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83 Movie: मुंह में बाउंसर लगने के बावजूद खेलना चाहते थे दिलीप वेंगसरकर, आदिनाथ को एड शूट के बहाने मिला उनका रोल
Sat, 25 Dec 2021 11:27 AM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Sat, 25 Dec 2021 11:27 AM IST
सार
फिल्म 83 में दिलीप वेंगसरकर का रोल करने वाले आदिनाथ कोठारे ने बताया है कि पानी फिल्म के लुक की वजह से उन्हें यह रोल मिला। हालांकि उन्हें एक विज्ञापन में काम के लिए बुलाया गया था।
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83 फिल्म में आदिनाथ कोठारे दिलीप वेंगसरकर के लुक में
- फोटो : ANI
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विस्तार
1983 वर्ल्डकप के ऊपर बनी फिल्म 83 में कई अनसुनी कहानियां बताई गई हैं। इस फिल्म में भारत की पूरी टीम को दिखाया गया है और हर खिलाड़ी से जुड़ी कहानियां सामने आई हैं। फिल्म में खिलाड़ियों का किरदार निभाने वाले अभिनेताओं ने भी अपने अनुभव साझा किए हैं और बताया है कि कैसे उस टीम के खिलाड़ी अपना सब कुछ झोंक कर भारत को जिताना चाहते थे। दिलीप वेंगसरकर का किरदार निभाने वाले आदिनाथ कोठारे ने भी उनके बारे में कई बातें बताई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वो पहले एक विज्ञापन में काम के लिए गए थे, लेकिन उनके पानी फिल्म के लुक की वजह से उन्हें यह फिल्म मिल गई।
आदिनाथ कोठारे ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि पानी फिल्म की शूटिंग करने के बाद उनका वजन लगभग 10 किलो कम हो चुका था। उन्होंने मूछें रखी हुई थी और उनका रंग भी सांवला हो रहा था। ऐसे समय पर मुकेश छाबरा के ऑफिस से उन्हें एक एड फिल्म के लिए फोन आया। जब वो वहां पहुंचे तो उन्हें पता चला कि एड फिल्म में काफी अलग लुक की जरूरत थी। जब वो वहां से लौट रहे थे तो एक असिस्टेंट ने उन्हें रोका और कहा कि वो दूसरे रोल के लिए फिट हो सकते हैं। इसके बाद आदिनाथ को दिलीप वेंगसरकर के कई वीडियो दिखाए गए और उनसे पूछा गया कि क्या वो उनका अंदाज अपना सकते हैं।
मुझे पता था यह बड़ा प्रोजेक्ट होगा
आदिनाथ ने बताया कि जब उन्हें यह पता चला कि उनका रोल कबीर खान की फिल्म 83 के लिए है, जिसमें रणवीर सिंह कपिल देव का किरदार निभा रहे हैं तो उन्हें पता था कि यह बड़ा प्रोजेक्ट होने वाला है। उन्होंने ऑडिशन दिया, लेकिन लंबे समय तक उन्हें कोई फोन नहीं आया। वो इस बारे में लगभग भूल चुके थे। इसके बाद एक दिन उनके पास फोन आया और उनसे पूछा गया कि क्या वो अगले दिन कबीर खान से मिल सकते हैं। वो काफी उत्साहित थे। उन्होंने दिलीप वेंगसरकर के बारे में पढ़ा, शेविंग की, एक्सरसाइज की और कबीर से मिलने पहुंचे।
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कबीर खान के बारे में बात करते हुए आदिनाथ ने कहा कि कबीर सर बहुत ही आराम से बैठे हुए थे। उन्होंने पूरी स्क्रिप्ट सुनाई और बताया कि फिल्म सिर्फ कपिलदेव नहीं पूरी टीम के बारे में है। अंत में कबीर ने हाथ मिलाते हुए आदिनाथ का फिल्म में स्वागत किया।
साथ रहती थी पूरी टीम
आदिनाथ ने यह भी बताया कि फिल्म निर्माताओं ने बहुत ही समझदारी से काम लिया और सभी अभिनेताओं को साथ रख दिया। इससे सभी के बीच अच्छी दोस्ती हो गई और वो एक टीम के रूप में खेलने लगे। बलविंदर संधू ने लगभग एक साल तक उन्हें दिलीप के बल्ले पकड़ने का अंदाज सिखाया। उन्होंने बताया कि लाला अमरनाथ दिलीप को कर्नल बोलते थे। वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे मैच में वेंगसरकर के मुंह पर गेंद लगी थी। इसके बावजूद वो मैच खेलना चाहते थे। इस बारे में जब आदिनाथ ने उनसे पूछा तो वेंगसरकर ने मुस्कुराते हुए कहा- मैं खेलना चाहता था यार। मुझे चोट की चिंता नहीं थी। हालांकि डॉक्टरों ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी।
10 साल बाद भी सुपरहिट होती 83
जब आदिनाथ से पूछा गया कि कोरोना की वजह से हुई देरी के का फिल्म में क्या असर पड़ा है तो उन्होंने कहा कि अगर यह फिल्म 10 साल बाद भी रिलीज होती तो भी सुपरहिट रहती। यह एक सदाबहार प्रोजेक्ट था। हम अपना धैर्य खो रहे थे। हालांकि सबकी दुआ काम आई और लोग यह फिल्म सिनेमाघरों में देख पा रहे हैं।
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आदिनाथ कोठारे ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि पानी फिल्म की शूटिंग करने के बाद उनका वजन लगभग 10 किलो कम हो चुका था। उन्होंने मूछें रखी हुई थी और उनका रंग भी सांवला हो रहा था। ऐसे समय पर मुकेश छाबरा के ऑफिस से उन्हें एक एड फिल्म के लिए फोन आया। जब वो वहां पहुंचे तो उन्हें पता चला कि एड फिल्म में काफी अलग लुक की जरूरत थी। जब वो वहां से लौट रहे थे तो एक असिस्टेंट ने उन्हें रोका और कहा कि वो दूसरे रोल के लिए फिट हो सकते हैं। इसके बाद आदिनाथ को दिलीप वेंगसरकर के कई वीडियो दिखाए गए और उनसे पूछा गया कि क्या वो उनका अंदाज अपना सकते हैं।
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मुझे पता था यह बड़ा प्रोजेक्ट होगा
आदिनाथ ने बताया कि जब उन्हें यह पता चला कि उनका रोल कबीर खान की फिल्म 83 के लिए है, जिसमें रणवीर सिंह कपिल देव का किरदार निभा रहे हैं तो उन्हें पता था कि यह बड़ा प्रोजेक्ट होने वाला है। उन्होंने ऑडिशन दिया, लेकिन लंबे समय तक उन्हें कोई फोन नहीं आया। वो इस बारे में लगभग भूल चुके थे। इसके बाद एक दिन उनके पास फोन आया और उनसे पूछा गया कि क्या वो अगले दिन कबीर खान से मिल सकते हैं। वो काफी उत्साहित थे। उन्होंने दिलीप वेंगसरकर के बारे में पढ़ा, शेविंग की, एक्सरसाइज की और कबीर से मिलने पहुंचे।
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कबीर खान के बारे में बात करते हुए आदिनाथ ने कहा कि कबीर सर बहुत ही आराम से बैठे हुए थे। उन्होंने पूरी स्क्रिप्ट सुनाई और बताया कि फिल्म सिर्फ कपिलदेव नहीं पूरी टीम के बारे में है। अंत में कबीर ने हाथ मिलाते हुए आदिनाथ का फिल्म में स्वागत किया।
साथ रहती थी पूरी टीम
आदिनाथ ने यह भी बताया कि फिल्म निर्माताओं ने बहुत ही समझदारी से काम लिया और सभी अभिनेताओं को साथ रख दिया। इससे सभी के बीच अच्छी दोस्ती हो गई और वो एक टीम के रूप में खेलने लगे। बलविंदर संधू ने लगभग एक साल तक उन्हें दिलीप के बल्ले पकड़ने का अंदाज सिखाया। उन्होंने बताया कि लाला अमरनाथ दिलीप को कर्नल बोलते थे। वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे मैच में वेंगसरकर के मुंह पर गेंद लगी थी। इसके बावजूद वो मैच खेलना चाहते थे। इस बारे में जब आदिनाथ ने उनसे पूछा तो वेंगसरकर ने मुस्कुराते हुए कहा- मैं खेलना चाहता था यार। मुझे चोट की चिंता नहीं थी। हालांकि डॉक्टरों ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी।
10 साल बाद भी सुपरहिट होती 83
जब आदिनाथ से पूछा गया कि कोरोना की वजह से हुई देरी के का फिल्म में क्या असर पड़ा है तो उन्होंने कहा कि अगर यह फिल्म 10 साल बाद भी रिलीज होती तो भी सुपरहिट रहती। यह एक सदाबहार प्रोजेक्ट था। हम अपना धैर्य खो रहे थे। हालांकि सबकी दुआ काम आई और लोग यह फिल्म सिनेमाघरों में देख पा रहे हैं।