IPL की गत चैम्पियन चेन्नई एक बार फिर खिताब पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए सीजन 12 के क्वालीफायर में मुंबई का सामना करेगी। ये मैच चेन्नई के घरेलू चेपॉक स्टेडियम में खेला जाएगा। जिसमें चेन्नई का हमेशा से जीत का दबदबा रहा है, लेकिन मुकाबला जब मुंबई से इस मैदान में होता है तो चेन्नई की टीम कमजोर नजर आती है।
चेन्नई की तीन बड़ी कमजोरियां, जिन्हें सुलझाए बिना धोनी नहीं जीत पाएंगे चौथी बार IPL
- कुल मैच: 26
- मुंबई जीत: 15
- चेन्नई जीत: 11
- चेपक स्टेडियम में मुंबई और चेन्नई के बीच सात मुकाबले खेले गए जिनमें पांच में मुंबई जीती
- इस सीजन में दोनों टीमों के बीच खेले गए दो मुकाबलों में मुंबई ने चेन्नई को हराया
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कमजोरी
- शीर्ष क्रम में वॉटसन और रैना का टुकड़ों में अच्छा प्रदर्शन
चेन्नई के लिए सलामी बल्लेबाजी शुरू से समस्या बनी हुई है। टूर्नामेंट की शुरुआत में अंबाती रायुडू और शेन वॉटसन को मौका मिला, लेकिन नाकमयाब होने के बाद फाफ डू प्लेसिस को टीम में लाया गया। ऐसे में फाफ तो अपना काम बखूबी निभा रहे हैं लेकिन वॉटसन अभी संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। 2008 में मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे शेन वॉटसन 14 मुकाबलों में 258 रन ही बना पाए।
सुरेश रैना भी लगातार प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। 14 मुकाबलों में 27.61 की औसत से बनाए गए 359 रन रैना जैसे बल्लेबाज के कद को शोभा नहीं देता। ऐसे में महेंद्र सिंह धोनी वॉटसन और रैना दोनों से क्वालीफायर और जरूरत पड़े तो एलिमिनेटर में भी ऑलराउंड खेल की उम्मीद करेंगे।
- केदार जाधव चोटिल, अंबाती रायुडू फॉर्म में नहीं चल रहे
चेन्नई के मध्य क्रम में भी कमजोरी साफ नजर आती है। अंबाती रायुडू का बल्ला शांत है, तो वहीं केदार जाधव के चोटिल होने के बाद चेन्नई की मुश्किल बढ़ सकती हैं। चेन्नई के पास मध्य क्रम में इस समय कोई भी मजबूत खिलाड़ी धोनी के अलावा मौजूद नहीं है जो टीम को बड़े लक्ष्य तक ले जा सकें। ऐसे में ओपनिंग के बाद मुंबई की टीम चेन्नई के कमजोर मध्यक्रम का भी फायदा उठाना चाहेगी।
- चोट से वापसी के बाद ऑलराउंडर ड्वेन ब्रावो लय में नहीं
ड्वेन ब्रावो एक ऐसा नाम है जो हर सीजन चेन्नई के लिए अहम किरदार निभाते आ रहे हैं। चोट से उबरकर टूर्नामेंट में वापसी करने वाला यह कैरेबियाई खिलाड़ी अब उस रंग में नजर नहीं आ रहा। यह धोनी के लिए चिंता का सबब है। चाहे बीच के ओवर्स हो या फिर डेथ ओवर्स। ब्रावो अपने मिश्रण से न सिर्फ रन रोकने में कारगार थे बल्कि विकेट निकालकर कर देते थे। उनकी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की कला भी किसी से छिपी नहीं।
बल्लेबाजी में मध्यक्रम के बल्लेबाजों के फेल होने के बाद पूरा दबाव कप्तान धोनी पर आ जाता है। ऐसे में अगर धोनी भी आउट हो गए तोचेन्नई का बड़े स्कोर तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। इस समस्या का चेन्नई को समाधान निकालना होगा क्योंकि अगर मुंबई के खिलाफ मैच जीतना है तो आपकी बल्लेबाजी में गहराई के साथ-साथ ताकत भी होनी चाहिए जो अंतिम ओवर्स में अधिक से अधिक रन बनाकर टीम को एक बड़े स्कोर तक ले जा सके।