे इस संवाद में विभिन्न क्षेत्रों की ऐसी हस्तियां शामिल हो रही हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में न सिर्फ पहचान बनाई है, बल्कि लाखों लोगों को प्रभावित भी किया है। इस कार्यक्रम में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज और मशहूर कमेंटेटर आकाश चोपड़ा तथा पूर्व भारतीय बल्लेबाज मोहम्मद कैफ ने भी शिरकत की और क्रिकेट से जुड़े विषयों पर चर्चा की।



आइए जानते है इन दोनों खिलाड़ियों ने क्या बोला...

आकाश चोपड़ा: काफी अच्छा लग रहा है देहरादून आकर। मेरे दोस्त कैफ भी साथ में हैं। जब आपने खेलना शुरू किया था तो कुछ लोग ही होते थे जो छोटे शहरों से खेलने आते थे। अब कहानी बदल चुकी है तो क्या बदला है। पहले इतना मुश्किल क्यों था और अब इतना आसान कैसे हो गया है? हमारा कप्तान रांची से आया, उसने उसे विश्व के नक्शे पर डाला, एक बच्चा ताजपुर से आता है उसका नाम वैभव सूर्यवंशी होता है। एक गोपालगंज से आता है उसका नाम साकिब हुसैन होता है। अब सारे छोटे शहरों से आते हैं तो ऐसा क्या बदला?

मोहम्मद कैफ- मेरे ख्याल से सबसे बड़ी बात है एक्सपोजर। आजकल आईपीएल आ गया है, घरेलू क्रिकेट में मुकाबले बढ़ गए हैं। काफी मौके मिलते हैं, मतलब आजकल तो बस ऐसा हो गया है कि आप बस अपने आप को तैयार कर लो। स्काउटिंग के लोग घूम रहे होते हैं जो छोटे-छोटे शहरों में जाते हैं जो ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को खोजते हैं। वैभव सूर्यवंशी का नाम आपने लिया तो उनके बारे में चर्चा हुई होगी। लोगों ने उनको खेलते हुए देखा है, लेकिन पहले ऐसा नहीं था। मैं अगर यूपी के लिए खेला रणजी, तो मैं भारत के लिए अंडर-19 विश्व कप खेलने के बाद मेरा नाम रणजी में आया। वहां मीडिया की बहुत भूमिका थी, श्रीकांत सर हमारे कोच थे। उन्होंने कहा कि मोहम्मद कैफ अच्छे खिलाड़ी हैं, ये युवा हैं। इनका भविष्य अच्छा है। उस बयान के बाद मुझे अंडर-19 विश्व कप खेलने के बाद मुझे रणजी में खेलने का मौका मिला। मैं भारत के लिए खेलने के बाद रणजी में आया। एक्सपोजर हो गया था, मीडिया लिखने लगी थी। वो उस वक्त सभी के साथ नहीं होता था। कुछ ही लोग थे जिनके साथ ऐसा होता था। अब क्या हो रहा है कि 15 साल का लड़का भी अगर गांव में अच्छा खेल रहा है ना तो वहां पर लोग देखने पहुंच रहे हैं। तुरंत खबर फैल जा रही है। लोगों ने आईपीएल में अपने स्काउट के लोग रखे हुए हैं कि जाकर देखो। आजकल मौके इसलिए मिल रहे हैं क्योंकि अपने आप को बेहतर करो और खुद पर फोकस करो, लोग हैं जो घर से निकालकर लेकर जाएंगे। हम यहां देहरादून में बैठे हैं और यहां भी फॉर्मूला समान ही है। देहरादून में भी जो बच्चे अच्छा खेल रहे हैं वो बेहतर करें लोग पहुंच जाएंगे और घर पर आकर लेकर जाएंगे कि बॉस आप हमारे लिए खेलो क्योंकि आप अच्छे खिलाड़ी हो।

विज्ञापन
विज्ञापन

आकाश चोपड़ा- एक और चीज जो बदली है वो ये कि बड़े शहरों में डिस्ट्रेक्शन बहुत है। बच्चों के पास करने के लिए बहुत चीजें होती हैं। साउथ मुंबई का बच्चा क्रिकेट नहीं खेलता, वो फुटबॉल देखता है। जो ठाणे में रहता है वो क्रिकेट खेलता है। ऐसा ही दिल्ली में भी होता है। छोटे शहरों में आग अभी भी है और बड़े शहरों में आग खत्म हो गई है।अब धूप में खड़े होने का मन उतना करता नहीं है। कम बच्चे खड़े होते हैं अब। गांव या छोटे शहरों में ये चीज ज्यादा है।

आकाश चोपड़ा (सवाल)- कैफ आपकी फील्डिंग कमाल की थी। शुरुआत में तो आपका नाम फील्डर के तौर पर उछला था। लोग कहते थे कि क्या कमाल का फील्डर आया है। तब भारत में फील्डिंग का उतना फैशन नहीं था, लोग इतने पापुलर नहीं थे। आईपीएल में अभी हमने देखा कि 200 कैच छूटे। भारतीय टीम में भी रहता है कि आप सबसे बेहतर फील्डर बन सकते हैं। अगर आप आईपीएल के दृष्टिकोण से देखें तो क्या गलत हो रहा है? हर मैच में चार कैच छूट रहे हैं, ऐसा क्यों हो रहा है?

कैफ- दो बातें हैं एक तो। एक तो लोग दिख रहे हैं और अपनी बॉडी पर काम कर रहे हैं, ये दिखता है। फुटबॉल का विश्व कप चल रहा है, वहां 90 मिनट भागना है। वहां अलग फिटनेस चाहिए होती है। क्रिकेट कौशल आधारित खेल है। लोग आजकल फुटबॉल ज्यादा देख रहे हैं। क्रिकेट ऐसा खेल है जहां दिखने से ज्यादा आपको यह पता होना चाहिए कि आप कितने फिट हैं। क्या मैच में आप ग्राउंड पर भागकर कैच पकड़ सकते हैं। मैंने नोट किया है कि आजकल आईपीएल में बहुत फिट दिखते हैं, आप उनके इंस्टाग्राम पर फोटो देखो तो फिट नजर आते हैं, जिम में वर्कआउट करते हुए दिखते हैं। क्रिकेट ऐसे खेल हैं, मेरे ख्याल से जो लोग ग्राउंड पर ज्यादा समय बिताते हैं वो ज्यादा बेहतर है। जिम का अपना महत्व है, लेकिन आपको बैलेंस पाना होता है कि ग्राउंड की फिटनेस और जिम की फिटनेस का संतुलन रखना होता है। मुझे ऐसा लगता है कि फील्डिंग का जो ग्राफ नीचे आया है, हालांकि, बहुत अच्छे कैच पकड़े भी जा रहे हैं। लेकिन जो कैच छूट रहे हैं वो आसान होते हैं। मैं हमेशा हैरान रहता हूं कि इतना आसान कैच कैसे छूट गया। हमने आईपीएल में जब अभी कमेंट्री की तो 200 कैच छूटे हैं। ये नंबर बहुत बड़े हैं। इतने कैच छूट रहे हैं तो कहीं ना कहीं तो गलत हो रहा है। जो आपका अभ्यास है, ट्रेनिंग सिस्टम है या फोकस है। मेरे ख्याल से फोकस भी थोड़ा हट गया है। फोकस ज्यादा बैटिंग-बॉलिंग पर है। अतिरिक्त बल्लेबाजी तो कर लेंगे। आधा-एक घंटा रुककर वो बल्लेबाजी कर लेंगे, लेकिन अतिरिक्त फील्डिंग करने में उनको दिक्कत आती है। मैं देख रहा हूं कि ओवरऑल फील्डिंग में थोड़ी सी गिरावट आई है। पहले के जमाने में लोग दिखने में फिट नहीं थे और लगता था कि यार ये इतना तेज नहीं भाग पाएगा। मैं गारंटी से कह सकता हूं कि उस जमाने में कैच कम छोड़े जाते थे। चाहे भागने में धीमे हों। मैं फील्डिंग नहीं, कैच की बात कर रहा हूं। हमारे महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर साहब, मैंने उनके हाथ से कैच छूटते हुए नहीं देखा। अगर कोई मुझे बता दे कि उनसे कैच छूटा हो। कोई बता सकता है कि सचिन ने आसान सा कैच छोड़ा हो। नहीं देखा होगा। अगर हुआ भी होगा तो एक बार। सचिन का रुटीन फील्डिंग का था। वह बल्लेबाजी करते थे, लेकिन उनका जो रुटीन था कि मुझे फील्डिंग को अपने अभ्यास में लेकर आना है। आधा घंटा-एक घंटा फील्डिंग रोज करनी है। ये दो महीने का खेल नहीं है। आप रोज साल भर तक इसमें काम करोगो तो बेहतर हो जाओगे। वहां पर गिरावट आई है आकाश। फील्डिंग जितनी मेहनत और शिद्दत चाहिए, वो फोकस थोड़ा सा कम हुआ है। इसी वजह से दिखने में तो लोग फिट दिख रहे हैं, लेकिन मैच में जो दबाव में कैच पकड़ना होता है, वहां पर गिरावट आई है।

आकाश- फर्क तो पड़ा है। अगर भारत को विश्व की सबसे बेहतरीन टीम बनना है तो हर चीज में बेहतर होना जरूरी है। सबसे अच्छे बल्लेबाज, सबसे अच्छे गेंदबाज और फील्डिंग ऐसी चीज है जो आपकी अपने हाथ में होती है। बल्लेबाजी-गेंदबाजी फिर भी परिस्थिति पर निर्भर होती है, लेकिन हवा भी अब हर जगह एक जैसी होती है। ग्राउंड भी बढ़िया ही होते हैं।

विज्ञापन

Amar Ujala Samwad: Former Indian Cricketer Mohammad Kaif and Aakash Chopra live updates and key moments
मोहम्मद कैफ - फोटो : Amar Ujala Graphics

आकाश (सवाल)- टेस्ट क्रिकेट अभी कम पॉपुलर है और उसमें बदलाव चल रहा है। भारतीय क्रिकेट का यह ट्रांजिशन कब तक होगा? आप टेस्ट में न्यूजीलैंड से घर पर हारे उसके बाद आप दक्षिण अफ्रीका से भी हारे। अगर आप वेस्टइंडीज को हराते हैं तो वो बहुत बड़ी बात नहीं होगी। ट्रांजिशन समाप्त होने वाले है या हम इस बारे में कहां तक पहुंचे हैं। रोहित गए हैं तो उनकी जगह यशस्वी और केएल राहुल ओपनिंग कर रहे हैं। नंबर चार पर कोहली खेलते थे, अब चार पर गिल खेलते हैं। आप शायद रोहित और कोहली को टेस्ट में मिस नहीं करते। तो सवाल यह है कि ट्रांजिशन खत्म हो गया है या अभी कुछ बाकी है?

कैफ- देखिए, आप किस टीम से मैच खेल रहे हैं वो ज्यादा जरूरी है। अफगानिस्तान, वेस्टइंडीज मुझे लगता है कि ये लोग अभी उस स्तर पर पहुंचे नहीं है। विश्व क्रिकेट में इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका को जोड़ लो, ये चार-पांच टीमें हैं जिनके सामने हमें अच्छा खेलना होता है। बाकी तो आप और नाम मत लो, मैं सिर्फ टेस्ट मैच की बात कर रहा हूं। घर में उनके सामने जब थोड़ी अच्छी टीमें तैयारी करके आती हैं, उनकी रणनीति थोड़ी अच्छी होती है कि भारतीय परिस्थितियों में भारत को कैसे हराना है। ये टीमें तैयारी करके आती हैं। उनसे हम हार रहे हैं। हम हारे किससे हैं, न्यूजीलैंड से जो अच्छी टीम है, अच्छी प्लानिंग करके आती है। हारे हम दक्षिण अफ्रीका से, वो अच्छी टीम है प्लानिंग करके आए। अफगानिस्तान और वेस्टइंडीज से जीत गए हम लोग। तो उनका नाम मत लो। मैं अच्छी टीम की बात कर रहा हूं। वहां पर मुझे ऐसा लगता है कि बल्लेबाजी में गिरावट आई है। जब हम बात करते हैं कि स्पिन कैसे खेलना चाहिए। मैं तो हैरान होता हूं कि, स्पिनर और वो भी बाहर के स्पिनर जो 11 में कभी खेलते भी नहीं है। जब वह अपने देश के लिए वहां खेलते हैं तो वह एकादश में भी नहीं होते हैं। लेकिन भारत में ऑफ स्पिनर आ गया और हम उसके सामने ढेर हो रहे हैं। ये बहुत बड़ी कमजोरी निकलकर आई है। बल्लेबाज का नाम मत लो, सभी को मैं एक ही श्रेणी में रख रहा हूं। घर पर हम फ्रेंडली पिचें बनाते हैं, हमें टर्निंग पिच पसंद है, लेकिन हम खुद इसमें फंस रहे हैं। यहां पर काम करने की जरूरत है आकाश। बहुत काम करना है। उसमें चाहे घरेलू क्रिकेट की बात कर लो जहां हम ग्रीन टॉप पर खेलते हैं। सपाट पिचें आईपीएल में पैर निकालो और मारो। अगर टेस्ट मैच घर पर जितना है तो स्पिन खेलने का जो हमारा रिवाज था, उसको दोबारा लाना होगा। पहले टीमों को लगता था कि हम भारत जाएंगे और हमारी ताकत तेज गेंदबाजी है, उससे हम उन्हें मात देंगे। उन्होंने अपना ट्रेंड बदल दिया। अब वह हमारे यहां स्पिनर लेकर आते हैं। घर पर स्पिनरों के सामने हम आउट हो रहे हैं। मुझे लगता है कि टेस्ट मैच में काम करने की जरूरत है। सीमित ओवर के प्रारूप में हम शीर्ष स्तर की टीम हैं। वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी हमें मिल रहे हैं। 15 साल का लड़का है, जान डाल दी है विश्व क्रिकेट में। सफेद गेंद प्रारूप में हमारा दबदबा बना रहेगा। इस प्रारूप में हमेशा आगे होंगे। घर पर टेस्ट मैच में स्पिन के खिलाफ हमें काम करना होगा।

आकाश चोपड़ा ने जब पूछा कि क्या व्हाइट बॉल और रेड बॉल क्रिकेट में अलग टीम होनी चाहिए या जो प्रथा चल रही है कि एक ही खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट खेले, वैसा ही चलता रहे?

इस पर कैफ ने कहा- भारतीय क्रिकेट जो है वो ब्रांड ड्रीवेन है। ब्रांड के पीछे हम भागते हैं। आईपीएल क्या है, वो मंच देता है, पर वो बिजनेस भी है। जो फ्रेंचाइजी के लोग टीम खरीदते हैं, वो ये नहीं देखते कि हमें खिलाड़ी को ग्रूम करना है। पर उनको अपनी जेबें भरनी हैं। ब्रांड मतलब विराट कोहली, रोहित शर्मा, शुभमन गिल बन रहे हैं। तो ये जो ब्रांड खिलाड़ी हैं, उनको आप दरकिनार नहीं कर पाओगे। जब ये लोग खेलते हैं, तो उत्साह बनता है, मीडिया फॉलो करती है, पैसे आते हैं। तो अलग टेस्ट बननी चाहिए, ये मुश्किल है। 

कैफ ने कहा- बीसीसीआई के ब्रांड खिलाड़ियों की जरूरत भी है। विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट छोड़ा है...अभी विराट का एक बयान आया था कि मैंने टेस्ट क्रिकेट इसलिए छोड़ा क्योंकि मुझे टीम में वेलकम फील नहीं हो रहा था। मुझे लग रहा था कि टीम में लोग चाह रहे थे मैं न रहूं। वो इसलिए छोड़कर गए। विराट का मानना था कि टेस्ट क्रिकेट सबसे मुश्किल फॉर्मेट है और मैं उदाहरण बनूंगा कि मैं टेस्ट मैच में पांच दिन खड़ा रहूंगा। उनका कहना था कि टेस्ट का प्लेयर बनना है मुझे, लेकिन अब वही विराट कोहली कह रहे हैं कि उन्हें टीम में वेलमक फील नहीं हो रहा। उन्हें ऐसा महसूस हो रहा कि टीम और टीम मैनेजमेंट के लोग कह रहे हैं- जाओ तुम जाओ, हम मैनेज कर लेंगे। उनको ऐसी फीलिंग आई, इसलिए उन्होंने रिटायरमेंट लिया है। फॉर्म की बात तो अलग है। फॉर्म तो आता जाता रहता है। वो तो लाइफ का फंडा है। कभी बुरा तो कभी अच्छा दिन। पर उनका कहना था कि टीम के साथ साथ लोगों ने ऐसा महसूस कराया कि अब आपका टाइम आ गया है, अब आप टीम में वेलकम नहीं हो। इसलिए ब्रांड चाहिए होता है, पर विराट कोहली गए क्यों, क्योंकि उनको थोड़ा सा एक स्वागत एक एट होम फीलिंग जो होता है, वो नहीं मिल रहा था। उन्होंने भी कहा कि ठीक है यार देश के लिए इतनी कुर्बानी दी मैंने, इतने साल लगाए क्रिकेट पर, पसीना बहाया, सबकुछ बना कर दिया है, अब मुझे ऐसा फील हो रहा कि मेरी जरूरत नहीं है। तो वो चले गए भाई। लोग कह रहे हैं कि उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया, क्योंकि उनकी कॉल थी। मैं कहता हूं कि यह विराट की कॉल थी, पर ऐसे हालात पैदा हो गए कि उनको कॉल लेनी पड़ी। 

कैफ ने कहा- लोग कह रहे कि विराट ने रिटायरमेंट ले ली क्योंकि टेस्ट में उनसे रन नहीं बन रहे थे, वो आउट ऑफ फॉर्म थे, इसलिए मना कर दिया। मैं बता दूं कि टेस्ट विराट का चहेता फॉर्मेट था। उनका पहला प्यार टेस्ट ही है। तो वो नहीं छोड़ते। कुछ ऐसा डेवलपमेंट हुआ कि उन्हें मजबूरी में बोलना पड़ा कि ठीक है मैं जा रहा हूं। इसलिए मैं कहूंगा कि ये बहुत मुश्किल काम है कि आप अलग अलग खिलाड़ियों को अलग अलग फॉर्मेट से जोड़ो।

आकाश (सवाल)- कितना संभव है ये। अगर आप मुट्ठी भर टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं। केएल राहुल जिन्होंने अभी अच्छे रन बनाए। उसके साथ यशस्वी जायसवाल जिन्होंने सीजन में 450 रन बनाए। तीसरे नंबर पर साई सुदर्शन आते हैं जो आईपीएल में ऑरेंज कैप के करीब थे, नंबर चार पर गिल खेलते हैं। ऋषभ पंत हैं या फिर ध्रुव जुरेल हैं, ये सब आईपीएल खेलते हैं रोज तो उनसे कैसे आप ये उम्मीद करते हैं कि वो स्पिन बेहतर कर लें क्योंकि ऐसा करना चाहिए। लेकिन छह महीने में अगर एक बार टेस्ट मैच होता है। अफगानिस्तान वाला मैच तो हम कह रहे हैं कि काउंट ही नहीं करना चाहिए। उससे पिछला टेस्ट मैच हमारा दिसंबर में हुआ था और अगला जो टेस्ट मैच है वो अगस्त में है। ये आठ महीने जो बीच में हैं जिसमें हमने बहुत सारे सफेद गेंद के मैच खेले हैं। तो मेहनत क्यों करें। श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट के बाद फिर छह महीने का ब्रेक मिल जाएगा। तो ये एक सीमित ओवर क्रिकेटर के लिए कितना आसान और मुश्किल है।

कैफ- मैं हैरान दो बातों पर था जब भारत घर पर हारा। हमें खुद नहीं पता कि घर पर हमें किस तरह का पिच चाहिए। पहला मैच था ईडन गार्डेंस कोलकाता में, हम ऑस्ट्रेलिया में थे तीन दिन के बाद टेस्ट मैच घर पर था। वहां से फोन कॉल आया कि भाई टर्निंग पिच बनाओ हम विपक्षी टीम को हरा देंगे। हमसे 120 या 124 चेज नहीं हुए। पहला मैच हम टर्निंग पिच पर हार गए। फिर हम पहुंचे गुवाहाटी। गुवाहाटी में हमने कहा कि टर्निंग पर खेल नहीं पा रहे हैं, हम अब थोड़ा सीमिंग पर खेलेंगे। सीमिंग पर हमें यानसेन मिल गए। यानसेन में हमें फंसा लिया। एक तो बल्लेबाजी पर काम करना है और जो भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कभी नहीं हुआ कि हमें हमारे घर पर हमारी ताकत क्या है उसका अंदाजा नहीं है। ये एक बड़ा बदलाव देखा मैंने। पहले टर्निंग पर हारे और फिर आप सीमिंग पर हारे। इसका मतलब आपको खुद नहीं पता कि हमारी ताकत क्या है। पहले वहां पर काम करना है कि हमें सीमिंग पर खेलना है, पाटा पर खेलना है या टर्निंग पर खेलना है। कोच हमारे गौतम गंभीर साहब हैं और जो चयनकर्ता घूमते हैं उनके और बीसीसीआई को भी ये तय करना होगा। दूसरी बात बल्लेबाजी में कैसे बदलाव करना है। उसका आसान सा फंडा है कि आपको घरेलू में जो आपने छह एमएम और चार एमएम ग्रास का नियम जो आपने बनाया है उसको नॉर्मलाइज करना पड़ेगा। पहले हम लोग आकाश अगर वानखेड़े पहुंचे तो बाउंसी पिच, उसका जो नेचुरल पिच है वो बाउंसी है। चेन्नई पहुंचे तो टर्निंग पिच। हम लोग घरेलू क्रिकेट में अलग-अलग शहर में जाकर, अलग-अलग पिच पर खेलकर बड़े हुए। हमने टर्निंग पिच पर भी खेला है। वीवीएस लक्ष्मण हैं, द्रविड़ हैं, सचिन हैं वो इसलिए महान बल्लेबाज बन पाए क्योंकि उनकी जो परवरिश थी वो हर पिच पर खेलकर बड़े हुए। अभी क्या हो रहा है कि हर जगह छह एमएम की ग्रास है। बीसीसीआई को ये नियम में बदलाव करना होगा। जो आप बोल रहे हो कि टाइम निकालना होगा। आप कह रहो कि जाकर रणजी खेलो। अय्यर को हमने करार नहीं दिया, ईशान किशन को नहीं दिया, इनको बोला गया कि आप जाकर घरेलू क्रिकेट खेलो। वो बात बिल्कुल ठीक है, रणजी खेलना चाहिए पर रणजी आप किस पिच पर खेल रहे हो। क्या हम वहां पर कुछ फायदा हासिल कर पा रहे हैं। मुझे लगता है कि हमें वापस पुरानी रुटीन पर लौटना चाहिए जहां चेन्नई में टर्निंग, पंजाब में काली मिट्टी की पिच, वेस्ट में बाउंसी पिच, ऐसे करके बीसीसीआई को काम करना चाहिए। जहां पर हर तरह की परिस्थिति में हमारे युवा खिलाड़ी खेलकर बड़े हों और परिपक्वता टर्निंग पिच पर आ जाए और सीमिंग पर भी आ जाए।

आकाश (सवाल)- सही बात है कि यह सभी चीजें होनी चाहिए। क्या यह भी सोचना चाहिए कि टेस्ट क्रिकेट के लिए अलग टीम होनी चाहिए? क्योंकि बच्चों के पास समय ही नहीं है। गिल, यशस्वी या साई सुदर्शन, ये सभी इतनी क्रिकेट खेल रहे हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट सिर्फ छह महीने होती है। अगर विंडो मिलता है तो इन खिलाड़ियों के पास दो-तीन मैच बचते हैं। ऐसे में यह उम्मीद करना कि वो तीन मैच खेलकर अचानक से अपनी तकनीक बदल ले जिससे वह टेस्ट क्रिकेट अच्छी तरह खेलने लगे।


आकाश (सवाल)- क्या आजकल के जो बच्चे हैं, वो सिर्फ आईपीएल खेलना चाहते हैं या फिर उनमें भारत के लिए खेलने का भी उतना ही जज्बा है?

कैफ (जवाब)- आईपीएल में खेलने की चाहत है, ऐसा हो रहा है। तभी मैंने विराट कोहली का उदाहरण दिया। कोहली जैसा खिलाड़ी आपको टीम में चाहिए, अभी भी चाहिए। आईपीएल देखकर लोग बड़े हो रहे हैं। आजकल के बच्चों का जो उद्देश्य है, सपना है, वो आईपीएल खेलना है। उस तरह से वो तैयारी भी करके आते हैं। बच्चे छक्के मारने की प्रैक्टिस करके बड़े हो रहे हैं। इसलिए मैं कह रहा हूं कि विराट चाहिए। जब कोई नया बंदा कोहली को देखता है खेलते हुए तो सोचता है कि ये बोल भी रहा है और 100 भी मार रहा है। टेस्ट सबसे मुश्किल फॉर्मेट है। इसमें अगर आपने खुद को चुनौती दी और अच्छा किया, तो जो सुकून मिलता है, वह बता नहीं सकते। कोहली ने उदाहरण सेट किया। इसलिए अब जब वह प्रारूप छोड़ चुके हैं तो लोगों को लग रहा है कि टेस्ट मैच छोड़ो, आईपीएल खेलो। क्योंकि एक छक्के पर आप हीरो बन जाते हैं।

हिंदी कमेंट्री का जाना-पहचाना नाम हैं आकाश
आकाश हिंदी कमेंट्री में जाना-पहचाना नाम हैं। 19 सितंबर 1977 को उत्तर प्रदेश के आगरा में जन्मे आकाश चोपड़ा ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत ओपनिंग बल्लेबाज के रूप में की। घरेलू क्रिकेट में उन्होंने दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व किया और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 10 हजार से अधिक रन बनाकर खुद को देश के सबसे सफल घरेलू बल्लेबाजों में शामिल किया।

कैफ का अंतरराष्ट्रीय करियर
अंतरराष्ट्रीय करियर में मोहम्मद कैफ ने 13 टेस्ट और 125 वनडे मैच खेले। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 624 रन हैं, जिसमें एक शतक और तीन अर्धशतक शामिल हैं, जबकि वनडे क्रिकेट में उन्होंने 2753 रन बनाए। इस प्रारूप में कैफ ने दो शतक और 17 अर्धशतक लगाए। बल्लेबाजी के अलावा उनकी फुर्तीली फील्डिंग भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकतों में से एक रही। उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ फील्डरों में गिना जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें क्रिकेट समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। क्रिकेट जगत की अन्य खबरें जैसे क्रिकेट मैच लाइव स्कोरकार्ड, टीम और प्लेयर्स की आईसीसी रैंकिंग आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed